प्रश्न 1. निम्नलिखित में मेल करें:
| (क) सामाजिक-धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य का निर्माण | (i) नगालैंड/मिजोरम |
| (ख) भाषायी पहचान और केंद्र के साथ तनाव | (ii) झारखंड / छत्तीसगढ़ |
| (ग) क्षेत्रीय असंतुलन के फलस्वरूप राज्य का निर्माण | (iii) पंजाब |
| (घ) आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी माँग | (iv) तमिलनाडु |
उत्तर:
| (क) सामाजिक-धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य का निर्माण | (iii) पंजाब |
| (ख) भाषायी पहचान और केंद्र के साथ तनाव | (iv) तमिलनाडु |
| (ग) क्षेत्रीय असंतुलन के फलस्वरूप राज्य का निर्माण | (i) झारखंड / छत्तीसगढ़ |
| (घ) आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी माँग | (ii) नगालैंड/मिजोरम |
प्रश्न 2. पूर्वोत्तर के लोगों की क्षेत्रीय आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति कई रूपों में होती है। बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन, ज्यादा स्वायत्तता की माँग के आंदोलन और अलग देश बनाने की माँग करना ऐसी ही कुछ अभिव्यक्तियाँ हैं। पूर्वोत्तर के मानचित्र पर इन तीनों के लिये अलग-अलग रंग भरिये और दिखाइये कि किस राज्य में कौन-सी प्रवृत्ति ज्यादा प्रबल है?
उत्तर:
- बाहरी लोगों के खिलाफ आन्दोलन – असम
- ज्यादा स्वायत्तता की माँग के आन्दोलन – मेघालय
- अलग देश बनाने की माँग – मिजोरम

(अलग देश बनाने की माँग नगालैण्ड व मिजोरम ने की थी। कुछ समय पश्चात् मिजोरम स्वायत्त राज्य बनने के लिए तैयार हो गया। मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मणिपुर को राज्य का दर्जा दे दिया गया है।) अतः मिजोरम की माँग का समाधान हो गया है, लेकिन नगालैण्ड में अलगाववाद की समस्या का पूर्ण हल अभी तक नहीं हो पाया है।
प्रश्न 3. पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधान क्या थे? क्या ये प्रावधान पंजाब और उसके पड़ौसी राज्यों के बीच तनाव बढ़ाने के कारण बन सकते हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: पंजाब समझौता: जुलाई, 1985 में अकाली दल के तत्कालीन अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल और प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच एक समझौता हुआ जिसे पंजाब – समझौता कहा जाता है। इस समझौते के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं-
- मारे गये निरपराध व्यक्तियों के लिए मुआवजा: एक सितम्बर, 1982 के बाद हुई किसी कार्यवाही या आन्दोलन में मारे गए लोगों को अनुग्रह राशि के भुगतान के साथ सम्पत्ति की क्षति के लिए मुआवजा दिया जाएगा।
- सेना में भर्ती; देश के सभी नागरिकों को सेना में भर्ती का अधिकार होगा और चयन के लिए केवल योग्यता ही आधार रहेगा।
- सेना से निकाले हुए व्यक्तियों का पुनर्वास: सेना से निकाले हुए व्यक्तियों और उन्हें लाभकारी रोजगार दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
- विशेष सुरक्षा अधिनियम को वापस लेने पर सहमति: पंजाब में उग्रवाद प्रभावित लोगों को मुआवजा प्रदान करने तथा उनके साथ अच्छा व्यवहार करने को तैयार हो गई तथा पंजाब से विशेष सुरक्षा अधिनियम को वापस लेने की बात पर भी सहमत हो गई।
- सीमा विवाद: चण्डीगढ़ की राजधानी परियोजना क्षेत्र और सुखना ताला पंजाब को दिए जाएंगे । केन्द्र शासित प्रदेश के अन्य पंजाबी क्षेत्र पंजाब को तथा हिन्दी भाषी क्षेत्र हरियाणा को दिए जाएंगे।
ये प्रावधान पंजाब और उसके पड़ौसी राज्यों के बीच तनाव बढ़ाने का कारण नहीं बन सकते हैं क्योंकि इसमें इन राज्यों के विवादास्पद मुद्दों को नहीं छुआ गया है।
प्रश्न 4. आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव के विवादास्पद होने के क्या कारण थे?
उत्तर: आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव के विवादास्पद होने का मुख्य कारण यह था कि इस प्रस्ताव में पंजाब सूबे के लिए अधिक स्वायत्तता की मांग की गई, जो कि परोक्ष रूप से एक अलग सिख राष्ट्र की माँग को बढ़ावा देती है। दूसरे यह प्रस्ताव ‘सिख वर्चस्व’ का ऐलान करता था।
प्रश्न 5. आपकी राय में कश्मीर में क्षेत्रीय आकांक्षाएँ उभर आने के कारण स्पष्ट कीजिए।
अथवा
जम्मू-कश्मीर की अंदरूनी विभिन्नताओं की व्याख्या कीजिए और बताइए कि इन विभिन्नताओं के कारण इस राज्य में किस तरह अनेक क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने सिर उठाया है।
उत्तर: अंदरूनी विभिन्नताएँ:
जम्मू-कश्मीर में अधिकांश रूप में अंदरूनी विभिन्नताएँ पायी जाती हैं। जम्मू- कश्मीर राज्य में तीन राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र – जम्मू कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। जम्मू पहाड़ी क्षेत्र है, इसमें हिन्दू-मुस्लिम और सिक्ख अर्थात् कई धर्मों एवं भाषाओं के लोग रहते हैं। कश्मीर में मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या अधिक है और यहाँ पर हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। जबकि लद्दाख पर्वतीय क्षेत्र है, इसमें बौद्ध, मुस्लिम की आबादी है। इतनी विभिन्नताओं के कारण यहाँ पर कई क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने सिर उठाया है। यथा
- इसमें पहली आकांक्षा कश्मीरी पहचान की है जिसे कश्मीरियत के रूप में जाना जाता है। कश्मीर के निवासी सबसे पहले अपने को कश्मीरी तथा बाद में कुछ और मानते थे
- राज्य में उग्रवाद और आतंकवाद को दूर करना भी यहाँ के लोगों की एक मुख्य आकांक्षा है।
- स्वायत्तता की बात जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों को अलग-अलग ढंग से लुभाती है। यहाँ पूरे राज्य में स्वायत्तता की माँग जितनी प्रबल है, उतनी ही प्रबल माँग राज्य के विभिन्न भागों में अपनी-अपनी स्वायत्तता को लेकर है। जम्मू-कश्मीर में कई राजनीतिक दल हैं, जो जम्मू-कश्मीर के लिए स्वायत्तता की माँग करते रहते हैं। इसमें नेशनल कांफ्रेंस सबसे महत्त्वपूर्ण दल है।
- इसके अतिरिक्त कुछ उग्रवादी संगठन भी हैं, जो धर्म के नाम पर जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं
प्रश्न 6. कश्मीर की क्षेत्रीय स्वायत्तता के मसले पर विभिन्न पक्ष क्या हैं? इनमें से कौनसा पक्ष आपको समुचित जान पड़ता है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर: कश्मीर की स्वायत्तता का मसला- कश्मीर की क्षेत्रीय स्वायत्तता के मसले पर मुख्य रूप से दो पक्ष सामने आते हैं- प्रथम पक्ष वह है जो धारा 370 को समाप्त करना चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष वह है जो इस राज्य को और अधिक स्वायत्तता देना चाहता हैं। यदि इन दोनों पक्षों का उचित ढंग से अध्ययन किया जाए तो प्रथम पक्ष अधिक उचित दिखाई पड़ता है जो धारा 370 को समाप्त करने के पक्ष में है। उनका तर्क है कि इस धारा के कारण यह राज्य भारत के साथ पूरी तरह नहीं मिल पाया है। इसके साथ-साथ जम्मू-कश्मीर को अधिक स्वायत्तता देने से कई प्रकार की राजनीतिक एवं सामाजिक समस्याएँ भी पैदा होती हैं।
प्रश्न 7. असम आन्दोलन सांस्कृतिक अभिमान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली-जुली अभिव्यक्ति था। व्याख्या कीजिए।
अथवा
ऑल असम स्टूडेंटस यूनियन (आ सू) द्वारा चलाये गये आंदोलनों की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर: असम आन्दोलन – 1979 से 1985 तक असम में बाहरी लोगों के खिलाफ चला, असम आंदोलन असम के सांस्कृतिक अभियान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली-जुली अभिव्यक्ति था क्योंकि-
1. असमी लोगों के मन में यह भावना घर कर गई थी कि असम में बांग्लादेश से आए विदेशी लोगों को पहचान कर उन्हें अपने देश नहीं भेजा गया तो स्थानीय असमी जनता अल्पसंख्यक हो जायेगी। यह उन्हें असमी संस्कृति पर ख़तरा दिखाई दे रहा था। अतः 1979 में ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने जब यह माँग की कि 1951 के बाद जितने भी लोग असम में आकर बसे हैं उन्हें असम से बाहर भेजा जाए, तो इस आंदोलन को पूरे असम में समर्थन मिला।
2. असम आंदोलन के पीछे आर्थिक मसले भी जुड़े थे। असम में तेल, चाय और कोयले जैसे प्राकृतिक संसाधनों की मौजूदगी के बावजूद व्यापक गरीबी थी। यहाँ की जनता ने माना कि असम के प्राकृतिक संसाधन बाहर भेजे जा रहे हैं और असमी लोगों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। दूसरे, भारत के अन्य राज्यों से या किसी अन्य देश से आए लोग यहाँ के रोजगार के अवसरों को हथिया रहे हैं और यहाँ की जनता उनसे वंचित हो रही है।
प्रश्न 8. हर क्षेत्रीय आन्दोलन अलगाववादी माँग की तरफ अग्रसर नहीं होता । इस अध्याय से उदाहरण देकर इस तथ्य की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भारत के कई क्षेत्रों में काफी समय से कुछ क्षेत्रीय आन्दोलन चल रहे हैं, परन्तु सभी क्षेत्रीय आन्दोलन अलगाववादी आन्दोलन नहीं होते अर्थात् कुछ क्षेत्रीय आन्दोलन भारत से अलग नहीं होना चाहते बल्कि अपने लिए अलग राज्य की मांग करते हैं, जैसे—झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का आन्दोलन, छत्तीसगढ़ के आदिवासियों द्वारा चलाया गया आन्दोलन तथा तेलंगाना प्रजा समिति द्वारा चलाया गया आन्दोलन इत्यादि ऐसे ही आन्दोलन रहे हैं और अपने क्षेत्र के लिए एक पृथक् राज्य के गठन के बाद ये आन्दोलन समाप्त हो गये हैं ।
प्रश्न 9. भारत के विभिन्न भागों से उठने वाली क्षेत्रीय मांगों से ‘विविधता में एकता’ के सिद्धान्त की अभिव्यक्ति होती है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? तर्क दीजिए।
उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ कि भारत के विभिन्न भागों से उठने वाली क्षेत्रीय मांगों से विविधता में एकता के सिद्धान्त की अभिव्यक्ति होती है क्योंकि देश के विभिन्न क्षेत्रों से विभिन्न प्रकार की माँगें उठीं। तमिलनाडु में जहाँ हिन्दी भाषा के विरोध और अंग्रेजी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में बनाए रखने की माँग उठी, तो असम में विदेशियों को असम से बाहर निकालने की माँग उठी, नगालैंड और मिजोरम में अलगाववाद की माँग उठी तो आंध्रप्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व अन्य राज्यों में भाषा के आधार पर अलग राज्य बनाने की माँग उठी।
इसी प्रकार उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ तथा झारखण्ड क्षेत्रों में प्रशासनिक सुविधा तथा आदिवासियों के हितों की रक्षा हेतु अलग राज्य बनाने के. आंदोलन हुए। अभी भी विभिन्न क्षेत्रों से भिन्न-भिन्न प्रकार की माँगें उठ रही हैं जिनका मुख्य आधार क्षेत्रीय पिछड़ापन है । इससे स्पष्ट होता है कि भारत के विभिन्न भागों से उठने वाली क्षेत्रीय माँगों से विविधता के दर्शन होते हैं। भारत सरकार ने इन माँगों के निपटारे के लिए लोकतांत्रिक दृष्टिकोण अपनाते हुए एकता का परिचय दिया है।
प्रश्न 10. नीचे लिखे अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें:
हजारिका का एक गीत एकता की विजय पर है; पूर्वोत्तर के सात राज्यों को इस गीत में एक ही माँ की सात बेटियाँ कहा गया है. मेघालय अपने रास्ते गई अरुणाचल भी अलग हुई और मिजोरम असम के द्वार पर दूल्हे की तरह दूसरी बेटी से ब्याह रचाने को खड़ा है इस गीत का अंत असमी लोगों की एकता को बनाए रखने के संकल्प के साथ होता है और इसमें समकालीन असम में मौजूद छोटी-छोटी कौमों को भी अपने साथ एकजुट रखने की बात कही गई है। करबी और मिजिंग भाई-बहन हमारे ही प्रियजन हैं। संजीव बरुआ
(क) लेखक यहाँ किस एकता की बात कर रहा है?
(ख) पुराने राज्य असम से अलग करके पूर्वोत्तर के अन्य राज्य क्यों बनाए गए?
(ग) क्या आपको लगता है कि भारत के सभी क्षेत्रों के ऊपर एकता की यही बात लागू हो सकती है? क्यों?
उत्तर: (क) लेखक यहाँ पर पूर्वोत्तर राज्यों की एकता की बात कर रहा है।
(ख) सभी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए तथा आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए पुराने राज्य असम से अलग करके पूर्वोत्तर के अन्य राज्य बनाए गए।
(ग) भारत के सभी क्षेत्रों पर एकता की यह बात लागू हो सकती है, क्योंकि भारत के सभी राज्यों में अलग- अलग धर्मों एवं जातियों के लोग रहते हैं तथा देश की एकता एवं अखण्डता के लिए उनमें एकता कायम करना आवश्यक है। दूसरे, भारत के संविधान में क्षेत्रीय विभिन्नताओं और आकांक्षाओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। तीसरे, देश के नेता तथा सभी राजनीतिक दल एकता के समर्थक हैं।