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class 12 geography manav bhugol ke mul siddhant chapter 6 solution hindi

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6) द्वितीयक क्रियाएँ


प्र० 1. नीचे दिये गये चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

(i) निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(क) हुगली के सहारे जूट के कारखाने सस्ती जल यातायात की सुविधा के कारण स्थापित हुए।
(ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग हैं।
(ग) खनिज तेल एवं जलविद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है।
(घ) पत्तन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है।

(ii) निम्न में से कौन-सी एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है?
(क) पूँजीवाद
(ख) मिश्रित
(ग) समाजवाद
(घ) कोई भी नहीं।

(iii) निम्न में से कौन-सा एक प्रकार का उद्योग अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन करता है?
(क) कुटीर उद्योग
(ख) छोटे पैमाने के उद्योग
(ग) आधारभूत उद्योग।
(घ) स्वच्छंद उद्योग

(iv) निम्न में से कौन-सा एक जोड़ा सही मेल खाता है?
(क) स्वचालित वाहन उद्योग …………. लॉस एंजिल्स
(ख) पोत निर्माण उद्योग ………………………
(ग) वायुयान निर्माण उद्योग ………………….. फलोरेंस
(घ) लौह-इस्पात उद्योग …………….. पिट्सबर्ग

उत्तर:
(i) (ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग है।
(ii) (क) पूँजीवाद
(iii) (ग) आधारभूत उद्योग
(iv) (घ) लौह-इस्पात उद्योग ……………………. पिट्स बर्ग।

प्र० 2. निम्नलिखित पर लगभग 30 शब्दों में टिप्पणी लिखिए|
(i) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग ।
(ii) विनिर्माण
(iii) स्वच्छंद उद्योग

उत्तर:
(i) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग – ये नवीनतम पीढ़ी के उद्योग हैं जिनमें उन्नत वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्माण एवं विकास गहन शोध के पश्चात् किया जाता है। इनमें सफेद कॉलर श्रमिकों (व्यावसायिक श्रमिकों) की संख्या अधिक होती है। इन उद्योगों में यंत्र-मानव (रोबोट) कंप्यूटर आधारित डिज़ाइन तथा निर्माण, इलेक्ट्रानिक नियंत्रण वाले शोधकार्य तथा नये रासायनिक व औषधीय उत्पादों का निर्माण होता है।

(ii) विनिर्माण – विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है ‘हाथ से बनाना’, किंतु अब इसमें यंत्रों व मशीनों द्वारा बनायी गई वस्तुएँ भी सम्मिलित की जाती हैं। अतः विनिर्माण जैविक व अजैविक पदार्थों का एक नये उत्पान के रूप में यांत्रिक एवं रासायनिक परिवर्तन है। चाहे यह वस्तुएँ किसी कारखाने अथवा कामगार के घर में निर्मित हुई हों।

(iii) स्वच्छंद उद्योग-इने उद्योगों की स्थापना में परंपरागत कारक प्रभावी नहीं होते हैं; बल्कि इन्हें कहीं भी औद्योगिक संकुलों में स्थापित किया जा सकता है। क्योंकि इन उद्योगों का कच्चा माल दूसरे उद्योगों को तैयार माल होता है, जिनमें क्षति का स्तर बहुत ही कम होता है। ये उद्योग संघटक पुरजों पर निर्भर रहते हैं जो कहीं भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

प्र० 3. निम्न प्रश्नों का 150 शब्दों में उत्तर दीजिए

(i) प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में क्या अन्तर है?

उत्तर: प्राथमिक गतिविधियाँ
1. इनमें वे मानवीय क्रियाकलाप आते हैं, जो सीधे पर्यावरण से जुड़े होते हैं।
2. प्रकृति से प्राप्त पदार्थों का उपभोग बिना प्रसंस्करण के अथवा अल्प-प्रसंस्करण के उपभोक्ताओं द्वारा कर लिया जाता है।
3. इसके अंतर्गत-आखेट, भोजन संग्रह, पशुचारण, मछली पकड़ना, वनों से लकड़ी, कंद-मूल-फल व अन्य उत्पाद एकत्रित करना, कृषि एवं खनन कार्य सम्मिलित किए जाते हैं।
4. इन गतिविधियों के अंतर्गत वे क्षेत्र आते हैं जहाँ विषम जलवायविक व भौगोलिक दशाएँ विद्यमान होती हैं।
5. यहाँ के अधिकतर निवासी आदिम सामाजिक जीवन जी रहे होते हैं।
6. ये वे क्षेत्र हैं जहाँ अभी तक आधुनिक प्रौद्योगिकी व तकनीकी का विकास व हस्तक्षेप नहीं हुआ है।

द्वितीयक गतिविधियाँ-
1: इनमें वे मानवीय क्रियाकलाप आते हैं जिनके द्वारा प्राथमिक उत्पादों के गुणों व रूप में परिवर्तन करके उन्हें और अधिक उपयोगी व मूल्यवान बनाया जाता है।
2. विभिन्न यांत्रिक व मशीनीकृत प्रक्रियाओं के द्वारा प्राथमिक उत्पादों को प्रसंस्कृत करने के बाद उपभोक्ताओं के उपभोग के लिए भेजा जाता है।
3. इसके लिए छोटे घरेलू उद्योग से लेकर बड़े-बड़े कारखाने व औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित की गयी हैं।
4. इन गतिविधियों के अंतर्गत उच्च जनसंख्या वाले विकसित तथा विकासशील क्षेत्र आते हैं।
5. इनके लिए भौगोलिक व जलवायविक दशाएँ इतना महत्त्व नहीं रखतीं जितना प्राथमिक क्रियाओं के लिए महत्त्वपूर्ण होती हैं।
6. विश्व के इन क्षेत्रों को आधुनिकीरण व प्रौद्योगिकीकरण उच्च स्तर तक पहुँच चुका है।

(ii) विश्व के विकसित देशों, उद्योगों के संदर्भ में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।

उत्तर: विश्व के विकसित देशों में उद्योगों में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृत्तियाँ इस प्रकार हैं

1. कौशल (श्रम) का विशिष्टीकरण – शिल्प विधि से, कारखानों में सीमित मात्रा में ही सामान उत्पादित किया जाता है जोकि आदेशानुसार बनाया जाता है। अत: इस पर लागत अधिक आती है। अधिक उत्पादन के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक कारीगर निरंतर एक ही प्रकार का कार्य करे जिसमें उसकी विशिष्टता है।

2. यंत्रीकरण – यंत्रीकरण से तात्पर्य, किसी कार्य को पूर्ण करने के लिए मशीनों व उपकरणों के प्रयोग से है। स्वचा. लित कारखानों को पुनर्निवेशन एवं संवृत-पाश कंप्यूटर नियंत्रण प्रणाली से युक्त किया गया है। इनमें मशीनों को ‘सोचने के लिए विकसित किया गया है जोकि अब पूरे विश्व में दिखाई देने लगी हैं।

3. प्रौद्योगिकीय नवाचार – प्रौद्योगिक नवाचार में शोध तथा विकासमान युक्तियों के द्वारा विनिर्माण की गुणवत्ता को नियंत्रित करने, अपशिष्टों के निस्तारण एवं अदक्षता को समाप्त करने तथा प्रदूषण को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है।

4. संगठनात्मक ढाँचा एवं स्तरीकरण-आधुनिक निर्माण की विशेषताएँ हैं
(i) एक जटिल प्रौद्योगिकी तंत्र,
(ii) अत्यधिक विशिष्टीकरण एवं श्रम विभाजन के द्वारा अल्प लागत से अधिक उत्पादन
(iii) अधिक पूँजी निवेश
(iv) बड़े संगठन तथा
(v) प्रशासकीय अधिकारी वर्ग।

5. अनियमित भौगोलिक वितरण – आधुनिक निर्माण के मुख्य संकेंद्रण कुछ ही स्थानों तक सीमित हैं। विश्व के कुल स्थलीय भाग के 10% से भी कम भू-भाग पर इसका विस्तार है। किंतु ये क्षेत्र आर्थिक एवं राजनतिक शक्ति के केंद्र बन गये हैं तथा जहाँ पर वृहत कारखाने स्थापित हैं, वहाँ हजारों श्रमिकों को रोजगार दिया जा सकता है साथ ही हज़ारों मनुष्यों को भरण-पोषण संभव है।

(iii) अधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिधि क्षेत्रों में ही क्यों विकसित हो रहे हैं? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: विश्व अर्थव्यवस्था में निर्माण उद्योगों का बड़ा योगदान है। लौह-इस्पात, वस्त्र, मोटर गाड़ी निर्माण, पेट्रो रसायन एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विश्व के प्रमुख निर्माण उद्योग हैं। किंतु उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग नवीनतम पीढी के उद्योगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें उन्नत वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्माण गहन शोध एवं विकास पर आधारित प्रयोगों पर खरा उतरने के बाद किया जाता है। इसमें संलग्न संपूर्ण श्रमिक शक्ति का अधिकतर भाग व्यावसायिक (सफेद कॉलर) श्रमिकों का होता है। ये उच्च दक्षता प्राप्त विशिष्ट श्रमिक, वास्तविक उत्पादक (नीला कॉलर) श्रमिकों से संख्या में अधिक होते हैं। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों में यंत्रमानव (रोबोट), कंप्यूटर आधारित डिज़ाइन (कैड) तथा निर्माण धातु पिघलाने एवं शोधन के इलैक्ट्रोनिक नियंत्रण एवं नए रासायनिक व औषधीय उत्पाद प्रमुख स्थान रखते हैं। इस भू-दृश्य में विशाल भवनों, कारखानों एवं भंडार क्षेत्रों के स्थान पर आधुनिक, नीचे साफ-सुथरे, बिखरे कार्यालय एवं प्रयोगशाला देखने को मिलती हैं। वर्तमान में जो भी प्रादेशिक व स्थानीय विकास की योजनाएँ बन रही हैं उनमें नियोजित व्यवसाय पार्क का निर्माण किया जा रहा है। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों में निर्मित अधिकांश उत्पादों की मांग महानगरों में अधिक है साथ ही प्रौद्योगिकी व कुशल श्रमिक भी महानगरों में उपलब्ध हैं अतः विश्व के अधिकांश देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिधि क्षेत्रों में ही विकसित हुए हैं।
(iv) अफ्रीका में अपरिमित प्राकृतिक संसाधन हैं, फिर भी औद्योगिक दृष्टि से यह बहुत पिछड़ा महाद्वीप है। समीक्षा कीजिए।
उत्तर: अफ्रीका महाद्वीप प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न महाद्वीप है। इस महाद्वीप का मध्य भाग उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों से आच्छादित है। इसके पठारी भागों में खनिजों के अपार भंडार निक्षेपित हैं जिनमें खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, लौह-अयस्क, कोयला, यूरेनियम, तांबा, बॉक्साइट, सोना, हीरा, कोबाल्ट तथा जस्ता महत्त्वपूर्ण हैं। यहाँ की अनेक सदानीरा नदियों में जलविद्युत पैदा करने की असीम संभावनाएँ हैं। विश्व की सबसे लम्बी नील नदी इसके मरुस्थलीय भाग को जीवन प्रदान करती है। इसी नदी घाटी में मिश्र की प्राचीन सभ्यता फली-फूली व विकसित हुई थी। एक अनुमान के अनुसार, विश्व की 40% संभाव्य जलविद्युत अफ्रीका की नदियों में विद्यमान है। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी अफ्रीका महाद्वीप औद्योगिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ महाद्वीप है। क्योंकि, इसके अधिकांश भू-भाग यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियों के अधीन उनके उपनिवेश रहे हैं। इन साम्राज्यवादी शक्तियों ने यहाँ उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का दोहन अपने देशों का विकास करने के लिए किया था। अपने अधीन उपनिवेशों की अर्थव्यवस्था सुधारने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। परिणामतः यूरोपवासियों के संपर्क में रहने के बावजूद भी, इस महाद्वीप के देशों की अर्थव्यवस्था पिछड़ी रही। क्योंकि, यहाँ आधारभूत उद्योगों व प्रौद्योगिकी को अभी तक विकास नहीं हो पाया है, जिनके द्वारा ये देश अपने संसाधनों का उपयोग अपने विकास के लिए कर सकें, अतः संसाधनों की बहुलता होते हुए भी यह महाद्वीप औद्योगिक दृष्टि से आज भी पिछड़ा हुआ है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. द्वितीयक आर्थिक क्रिया का अर्थ बताइये।

उत्तर : प्राकृतिक रूप से प्राप्त कच्चे माल को जब मनुष्य अपना कौशल ज्ञान एंव श्रम लगा कर नये उपयोगी उत्पाद में बदल देता है तो इस द्वितीय आर्थिक क्रिया कहा जाता है।


प्रश्न 2. द्वितीयक गतिविधियों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है। एक कारण बताइये।

उत्तर : द्वितीयक गतिविधियों के अन्तर्गत विनिर्माण द्वारा कच्चे माल का रूप बदलकर उसे उपयोगी उत्पाद के परिवर्तित कर देते हैं जिससे वह कच्चा माल एक मूल्यवान उत्पाद बन जाता है।


प्रश्न 4. विनिर्माण से क्या आशय है ?

उत्तर : विनिर्माण से आशय किसी भी वस्तु का उत्पादन है।


प्रश्न 5. विनिर्माण की कोई एक सामान्य विशेषता बताइऐ।

उत्तर : एक ही प्रकार की वस्तुओं का विशाल उत्पादन।


प्रश्न 5. विनिर्माण किस प्रकार किया जाता है ?

उत्तर : विनिर्माण हाथ से या मशीनों से किया जाता है।

प्रश्न 6. कौशल के विशिष्टीकरण से क्या तात्पर्य है ।

उत्तर : बडप़े पैमाने पर किया जाने वाले अधिक उत्पादन जिसमें प्रत्येक कारीगर निरंतर एक ही प्रकार का कार्य करता है।


प्रश्न 7. उद्योग अपनी लागत घटाकर लाभ किस प्रकार बढा सकत हैं?

उत्तर :
उद्योगों की स्थापना उस स्थान पर करके जहाँ उत्पादन लागत कम आए।

प्रश्न 8. कृषि प्रसंस्करण एंव डेरी उत्पाद कृषि उत्पादन अथवा क्षेत्रों दुग्ध आपूर्ति स्त्रोतों के समीप ही संसाधित किए जाते हैं। एक कारण बताइए।

उत्तर : कच्चे माल (दूध) की शीघ्र नष्ट होने वाली प्रकृति के कारण।

प्रश्न 9. पश्चिमी यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भागों में उद्योगों का सकेंद्रण होने का एक कारण बताइए ?

उत्तर : अत्याधिक परिवहन तंत्र का विकसित होना।

प्रश्न 10. समूहन अर्थव्यवस्था से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर : प्रधान उद्योग की समीपता से अन्य अनेक उद्योगों का लाभांवित होना समूहन अर्थव्यवस्था है।


प्रश्न 11. निर्माण की सबसे छोटी ईकाई कौन सी है ?

उत्तर : कुटीर उद्योग


प्रश्न 12. विश्व के प्रमुख औद्योगिक प्रदेशों को उनके वृहत् पैमाने पर किए गए निर्माण के आधार पर कितने समूहों में बांटा जा सकता है?

उत्तर : 1) परंपरागत वृहत् औद्योगिक प्रदेश जिनके समूह कुछ अधिक विकसित देशों में है।
2 ) उच्च प्रौद्योगिकी वाले वृहत् औद्योगिक प्रदेश जिनका विस्तार कम विकसित देशों में हुआ है।


प्रश्न 13. रसायन आधारित उद्योगों के दो उदाहरण बताइए।

उत्तर : पेट्रो-रसायन उद्योग कृत्रिम रेशा उद्योग।

प्रश्न 14. गैर आधारभूत उद्योग क्या है?
. अथवा
उपभोक्ता वस्तु उद्योग क्या है ? उदाहरण सहित बताइए।

उत्तर : उपभोक्ता वस्तु उद्योग ऐसे सामान का उत्पादन करते हैं जो प्रत्यक्ष रूप से
उपभोक्ता द्वारा उपयोग कर लिया जाता है।
जैसे ब्रेड़ एंव बिस्कुट, चाय साबुन इत्यादि।

प्रश्न 15. धुएँ की चिमनी वाला उद्योग किसे कहते हैं ?

उत्तर : परंपरागत बड़े पैमाने वाले औद्योगिक प्रदेश जिसमें कोयला खादानों के
समीप स्थित धातु पिघलाने वाले उद्योग भारी इंजीनियरिग, रसायन निर्माण इत्यादि का कार्य किया जाता है। इन्हें धुएं की चिमनी वाला उद्योग भी कहते हैं।

प्रश्न 16. रूहर कोयला प्रदेश किस देश में स्थित है?

उत्तर : जर्मनी


प्रश्न 17 स्वच्छंद उद्योग से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर : ये वे उद्योग है जो किसी कच्चे माल पर निर्भर नहीं होते वरन संघटक पुरजों पर निर्भर रहते हैं ?


प्रश्न 18. कुटीर उद्योग के अंतर्गत किन्हीं दो कार्यों के नाम लिखो ?

उत्तर : 1) दैनिक उपयोग में आने वाले पदार्थ जैसे – अचार, बीडियाँ, पापाड़ आदि।
2) स्थानीय रूप से प्राप्त संसाधनों से बनने वाली चटाइयाँ, टोकरी आदि।


प्रश्न 19. कृषि व्यापार या कृषि कारखानों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : कृषि व्यापार एक प्रकार की व्यापारिक कृषि है जो औद्योगिक पैमाने पर की जाती है इसका वित्त पोषण वह व्यापार करता है जिसकी मुख्य रूचि कृषि के बाहर हो। यह फार्म से आकार में बड़े यन्त्रीकृत, रसायनों पर निर्भर व अच्छी संरचना वाले होते हैं। इनकों कृषि कारखाने भी कहा जाता है।


प्रश्न 20 लौह इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहा जाता है ?

उत्तर : लौह-इस्पात उद्योग के उत्पाद को अन्य वस्तुएं बनाने के लिए कच्चे माल
के रूप में प्रयोग में लाया जाता है इसलिए इसे आधारभूत उद्योग कहते हैं।

जैसे- लौह इस्पात उद्योग, वस्त्र उद्योग व अन्य उद्योगों के लिए मशीने बनाता है। अतः यह सभी उद्योगों का आधार है।

प्रश्न 21. प्रौद्योगिक ध्रुव किसे कहते हैं ?

उत्तर : वे उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग जो प्रादेशिक रूप में सकेन्द्रित हैं, आत्मनिर्भर
तथा उच्च विशिष्टता लिए होते हैं उन्हें प्रौद्योगिक ध्रुव कहा जाता है जैसे
सिलीकन घाटी (स.रा.अ.) बेंगलूरू (भारत में)

प्रश्न 22. ‘जंग का कटोरा’ नाम से किस क्षेत्र को जाना जाता है और क्यों ?

उत्तर : संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित पिट्सबर्ग को जंग का कटोरा नाम जाना जाता है क्योंकि पिट्सबर्ग लौह उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र था जिसका महत्व अब घट गया है।

प्रश्न 23. जर्मनी का रूहर कोयला क्षेत्र किस प्रकार के औद्योगिक प्रदेश के अन्तर्गत रखा जा सकता है ?

उत्तर : परम्परागत बड़े पैमाने वाले औद्योगिक प्रदेश।


प्रश्न 24. उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग में लगे कर्मियों का अधिकतर भाग किस श्रेणी में जाता है ?

उत्तर : व्यवसायिक श्रमिक (सफेद कॉलर युक्त)

प्रश्न 25. विनिर्माण का अर्थ स्पष्ट कीजिए

उत्तर : विनिर्माण से आशय किसी भी वस्तु के उत्पादन से है। हस्तशिल्प से लेकर
लोहे व इस्पात को गढ़न, अंतरिक्ष यान का निर्माण इत्यादि सभी प्रकार के उत्पादन को विनिर्माण के अन्तर्गत ही माना जाता है।


लघु उत्तरीय प्रश्न (तीन अंक वाले)

प्रश्न 26. छोटे पैमाने के उद्योग की कोई तीन विशेषताएँ बताइए।

उत्तर : 1 ) निर्माण स्थल :- इस प्रकार के उद्योग में निर्माण स्थल घर से बाहर कारखाना होता है।
2) कच्चा माल :- इसमें स्थानीय कच्चे माल का उपयोग होता है।
3) रोजगार के अवसर:- रोजगार के अवसर उद्योग मेंअधिक होते हैं जिससे स्थानीय निवासियों की क्रय शक्ति बढ़ती है।


प्रश्न 27. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गी करण कीजिए।

उत्तर : 1). सार्वजनिक क्षेत्र:-
i) ऐसे उद्योग सरकार के अधीन होते हैं।
ii) सरकार ही इनका प्रबंध करती है।
iii) भारत में बहुत से उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के बीच है जैसे लोह इस्पात उद्योग।
iv) अधिकतर समाजवादी, साम्यवादी देशों में ऐसा होता हैं।

2. निजी क्षेत्र :-
i) ऐसे उद्योगों का मालिक एक व्यक्ति या एक कम्पनी होती है।
ii) व्यक्ति या निजी कंपनियां इन उद्योगों का प्रबंधन करती है।
iii) पूंजीवाद देशों में यह व्यवस्था होती है।
iv) भारत में टाटा समूह, विरला, रिलायंस इंडस्ट्री इसके उदाहरण है

3 संयुक्त क्षेत्र :-
I) कुछ उद्योगों का संचालन सरकार और निजी कपनियाँ मिलकर करती है।
ii). हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कोपौटेशन लिमिटेड (HPCL) तथा मित्तल एनर्जी लिमिटेड साझेदारी (HPCL Mital energy imited HMFL) इसका उदाहरण है।

प्रश्न 28 परम्परागत बड़े पैमाने वाले औद्योगिक प्रदेश क्या हैं ? उनकी कोई दो विशेषताएँ दीजिए ?

उत्तर : यह भारी उद्योग के क्षेत्र होते हैं जिसमें कोयला खदानों के समीप धात
पिघलने वाले उद्योग, भारी इंजीनियरिंग, रसायन निर्माण, वस्त्र उत्पादन आदि का कार्य किया जाता है। इन्हें धुएँ की चिमनी वाला उद्योग भी कहते हैं। इसकी प्रमुख विशेषताएँ है।
• औद्योगिक इकाई के आसपास का वातावरण अनाकर्षक होता है, जिसमें गन्दगी के ढेर व प्रदूषण होता है।
• बेरोजगारी की समस्या, उत्प्रवास तथा विश्वव्यापी माँग कम होने से कारखाने बन्द होने के कारण परित्यक्त भूमि क्षेत्र।

प्रश्न 29. कुटीर उद्योग से क्या तात्पर्य है ? किस प्रकार के उद्योगों को कुटीर उद्योग कहा जा सकता है ?

उत्तर : कुटीर उद्योग उन उद्योगों को कहते हैं जिनमें लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर स्थानीय कच्चे माल की सहायता से घर पर ही दैनिक उपयोग की वस्तुओं का निर्माण करते है।
1) पूंजी एंव परिवहन के साधन इन उद्योगों को प्रभावित नही करते क्योंकि कच्चा माल एंव बाजार दोनों ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होते है।
2) किसी शक्तिचालित मशीन की आवश्यकता नहीं होती। हाथ के साधारण औजार ही उपयोग में आते हैं।


प्रश्न 30. उत्पाद आधारित उद्योग किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।

उत्तर :- कुछ उद्योगों के उत्पाद अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होते हैं। जैसे लकड़ी की लुग्दी बनाने का उद्योग – कागज के उद्योग के लिए कच्चा माल प्रदान करेगा। अत: कागज उद्योग उत्पाद आधारित उद्योग होगा।


प्रश्न 31. द्वितीयक क्रियाओं का महत्व क्या है ?

उत्तर : 1) यह क्रियाएँ प्रकृति में पाए जाने वाले कच्चे माल का रूप बदलकर उसे अधिक मूल्यवान बना देती है।
2) खदानों से प्राप्त लौह:-अयस्क से इस्पात बनाने के बाद वह मूल्यवान और उपयोगी हो जाता है और इसका उपयोग कई प्रकार की मशीनें व औजार बनाने में किया जाता है।
3) कुछ वस्तुओं का उपयोग विनिर्माण प्रक्रिया से गुजरने के पश्चात् ही होता है जैसे जूट का उपयोग रेशा बनाने के बाद होता है या बॉस का उपयोग टोकरी बनने के बाद बढ़ जाता है। इस प्रकार द्वितीयक क्रियाएँ विनिर्माण, प्रंसकरण व निर्माण उद्योग से संबंधित हैं।

प्रश्न 32. संसार के कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद औद्योगिक विकास नहीं हुआ है उदाहरण सहित स्पष्ट करें।

उत्तर : संसार के कुछ क्षेत्र जैसे अफ्रीका में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है। यहाँ
प्राकृतिक संसाधन है किन्तु औद्योगिक
प्रगति आशा के अनुरूप नहीं हो पाती है और अन्य देशों अपेक्षा में पिछड़े रह गये हैं।
इसका कारण इन क्षेत्रों में (जैसे नाइजीरिया, जिम्बावे आदि आधारभूत अवसंरचनाओं में
कमी राजनैतिक अस्थिरता आवशयक तकनीकी का अभाव एंव आर्थिक कमजोरी है।


प्रश्न 33. बड़े पैमाने के आधुनिक विनिर्माण उद्योग के संगठनात्मक ढांचे और स्तरीकरण की किन्ही तीन विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए ?

उत्तर : विशेषतायें :-
1) आधुनिक विनिर्माणउद्योग एक जटिल संगठन है इसके निर्माण में कई जटिल प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है।
2) उद्योगों के संचालन में श्रम विशिष्टीकरण की आवश्यकता होती है, उद्योगों में श्रम की कुशलता से निरन्तर वृद्धि होती है।
3) आधुनिक उद्योगों में मशीनों का प्रयोग निरन्तर बढ़ता जा रहा है।


प्रश्न 34. संसार में हथकरघा उद्योगों की किन्ही तीन विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए?

उत्तर : हथकरघा उद्योग की विशेषताएँ :-
1) हथकथा उद्योग में अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
2) यह अर्धकुशल श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है।
3) इसमें पूंजी की आवश्यकता कम होती है।
4) इसके अन्तर्गत सूत की कताई, बुनाई आदि का कार्य किया जाता है।


प्रश्न 35. स्वच्छंद उद्योगों की किन्हीं तीन विशेषताओं की व्याख्या किजिए ?

उत्तर : स्वच्छंद उद्योग की विशेषताएँ :-
1) स्वच्छंद उद्योग व्यापक विविधता वाले स्थानों में स्थित होते हैं।
2) ये किसी विशिष्ट प्रकार के कच्चे माल पर निर्भर नहीं होते हैं।
3) ये उद्योग संघटन पुरजो पर निर्भर होते हैं।
4) इनमें कम मात्रा में उत्पादन होता है।
5) इन उद्योगों में श्रमिकों की भी कम आवश्यकता होती है।
6) सामान्यतः ये उद्योग प्रदूषण नहीं फैलाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (पाँच अंको वाले)

प्रश्न 36. उद्योगों की स्थापना को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं।
अथवा
उद्योगों का स्थानीकरण किन तत्वों पर निर्भर करता है ?
अथवा
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारको की चर्चा कीजिए।

उत्तर : 1)कच्चे माल की उपलब्धता :- उद्योग के लिए कच्चा माल अपेक्षाकृत सस्ता एंव सरलता से परिवहन योग्य होना चाहिए। भारी वजन सस्ते मूल्य एंव वजन घटाने वाले पदार्थों व शीघ्र नष्ट होने वाले पदार्थों पर आधारित उद्योग कच्चे माल के स्त्रोत के समीप ही स्थित हो। जैसे लौह-इस्पात उद्योग, चीनी उद्योग।

2) अनुकूल जलवायु :- कुछ उद्योग विशेष प्रकार की जलवायु वाले क्षेत्रों में ही स्थापित किये जाते हैं। उदाहरण के लिए की दक्षिण
भारत में सूती वस्त्र उद्योग विकसित होने में नमी वाले पर्यावरण का लाभ मिला है। नमी के कारण कपास से वस्त्र की कताई आसान हो जाती है। अत्याधिक ठंडे व अत्याधिक गर्म प्रदेशों में उद्योगों की स्थापना कठिन
कार्य है।

3) शक्ति के साधन :- वे उद्योग जिनमें अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है वे ऊर्जा के स्रोतों के समीप लगाए जाते हैं जैसे एल्यूमिनियम उद्योग।

4) श्रम की उपलब्धता :- बढ़ते हुए यंत्रीकरण, स्वचालित मशीनों इत्यादि में उद्योगों में श्रमिकों पर निर्भरता कम किया है फिर भी कुछ प्रकार के उद्योगों में अब भी कुशल श्रमिकों की आवश्यकता है अधिकांश उद्योग सस्ते व कुशल श्रमिकों की उपलब्धता वाले स्थानों पर अवस्थित होते हैं। स्विटजरलैंड का घडी उद्योग व जापान का इलैक्ट्रोनिक उद्योग कुशल और दक्ष श्रमिकों के बल पर ही टिके हैं।

5). पूँजी :- किसी भी उद्योग के सफल विकास के लिए पर्याप्त पूंजी का उपलब्ध होना अनिवार्य है। कारखाने के लिए जमीन, मशीने, कच्चा माल, श्रमिकों को वेतन देने के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए यूरोप में पर्याप्त मात्रा में पूंजी उपलब्ध होती है उद्योग भी काफी विकसित है।

प्रश्न 37. आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की प्रमुख विशेषताएँ बताइए ?

उत्तर:- आधुनिक समय में बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की निम्नलिखित
विशेषताएँ हैं:
1) कौशल का विशिष्टीकरण:- आधुनिक उद्योगों में उत्पादन बढ़े पैमाने पर होने के कारण कौशल का विशिष्टीकरण हो जाता है
जिसमें प्रत्येक कारीगर निरंतर एक ही प्रकार का कार्य करता है। कारीगर निर्दिष्ट कार्य के लिये प्रशिक्षित होते है।

2) यन्त्रीकरण :- यन्त्रीकरण से तात्पर्य है कि किसी कार्य को पूरा करने के लिए मशीनों का प्रयोग करना। आधुनिक उद्योग स्वचालित
यन्त्रीकरण की विकसित अवस्था है।

3) प्रौद्योगिकीय नवाचार :- आधुनिक उद्योगों में नया तकनीकी ज्ञान शोध व विकासमान युक्तियों को सम्मिलित किया गया है जिसमें
विनिर्माण की गुणवत्ता को नियन्त्रित करना अपशिष्टों का निस्तारण व अदक्षता को समाप्त करना व प्रदूषण के विरूद्ध संघर्ष करना मुख्य है ।

4) संगठनात्मक ढांचा व स्तरीकण :- इसके अतिरिक्त बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण में संगठनात्मक ढाँचा बडा, पूंजी का निवेश
अधिक कर्मचारियों में प्रशासकीय अधिकारी वर्गों का बाहुल्य होता है।

प्रश्न 38. आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृत्तियाँ क्या हैं ?

उत्तर : आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :
1) आधुनिक निर्माण प्रक्रिया बहुत सारे यंत्रों पर निर्भर है। अत्याधुनिक एंव विकसित यंत्रों का प्रयोग होता है।
2) कार्यों को विभाजित /वर्गीकत करके विशिष्ट कुशलता प्राप्त व्यक्तियों को कार्य में लगाया जाता है।
3) प्रबध स्तर पर प्रशासन एंव अधिकारी वर्ग की नियुक्ति की जाती है।
4) पूंजी निवेश अधिक होता है। उत्पादन में लागत कम करने का प्रयास किया जाता है।

प्रश्न 39. छोटे पैमाने के उद्योगों को स्थापित करने के लाभ बताइये ?
या
रोजगार उत्पन्न करने की दष्टि से छोटे पैमाने के उद्योग अधिक लाभप्रद है। छोटे पैमाने के उद्योगों की विशेषतायें बताते हुये इस कथन की सार्थकता स्पष्ट करें।

उत्तर : विशेषतायें:-
1) इस श्रेणी के उद्योगों का निर्माण स्थल घर से बाहर होता है।
2) कच्चा माल स्थानीय होता है किन्तु श्रमिक अर्द्धकुशल होते हैं।
3) शक्ति के साधनों से चलने वाले छोटे यन्त्रों का प्रयोग किया जाता है। एक बड़े पैमाने के उद्योग की अपेक्ष छोटे पैमाने के कई उद्योग यदि कार्यशील हो तो उसमें रोजगार ज्यादा होते है।
4) स्थानीय लोग रोजगार पाते है उनकी आय बढ़ती है एंव उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ती है।
5) कच्चे माल की स्थानीय माँग में वृद्धि कच्चे माल के उत्पादकों को उत्साहित करती है। रोजगार होने पर क्रयशक्ति में वृद्धि उत्पादन को बढ़ाती है। इसलिए भारत, चीन, इण्डोनेशिया आदि देशों ने इस
प्रकार के उद्योगों को प्रोत्साहित किया है।

प्रश्न 40. बड़े छोटे पैमाने के उद्योगों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : *बड़े पैमाने के उद्योग:-
1. इन उद्योगों में ऊर्जा चालित मशीनों से
उत्पादन होता है।
2. इनमें अधिक मात्रा में पूंजी निवेश किया
जाते हैं।
3 ये उद्योग विकसित देशों के विकास का आधार होते है।
4. इनमें विभिन्न प्रकार के कच्चे माल का आयात भी किया जाता है।
5. लौह इस्पात उद्योग

* छोटे पैमाने के उद्योग:-
1) इन उद्योगों में छोटी मशीनें लगाए
जाती है।
2) इनमें कम पूंजी निवेश के उद्योग लगाए जाते हैं।

3) ये उद्योग विकासशील देशों में रोजगार
उपलब्ध करवाते हैं।
4) इनमें स्थानीय कच्चे माल का उपयोग
होता है।
5) हथकरघा व साइकिल उद्योग।

प्रश्न 41. उच्च प्रौद्योगिक उद्योग की विशेषताएँ बताते हुये स्पष्ट करें कि ये नगरों के परिधि क्षेत्रों में क्यों विकसित होते हैं ?

उत्तर : 1) उच्च प्राद्योगिक उद्योग में वैज्ञानिक एंव इंजिनियरिंग उत्पादकों का
निर्माण कार्य किया जाता है। इसमें शोध की जरूरत होती है।
2) इसमें श्रमिकों का अधिकांश भाग दक्षता प्राप्त होते हैं।
3) अधिकांश कार्य कम्प्यूटर एंव यंत्रों द्वारा सम्पन्न किये जाते हैं।
4) इन उद्योगों के स्थान खाफ-सुथरे विशाल भवनों, कार्यालयों एंव प्रयोगशालाओं युक्त होते हैं।
5) इन्हें प्रौद्योगिक ध्रुव भी कहा जाता है।
6) ये नगर के परिधि क्षेत्र में इसलिये होते है क्योंकि:-
• नगर के बाहर क्षेत्र में सस्ती और अधिक भूमि उपलब्ध होती है।
• नगर के बाहरी क्षेत्र से आन्तरिक क्षेत्रों की तरफ यातायात की अच्छी सुविधा उपलब्ध होती है।


प्रश्न 42 प्रौद्योगिकी नवाचार ने पर्यावरण को नियन्त्रित करने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ? स्पष्ट करो ।

उत्तर : (संकेत) :-
1) परिसर में वृक्षारोपण
2) अत्याधुनिक यन्त्रों से गन्दगी का फैलाव कम।
3) प्रदूषण करने वाले तत्वों के पुनर्चक्रण एंव पुनः उपयोग को बढावा एंव शोधन

मूल्य आधारित प्रश्न (बहु विषयक प्रश्न)

प्रश्न 43. “कुटीर उद्योग शिल्पकार स्थानीय कच्चे माल उपयोग करते हैं एंव साधारण औजारों द्वारा परिवार के सभी सदस्य मिलकर अपने दैनिक जीवन के उपभोग को वस्तुओं का उत्पादन करते हैं । इस कथन के संदर्भ में पोषित मानवीय मूल्य क्या हैं । तीन
बिन्दुओं में बताइए

उत्तर : 1) परस्पर निर्भरता व सहयोग :- परिवार के सदस्यों द्वारा मिलकर कार्य करने से परस्पर निर्भरता और सहयोग के मूल्यों का विकास होता है।
2. क्षमता व कौशल का विकास :- परिवार के सदस्य स्थानीय कच्चे माल को अपनी क्षमता व कौशल से अन्य उपयोगी उत्पाद में बदला देते हैं।
3. आत्मनिर्भरता : – परिवार अपने भरण पोषण में आत्मनिर्भर हो जाता।

प्रश्न 44. विनिर्माण क्रियाओं द्वारा जहाँ एक तरफ मानव का विकास हो रहा है वही दूसरी तरफ संसाधनों का लगातार दोहन व पर्यावरण का हास भी हो रहा है। इस कथन को ध्यान में रखते हुए सामाजिक मूल्यों का संश्लेषण कीजिए

(मानव मूल्यों पर आधारित प्रश्न)

उत्तर 1) प्रकृति के प्रति संवेदनशील सोच द्वारा मानव का प्राकृतिक संसाधनों का दोहन।
2) संसाधनों के पुर्नचक्रण करके मानव प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम कर सकता है।
3) विनिर्माण क्रियाओं के द्वारा होने वाले वायु व जल प्रदूषण को मानव जागरूकता द्वारा कम कर सकता है जैसे ऊंची चिमनियों का निर्माण करके |

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