प्रश्न 1. निम्नलिखित पदों को उनके अर्थ से मिलाएँ-
| (1) विश्वास बहाली के उपाय (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स CBMs) | (क) कुछ खास हथियारों के इस्तेमाल से परहेज। |
| (2) अस्त्र नियंत्रण | (ख) राष्ट्रों के बीच सुरक्षा – मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की नियमित प्रक्रिया। |
| (3) गठबंधन | (ग) सैन्य हमले की स्थिति से निबटने अथवा उसके अपरोध के लिये कुछ राष्ट्रों का आपस में मेल करना। |
| (4) निरस्त्रीकरण | (घ) हथियारों के निर्माण अथवा उनको हासिल करने पर अंकुश। |
उत्तर:
| (1) विश्वास बहाली के उपाय (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स CBMs) | (ख) राष्ट्रों के बीच सुरक्षा – मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की नियमित प्रक्रिया। |
| (2) अस्त्र नियंत्रण | (घ) हथियारों के निर्माण अथवा उनको हासिल करने पर अंकुश। |
| (3) गठबंधन | (ग) सैन्य हमले की स्थिति से निबटने अथवा उसके अपरोध के लिये कुछ राष्ट्रों का आपस में मेल करना। |
| (4) निरस्त्रीकरण | (क) कुछ खास हथियारों के इस्तेमाल से परहेज। |
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से किसको आप सुरक्षा का परंपरागत सरोकार / सुरक्षा का अपारंपरिक सरोकार / खतरे की स्थिति नहीं का दर्जा देंगे-
(क) चिकेनगुनिया / डेंगू बुखार का प्रसार
(ख) पड़ोसी देश से कामगारों की आमद
(ग) पड़ोसी राज्य से कामगारों की आमद
(घ) अपने इलाके को राष्ट्र बनाने की माँग करने वाले समूह का उदय
(ङ) अपने इलाके को अधिक स्वायत्तता दिये जाने की माँग करने वाले समूह का उदय (च) देश की सशस्त्र सेना को आलोचनात्मक नजर से देखने वाला अखबार।
उत्तर: (क) सुरक्षा का अपारम्परिक सरोकार
(ख) सुरक्षा का पारम्परिक सरोकार
(ग) खतरे की स्थिति नहीं
(घ) सुरक्षा का पारम्परिक सरोकार
(ङ) ख़तरे की स्थिति नहीं
(च) खतरे की स्थिति नहीं।
प्रश्न 3. परम्परागत और अपारंपरिक सुरक्षा में क्या अंतर है? गठबंधनों का निर्माण करना और उनको बनाये रखना इनमें से किस कोटि में आता है?
उत्तर: परम्परागत और अपारम्परिक सुरक्षा में निम्नलिखित अन्तर हैं
| पारंपरिक सुरक्षा की धारणा | अपारंपरिक सुरक्षा की धारणा |
| 1. पारंपरिक धारणा का संबंध बाहरी तथा आंतरिक रूप से मुख्यतः राष्ट्र की सुरक्षा से है। | 1. सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा में राष्ट्र की सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय अस्तित्व पर चोट करने वाले अन्य व्यापक खतरों और आशंकाओं को भी शामिल किया जाता है। |
| 2. सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में सैन्य खतरे को किसी देश के लिये सबसे ज्यादा खतरनाक समझा जाता है। इसमें भू-क्षेत्रों, संस्थाओं और राज्यों की सुरक्षा प्रमुख होती है। | 2. सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा में सैन्य खतरों के साथसाथ मानवता की सुरक्षा तथा वैश्विक सुरक्षा पर भी बल दिया जाता है। |
| 3. इसमें बाहरी सुरक्षा के खतरे का स्रोत कोई दूसरा देश (मुल्क) होता है। | 3. इसमें सुरक्षा के खतरे का स्रोत विदेशी राष्ट्र के साथसाथ कोई अन्य भी हो सकता है। |
| 4. परम्परागत सुरक्षा में एक देश की सेना व नागरिकों को दूसरे देश की सेना से खतरा होता है। | 4. अपारम्परिक सुरक्षा में देश के नागरिकों को विदेशी सेना के साथ-साथ अपने देश की सरकारों से भी बचाना आवश्यक होता है। |
| 5. पारम्परिक सुरक्षा का सरोकार बाहरी खतरे या आक्रमण से निपटने के लिए युद्ध की स्थिति में आत्मसमर्पण, अपरोध या आक्रमणकारी को युद्ध में हराने के विकल्पों को अपनाने से है। | 5. अपारंपरिक सुरक्षा का सरोकार सुरक्षा के कई नये स्रोत हैं, जैसे—आतंकवाद, भयंकर महामारियों और मानव अधिकारों पर चिंताजनक प्रहारों से जनता की क्षा करना। |
गठबंधन का निर्माण और सुरक्षा कोटि- सैनिक गठबन्धनों का निर्माण करना तथा उन्हें बनाए रखना पारम्परिक सुरक्षा की कोटि में आता है। यह सैन्य सुरक्षा का एक साधन है।
प्रश्न 4. तीसरी दुनिया के देशों और विकसित देशों की जनता के सामने मौजूद खतरों में क्या अंतर है?
उत्तर: तीसरी दुनिया के देशों और विकसित देशों की जनता के सामने मौजूद खतरों में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित है:-
- जहाँ विकसित देशों के लोगों को केवल बाहरी खतरे की आशंका रहती है, किंतु तीसरी दुनिया के देशों को आंतरिक व बाहरी दोनों प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ता है।
- तीसरी दुनिया के लोगों को पर्यावरण असंतुलन के कारण विकसित देशों की जनता के मुकाबले अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- आतंकवाद की घटनाएँ तीसरी दुनिया के देशों में अपेक्षाकृत अधिक हुई हैं।
- तीसरी दुनिया के देशों में मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में मानवीय सुरक्षा को अधिक खतरा
- तीसरी दुनिया के देशों के लोगों को निर्धनता और कुपोषण का शिकार होना पड़ रहा है जबकि विकसित देशों के लोगों के समक्ष ये समस्याएँ नगण्य हैं।
- शरणार्थियों या आप्रवासियों की समस्या की चुनौती भी तीसरी दुनिया के देशों में अधिक है।
- एच. आई. वी., एड्स, बर्ड फ्लू और सार्स जैसी महामारियों की दृष्टि से भी तीसरी दुनिया के लोगों की स्थिति विकसित देशों के लोगों की तुलना में अत्यन्त दयनीय है।
- प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से भी तीसरी दुनिया के लोगों की जनहानि विकसित देशों के लोगों की तुलना में बहुत अधिक हो रही है।
प्रश्न 5. आतंकवाद सुरक्षा के लिये परम्परागत खतरे की श्रेणी में आता है या अपरम्परागत?
उत्तर: आतंकवाद, सुरक्षा के लिए अपरम्परागत खतरे की श्रेणी में आता है। चूँकि यह नई छिपी हुई चुनौती है। इसका सामना परम्परागत सैन्य तरीके से नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि वर्तमान में आतंकवादी घटनाओं से निपटने के लिए विश्व के राष्ट्र वैश्विक स्तर पर आपसी सहयोग का प्रयास कर रहे हैं।
प्रश्न 6. सुरक्षा के परम्परागत दृष्टिकोण के हिसाब से बताएँ कि अगर किसी राष्ट्र पर खतरा मंडरा रहा हो तो उसके सामने क्या विकल्प होते हैं?
उत्तर: सुरक्षा के परम्परागत दृष्टिकोण के हिसाब से किसी राष्ट्र पर खतरा मंडरा रहा हो तो उसके सामने तीन विकल्प होते हैं- आये।
- आत्मसमर्पण करना तथा दूसरे पक्ष की बात को बिना युद्ध किये मान लेना।
- युद्ध से होने वाले नाश को इस हद तक बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा पक्ष सहम कर हमला करने से बाज
- युद्ध ठन जाये तो अपनी रक्षा करना ताकि हमलावर देश अपने मकसद में कामयाब न हो सके और पीछे हट जाये अथवा हमलावर को पराजित कर देना।
प्रश्न 7. ‘शक्ति संतुलन’ क्या है? कोई देश इसे कैसे कायम करता है?
उत्तर: शक्ति संतुलन का अर्थ:
शक्ति संतुलन का अर्थ है कि किसी भी देश को इतना सबल नहीं बनने दिया जाये कि वह दूसरों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाये शक्ति संतुलन के अन्तर्गत विभिन्न राष्ट्र अपने आपसी शक्ति सम्बन्धों को बिना किसी बड़ी शक्ति के हस्तक्षेप के स्वतन्त्रतापूर्वक संचालित करते हैं।
शक्ति संतुलन को बनाये रखने वाले साधन: शक्ति संतुलन को बनाये रखने वाले साधन निम्नलिखित हैं-
- मुआवजा या क्षतिपूर्ति: साधारणतया इसका अर्थ उस देश की भूमि को बाँटने से लिया जाता है जो शक्ति संतुलन के लिये खतरा होती है।
- हस्तक्षेप तथा अहस्तक्षेप: हस्तक्षेप राज्य या राज्यों के आंतरिक मामलों में तानाशाही दखलंदाजी होती है तथा उसमें अहस्तक्षेप, किसी विशिष्ट परिस्थिति में जानबूझकर कार्यवाही न करना ये दोनों शक्ति संतुलन को बनाये रखने के साधन हैं।
- गठबंधन बनाना: शक्ति संतुलन का एक अन्य तरीका सैन्य गठबंधन बनाना है। कोई देश दूसरे देश या देशों के साथ सैन्य गठबंधन कर अपनी शक्ति को बढ़ा लेते हैं। इससे क्षेत्र विशेष में शक्ति सन्तुलन बना रहता है।
- शस्त्रीकरण तथा निःशस्त्रीकरण – आज सभी राष्ट्र अपने शक्ति सम्बन्धों को बनाये रखने के लिये साधन के रूप में सैनिक शस्त्रीकरण को बड़ा महत्त्व देते हैं। वर्तमान में यह विश्व शांति तथा सुरक्षा अर्थात् संतुलन के लिये सबसे बड़ा और गम्भीर खतरा बन चुका है। इसके परिणामस्वरूप आज शस्त्रीकरण को छोड़कर निःशस्त्रीकरण पर बल दिया जाने लगा है।
प्रश्न 8. सैन्य गठबन्धन के क्या उद्देश्य होते हैं? किसी ऐसे सैन्य गठबन्धन का नाम बताएँ जो अभी मौजूद है। इस गठबन्धन के उद्देश्य भी बताएँ।
उत्तर: सैन्य गठबन्धन का उद्देश्य – सैन्य गठबंधन का उद्देश्य विरोधी देश के सैन्य हमले को रोकना अथवा उससे अपनी रक्षा करना होता है। सैन्य गठबन्धन में कई देश शामिल होते हैं। सैन्य गठबंधन बनाकर एक विशेष क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाये रखने का प्रयास किया जाता है। सामान्यतः सैन्य गठबन्धन संधि पर आधारित होते हैं जिसमें इस बात का लिखित में उल्लेख होता है कि एक राष्ट्र पर आक्रमण अन्य सदस्य राष्ट्रों पर भी आक्रमण समझा जायेगा।
विद्यमान सैन्य गठबंधन – नाटो – वर्तमान समय में ‘नाटो’ (North Atlantic Treaty Organization) अर्थात् उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) नाम का सैन्य गठबंधन कायम है। नाटो के मुख्य उद्देश्य निम्न हैं।
- संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में सभी अमेरिकी और पश्चिमी यूरोपीय देशों की सामूहिक सैन्य सुरक्षा को बनाये रखना।
- नाटो के एक सदस्य पर आक्रमण सभी पर आक्रमण समझा जाएगा और सभी मिलकर सैन्य प्रतिरोध करेंगे।
- पश्चिमी देशों के सैन्य वैचारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक वर्चस्व को बनाये रखना।
- सदस्यों में आर्थिक सहयोग को बढ़ाना तथा उसके विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना।
प्रश्न 9. पर्यावरण के तेजी से हो रहे नुकसान से देशों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? उदाहरण देते हुए अपने तर्कों की पुष्टि करें।
उत्तर: विश्व स्तर पर पर्यावरण तेजी से खराब हो रहा है। पर्यावरण खराब होने से निस्संदेह मानव जाति को खतरा उत्पन्न हो गया है। वैश्विक पर्यावरण के नुकसान से देशों की सुरक्षा को निम्न खतरे पैदा हो रहे हैं।
- ग्लोबल वार्मिंग से हिमखण्ड पिघलने लगे हैं, जिसके कारण मालद्वीप तथा बांग्लादेश जैसे देश तथा भारत के मुम्बई जैसे शहरों के पानी में डूबने की आशंका पैदा हो गई है।
- पर्यावरण खराब होने से तथा धरती के ऊपर वायुमण्डल में ओजोन गैस की कमी होने से वातावरण में कई तरह की बीमारियाँ फैल गई हैं, जिसके कारण व्यक्तियों के स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है।
- कृषि योग्य भूमि, जलस्रोत तथा वायुमण्डल के प्रदूषण से खाद्य उत्पादन में तथा यह मानव स्वास्थ्य के लिए घातक है। विकासशील देशों में स्वच्छ जल की उपलब्धता में कमी आई है। उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि पर्यावरण के तेजी से हो रहे नुकसान से देशों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
प्रश्न 10. देशों के सामने फिलहाल जो खतरे मौजूद हैं उनमें परमाण्विक हथियार का सुरक्षा अथवा अपरोध के लिये बड़ा सीमित उपयोग रह गया है। इस कथन का विस्तार करें।
उत्तर: विश्व में जिन देशों ने परमाणु हथियार प्राप्त कर रखे हैं, उनका यह तर्क है कि उन्होंने शत्रु देश के आक्रमण से बचने तथा शक्ति संतुलन कायम रखने के लिये इनका निर्माण किया है, परन्तु वर्तमान समय में इन हथियारों के होते हुये भी एक देश की सुरक्षा की पूर्ण गारंटी नहीं दी जा सकती। उदाहरण के लिये आतंकवाद तथा पर्यावरण के खराब होने से वातावरण में जो बीमारियाँ फैल रही हैं, उन पर परमाणु हथियारों के उपयोग का कोई औचित्य नहीं है। इसीलिये यह कहा जाता है कि वर्तमान समय में जो ख़तरे उत्पन्न हुये हैं, उनमें परमाण्विक हथियार का सुरक्षा अथवा अपरोध के लिये बड़ा सीमित उपयोग रह गया है।
प्रश्न 11. भारतीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुये किस किस्म की सुरक्षा को वरीयता दी जानी चाहिये- पारंपरिक या अपारंपरिक ? अपने तर्क की पुष्टि में आप कौन-से उदाहरण देंगे?
उत्तर: भारतीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुये भारत को पारम्परिक एवं अपारम्परिक दोनों प्रकार की सुरक्षा को वरीयता देनी चाहिये। क्योंकि भारत सैनिक दृष्टि से भी सुरक्षित नहीं है एवं अपारम्परिक ढंग से भी सुरक्षित नहीं है। भारत के दो पड़ौसी देशों पाकिस्तान और चीन के पास परमाणु हथियार हैं तथा उन्होंने भारत पर आक्रमण भी किया है। चीन की सैन्य क्षमता भारत से अधिक है। इसके साथ ही भारत के कई क्षेत्रों, जैसे- कश्मीर, नागालैंड, असम आदि में अलगाववादी हिंसक गुट तथा कुछ क्षेत्रों में नक्सलवादी समूह सक्रिय हैं।
अतः भारत को पारम्परिक सुरक्षा को वरीयता देना आवश्यक है। इसके साथ-साथ अपारम्परिक सुरक्षा की दृष्टि से भारत में कई समस्याएँ हैं, जिसके कारण भारत को अपारम्परिक सुरक्षा को भी वरीयता देनी चाहिये । उदाहरण के लिए भारत में आतंकवाद का निरन्तर विस्तार हो रहा है; एड्स जैसी महामारी बढ़ रही है; मानवाधिकारों का उल्लंधन हो रहा है; धार्मिक और जातीय संघर्ष की स्थिति बनी रहती है तथा निर्धनता जनित समस्याएँ बढ़ रही हैं। इसलिए भारत को पारम्परिक और अपारम्परिक दोनों ही सुरक्षा साधनों पर ध्यान देना चाहिए।
प्रश्न 12. पाठ्यपुस्तक में पृष्ठ संख्या 116 में दिए गए कार्टून को समझें। कार्टून में युद्ध और आतंकवाद का जो संबंध दिखाया गया है उसके पक्ष या विपक्ष में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: इस कार्टून में यह बताया गया है कि आजकल युद्ध और आतंकवाद में गहरा सम्बन्ध है। पिछले कुछ वर्षों में जो युद्ध लड़े गये हैं, उनका प्रमुख कारण आतंकवाद ही था। उदाहरण के लिए 2001 में आतंकवाद के कारण ही अमेरिका ने अफगानिस्तान में युद्ध लड़ा। दिसम्बर, 2001 में आतंकवाद के कारण ही भारत और पाकिस्तान में युद्ध की स्थिति बन गयी थी। युद्ध और आतंकवाद के गहरे सम्बन्ध को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है। युद्ध की जड़ में एक अहम कारण आतंकवाद है जो मानव सुरक्षा के लिए एक नया सरोकार बनाए हुए है। युद्ध के पक्षधर देश यह मानते हैं कि आतंकवाद को कुचलने के लिए सभी राष्ट्र एक हो जाएँ और वे तब तक युद्ध का मोर्चा खोले रहें जब तक आतंकवाद समाप्त नहीं हो जाता।