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Class 10 kshitij chapter 6 notes

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Class 10 kshitij chapter 6 यह दंतुरित मुस्कान और फसल notes

यह दंतुरित मुस्कान
इस कविता में कवि ने नवजात शिशु के मुस्कान के सौंदर्य के बारे में बताया है। कवि कहते हैं की शिशु की मुस्कान इतनी मनमोहक और आकर्षक होती है की किसी मृतक में भी जान डाल दे। खेलने के बाद धूल से भरा तुम्हारा शरीर देखकर ऐसा लगता है मानो कमल का फूल तालाब छोड़कर मेरी झोपड़ी में आकर खिल गए हों। तुम्हारे स्पर्श को पाकर पत्थर भी मानो पिघलकर जल हो गया हो यानी तुम्हारे जैसे शिशु की कोमल स्पर्श पाकर किसी भी पत्थर हृदय व्यक्ति का दिल पिघल जाएगा। कवि कहते हैं की उनका मन बांस और बबूल की भांति नीरस और ठूंठ हो गया था परन्तु तुम्हारे कोमलता का स्पर्श मात्र पड़ते ही हृदय भी शेफालिका के फूलों की भांति झड़ने लगा। कवि के हृदय में वात्सल्य की धारा बह निकली और वे अपने शिशु से कहते हैं की तुमने मुझे आज से पूर्व नहीं देखा है इसलिए मुझे पहचान नही रहे। वे कहते हैं की तुम्हे थकान से उबारने के लिए मैं अपनी आँखे फेर लेता हूँ ताकि तुम भी मुझे एकटक देखने के श्रम से बच सको। कवि कहते हैं की क्या हुआ यदि तुम मुझे पहचान नही पाए। यदि आज तुम्हारी माँ न होती तो आज मैं तुम्हारी यह मुस्कान भी ना देख पाता। वे अपनी पत्नी का आभार जताते हुए की तुम्हारा मेरा क्या सम्बन्ध यह तुम इसलिए नही जानते क्योंकि मैं इधर उधर भटकता रहा, तुम्हारी ओर ध्यान ना दिया। तुम्हारी माँ ने ही सदा तुम्हें स्नेह-प्रेम दिया और देखभाल किया। पर जब भी हम दोनों की निगाहें मिलती हैं तब तुम्हारी यह मुस्कान मुझे आकर्षित कर लेती हैं।

फ़सल
इस कविता में कवि ने फसल क्या है साथ ही इसे पैदा करने में किनका योगदान रहता है उसे स्पष्ट किया है। वे कहते हैं की इसे पैदा करने में एक नदी या दो नदी का पानी नही होता बल्कि ढेर सारी नदियों का पानी का योगदान होता है अर्थात जब सारी नदियों का पानी भाप बनकर उड़ जाता है तब सब बादल बनकर बरसते हैं जो की फसल उपजाने में सहायक होता है। वे किसानों का महत्व स्पष्ट करते हुए कहते हैं की फसल तैयार करने में असंख्य लोगों के हाथों की मेहनत होती है। कवि बताते हैं की हर मिटटी की अलग अलग विशेषता होती है, उनके रूप, गुण, रंग एक सामान नहीं होते। सबका योगदान फसल को तैयार करने में है। कवि ने बताया है की फसल बहुत चीज़ों का सम्मिलित रूप है जैसे नदियों का पानी, हाथों की मेहनत, भिन्न मिट्टियों का गुण तथा सूर्य की किरणों का प्रभाव तथा मंद हवाओं का स्पर्श । इन सब के मिलने से ही हमारी फसल तैयार होती है।

कवि परिचय
नागार्जुन
इनका जन्म बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में सन 1911 को हुआ था। इनकी आरंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में हुई, बाद में अध्यन के लिए बनारस और कलकत्ता गए। 1936 में वे श्रीलंका गए और वहीं बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए। दो साल प्रवास के बाद 1938 में स्वदेस लौट आये घुमक्कड़ी और अक्खड़ स्वभाव के धनी स्वभाव के धनी नागार्जुन ने अनेक बार सम्पूर्ण भारत की यात्रा की। सन 1998 में इनकी मृत्यु हो गयी।

प्रमुख कार्य
काव्य-कृतियाँ युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, हजार-हजार बाहों वाली, तुमने कहा था, पुरानी जूतियों का कोरस, आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने, मैं मिलिटरी का बूढ़ा घोड़ा।
पुरस्कार – हिंदी अकादमी, दिल्ली का शिखर सम्मान, उत्तर प्रदेश का भारत भारती पुरस्कार, बिहार का राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार |

कठिन शब्दों के अर्थ
• दंतुरित- बच्चों के नए दांत
• धूलि धूसर- धूल मिटटी से सने अंग
• गात – शरीर
• जलजात- कमल का फूल
• परस- स्पर्श
• पाषाण- पत्थर
• शेफालिका – एक विशेष फूल
• अनिमेष- अपलक
• परिचित – जिससे जान-पहचान ना हो
• माध्यम- साधन
• चिर प्रवासी- बहुत दिनों तक कहीं रहने वाला
• इतर- अन्य
• संपर्क- सम्बन्ध
• मधुपर्क – पंचामृत
• कनखी- तिरछी निगाह से देखना
• छविमान- सुन्दर
• आँखे चार होना- परस्पर देखना
• कोटि-कोटि- करोड़ों
• महिमा- महत्ता
• रूपांतर- बदला हुआ रूप
•सिमटा हुआ संकोच- सिमटकर मंद हो गया
•थिरकन- नाच

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