12) भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे व समस्यायें
प्र० 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
(i) निम्नलिखित में से सर्वाधिक प्रदूषित नदी कौन-सी है?
(क) ब्रह्मपुत्र
(ख) सतलुज
(ग) यमुना
(घ) गोदावरी
(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा रोग जलजन्य है?
(क) नेत्रश्लेष्मला शोथ
(ख) अतिसार
(ग) श्वसन संक्रमण
(घ) श्वासनली शोथ
(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल वर्षा का एक कारण है?
(क) जल प्रदूषण
(ख) भूमि प्रदूषण
(ग) शोर प्रदूषण
(घ) वायु प्रदूषण
(iv) प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक उत्तरदायी हैं
(क) प्रवास के लिए
(ख) भू-निम्नीकरण के लिए
(ग) गंदी बस्तियाँ
(घ) वायु प्रदूषण
उत्तर:
(i) (ग) यमुना
(ii) (ख) अतिसार
(iii) (घ) वायु प्रदूषण ।
(iv) (क) प्रवास के लिए
प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।
(i) प्रदूषण और प्रदूषकों में क्या भेद है?
उत्तर: प्रदूषण-मानवीय क्रियाकलापों से उत्पन्न अपशिष्टों उत्पादों से प्राकृतिक घटकों, जैसे-जल, वायु व भूमि के मूलभूत गुणों का ह्रास प्रदूषण कहलाता हैं।
प्रदूषक – उन पदार्थों, उत्पादों को प्रदूषक कहते हैं जो प्राकृतिक घटकों, जैसे-जल, वायु व भूमि में घुल-मिलकर उनकी गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
(ii) वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं-जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस का दहन, औद्योगिक प्रक्रमण से उत्पन्न विषाक्त धुंए वाली गैसों का उत्सर्जन, खनन कार्य आदि। ये सभी वायु में सल्फर, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, सीसा व एस्बेस्टास को वायुमंडल में निर्मुक्त करते हैं।
(iii) भारत में नगरीय अपशिष्ट से जुड़ी प्रमुख समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: भारत के नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या का अति संकुलन होने से प्रयुक्त उत्पादों के ठोस अपशिष्टों (कचरे) से गंदगी के ढेर जहाँ-तहाँ देखने को मिलते हैं। इनके निपटान की एक गंभीर समस्या है जिससे नगरीय वातावरण प्रदूषित होता है। प्लास्टिक, पोलिथिन, कंप्यूटर व अन्य इलैक्ट्रोनिक सामान के कबाड़ ने, कांच व कागज तथा मकानों की टूट-फूट/निर्माण से उत्पन्न मलबे ने इस अपशिष्ट के निपटान की समस्या को और गंभीर बना दिया है।
(iv) मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के क्या प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर: जीवाश्म ईंधन के दहन से औद्योगिक अपशिष्टों में व खनन प्रक्रियाओं से वायुमंडल में अनेक विषाक्त धुएँ वाली गैसों व लंबित धूल कणों, सीसा आदि का उत्सर्जन होता है जो वायु को प्रदूषित करते हैं। इनका मानव के स्वास्थ पर प्रत्यक्ष प्रभाव देखा जाता है; जैसे-श्वसन तंत्रीय, तंत्रिका तंत्र, रक्तसंचार तंत्र संबंधी अनेक बीमारियाँ हो जाती है।
प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।
(i) भारत में जल प्रदूषण की प्रकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर: बढ़ती हुई जनसंख्या और औद्योगिक विस्तार के कारण जल के अविवेकपूर्ण उपयोग से जल की गुणवत्ता का व्यापक रूप से निम्नीकरण हुआ है। भारत की नदियों, नहरों, झीलों व तालाबों आदि का जल अनेक कारणों से उपयोग हेतु शुद्ध नहीं रह गया है। इसमें अल्पमात्रा में निलंबित कण, कार्बनिक व अकार्बनिक पदार्थ समाहित होते हैं। जल में जब इन पदार्थों की मात्रा तय सीमा से अधिक हो जाती है तो जल प्रदूषित हो जाता है और जल में स्वतः शुद्धीकरण की क्षमता इसे शुद्ध नहीं कर पाती। ऐसा जल मानव व जीवों के उपयोग के योग्य नहीं रह जाता।
प्रदूषण के स्रोत – उत्पादन प्रक्रिया में लगे उद्योग अनेक अवांछित उत्पाद पैदा करते हैं। इनमें औद्योगिक कचरा, प्रदूषित अपशिष्ट जल, जहरीली गैसे, रासायनिक अवशेष, अनेक भारी धातुएँ, धूल कण व धुआँ शामिल होता है। अधिकतर औद्योगिक कचरे को बहते हुए जल में व झीलों आदि में विसर्जित कर दिया जाता है। इस तरह विषाक्त रासायनिक तत्व जलाशयों, नदियों व अन्य जल भंडारों तक पहुँच जाते हैं जो इन जलस्रोतों में पनपने वाली जैव प्रणाली को नष्ट कर देते हैं।
सर्वाधिक जलप्रदूषक उद्योगों में, चमड़ा, लुगदी व कागज, वस्त्र तथा रसायन उद्योग हैं। आधुनिक कृषि में विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थों का उपयोग होता है जिनमें अकार्बनिक उर्वरक, कीटनाशक, खरपतवार नाशक आदि भी प्रदूषण उत्पन्न करने वाले घटक हैं। ये रसायन वर्षा जल के साथ अथवी सिंचाई जल के साथ बहकर नदियों, झीलों व तालाबों में चले जाते हैं तथा धीरे-धीरे जमीन में स्रवित होकर भू-जल तक पहुँच जाते हैं। भारत में तीर्थयात्राओं, धार्मिक क्रियाकलापों, पर्यटन व सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जल प्रदूषित होता है। भारत में धरातलीय जल के लगभग सभी स्रोत संदूषित हो चुके हैं जो मानव उपयोग के योग्य नहीं रह गए हैं।
(ii) भारत में गंदी बस्तियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारतीय नगरों में एक ओर सुविकसित नगरीय संरचना है तो दूसरे सिरे पर झुग्गी-बस्तियाँ, गंदी बस्तियाँ, झोंपड़पट्टी तथा पटरियों के किनारे बने ढाँचे खड़े हैं। इनमें वे लोग रहते हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में आजीविका के लिए प्रवासित होने के लिए मजबूर हुए हैं और जमीन की ऊँची कीमत के कारण अथवा ऊँचे किराए के कारण अच्छे आवासों में चाहते हुए भी नहीं रह पाते हैं तथा पर्यावरणीय दृष्टि से निम्नीकृत भूमि पर कब्जा कर रहने लगते हैं। गंदी बस्तियाँ न्यूनतम वांछित आवासीय क्षेत्र होते हैं जहाँ जीर्ण-शीर्ण मकान, स्वास्थ्य की निम्न सुविधाएँ, खुली हवा का अभाव, पेयजल, प्रकाश तथा शौच जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव पाया जाता है। ये क्षेत्र अधिक भीड़भाड़ वाले, पतली-सँकरी गलियों तथा आग लगने की उच्च संभावना वाले जोखिमों से परिपूर्ण होते हैं।
गंदी बस्तियों की अधिकांश जनसंख्या नगरीय अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्र में कम वेतन पर अधिक जोखिमपूर्ण कार्य करती है। अतः ये लोग अल्पपोषित होते हैं। इन्हें विभिन्न रोगों और बीमारियों की संभावना बनी रहती है।
ये लोग अपने बच्चों के लिए उचित शिक्षा का खर्च भी वहन नहीं कर सकते हैं। गरीबी उन्हें नशीली दवाओं/पदार्थों को सेवन करने, अपराध, गुंडागर्दी, पलायन, उदासीनता तथा अंततः सामाजिक बहिष्कार की ओर उन्मुख करती है।
(iii) भू-निम्नीकरण को कम करने के उपाय सुझाइए।
उत्तर: भू-निम्नीकरण का अभिप्राय स्थायी अथवा अस्थायी तौर पर भूमि की उत्पादकता में कमी है। भू-उर्वरता में कमी
अनेक कारणों से संभव है, जैसे-
(i) प्राकृतिक कारण। इसमें अनुउत्पादक भूमियाँ आती हैं, जैसे-प्राकृतिक खंड, मरुस्थलीय व रेतीली तटीय भूमि, बंजर चट्टानी भूमि, तीव्र ढाल वाली भूमि तथा हिमानी क्षेत्र आदि।
(ii) मानवजनित कारण – भूमि का कुप्रबंधन, भूमि का अविरल उपयोग, मृदा अपरदन को प्रोत्साहन देने वाली क्रियाएँ, जलाक्रांतता, लवणता व क्षारीयता में वृद्धि आदि।
भारत में कृषिरहित बंजर निम्नीकृत भूमि इसके कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 17.98% है जिसमें पहाड़ी क्षेत्र, पठारी क्षेत्र, खड्ड आदि के अलावा रेतीली तटीय व मरुस्थली भूमि प्राकृतिक रूप से कृषि कार्यों के योग्य नहीं है। कुछ भूमि जो मानवीय क्रियाओं के फलस्वरूप कृषियोग्य नहीं रह गयी है उसको नई प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से फिर से कृषियोग्य बनाया जा सकता है। रेतीली मरुस्थली व तटीय भूमि को उर्वरकों, कम्पोस्ट व सिंचाई की सुविधा प्रदान करके उपयोगी बनाया जा सकता है। जलाक्रांत भूमि व दलदली भूमि को कुशल प्रबंधन से उपजाऊ बनाया जा सकता है।
एक अंक वाले प्रश्न
प्रश्न 1. जल की गुणवत्ता में हृास के लिये जिम्मेदार दो प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर : (1) बढ़ती हुई जन संख्या
(2) औद्योगिक निस्तारण
(3) जल का अविवेक पूर्ण उपयोग
प्रश्न 2. नदियों के प्रदूषण के लिए जिम्मेदार प्रमुख उद्योग कौन-कौन से हैं।
उत्तर : चमड़ा उद्योग, कागज एवं लुग्दी उद्योग वस्त्र उद्योग, रसायन उद्योग।
प्रश्न 3. जल प्रदूषण से होने वाली प्रमुख बीमारियों के नाम लिखो।
उत्तर : डायरिया, हेपेटाइटिस, आंतों के कृमि।
प्रश्न 4. ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर : विविध उद्योग, मशीनीकृत निर्माण, तोड़ फोड़ कार्य मोटर वाहन तथा वायुयान ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख कारण है।
प्रश्न 5, झबुआ जिले में भील जाति के लोगों की गरीबी का सबसे बड़ा कारण क्या है?
उत्तर : भूमि निम्नीकरण।
प्रश्न 6. भारत में गांवों से आए प्रवासियों की दो सामाजिक समस्याएँ बताइए ।
उत्तर : 1) सामाजिक अकेलापन
2) शोषण
3) नशे की लत
प्रश्न 7. प्रदूषण के वर्गीकरण की कसौटी क्या है?
उत्तर : प्रदूषकों के परिवहित एवं विसरित होने के माध्यम के आधार पर प्रदूषण को वर्गीकृत किया जाता है।
प्रश्न 8. वायु प्रदूषण के लिये मुख्य रूप से कौन से कारक जिम्मेदार है?
उत्तर : जीवाश्म ईधनों के जलने से निकला धुआ।
प्रश्न 9. वायु को प्रदूषित करने वाले प्रमुख प्रदूषक तत्व कौन से हैं?
उत्तर : सल्फर कार्बनडाईआक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, शीशा एस्बेस्टस, धूलकण आदि।
प्रश्न 10, वायु प्रदूषण जनित प्रमुख बीमारियां कौन सी है?
उत्तर : 1) श्वास सम्बन्धी बीमारी जैसे दमा, अस्थमा
2) तंत्रिका तन्त्र सम्बन्धी बीमारी
प्रश्न 11. अम्लीय वर्षा से क्या तात्पर्य है? इसका मुख्य कारण क्या है?
उत्तर : वायु प्रदूषण के कारण वातावरण में मौजूद अवांछित तत्व वर्षा के जल में मिलकर नीचे आते हैं। इससे अम्लीय पदार्थ अधिक होते हैं, इसे अम्लीय वर्षा कहते हैं।
प्रश्न 12, धूम्र कोहरा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: वातावरण में मौजूद धुआँ एवं धूल के कण जब सामान्य रूप में बनने वाले कोहरे में मिल जाते हैं तो इसे धूम्र कोहरा कहते हैं यह स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसान देह होता है।
(तीन अंक वाले)
प्रश्न 13, नगरों में अवशिष्ट निपटान सम्बन्धी समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। इस समस्या से सम्बन्धित प्रमुख तीन तथ्यों का वर्णन कीजिए?
उत्तर: नगरों में अवशिष्ट निपटान संबंधी प्रमुख समस्याएँ निम्न प्रकार से हैं:-
1) अपशिष्ट के पृथककरण की समस्या:- नगरों में अभी भी सभी। प्रकार के ठोस अपशिष्ट एक साथ इकट्ठे किये जाते हैं जैसे कि धातु-शीशा सब्जियों के छिलके कागज आदि। जिससे इनको उचित तरीके से निपटाने में बाधा आती है।
2) भराव स्थल की समस्याः- महानगरों में कूड़ा डालने के लिये स्थान की कमी महसूस की जाने लगी है। पर्याप्त स्थान उपलब्ध
नहीं है। सड़कों पर कूड़ा डाला जाता है ।
3) पुनर्चक्रण की समस्याः- पृथक्करण न होने एवं पर्याप्त जागरूकता के अभाव में अपशिष्ट का पुनर्चक्रण नहीं हो पाता।
4) कूड़े से उत्पन्न लीच, बदबू एवं बीमारी की समस्या विकराल होती जा रही है।
प्रश्न 14. विकासशील देशो में शहरों की प्रमुख समस्याएँ क्या है? स्पष्ट कीजिये?
उत्तर : 1) अवशिष्ट निपटान की समस्या
2) जनसंख्या विस्फोट की समस्या
3) स्लम बस्तियों की समस्या (तीनों बिन्दुओं का विस्तार करें)।
प्रश्न 15. कौन-सी धार्मिक व सांस्कृतिक गतिविधियाँ प्रदूषण के लिये उत्तरदायी है?
उत्तर : 1) तीर्थ यात्राएं व धार्मिक कर्मकाण्ड
2) धार्मिक मेलें
3) पर्यटन
4) पर्वतारोहन एवं खोज अभियान
5) मृत शरीर को जलाना / जल में बहाना
6) घर के धार्मिक अपशिष्टों को फेंकना / बहाना
प्रश्न 16, भू-निम्नीकरण से क्या तात्पर्य है इसके लिए उत्तरदायी कारण क्या है?
उत्तर : भू-निम्नीकरण से तात्पर्य भूमि की उत्पादकता में अल्प समय के लिये या स्थायी रूप से कमी आ जाना है।
कारण:-
1) वृक्षोन्मूलन के कारण मृदा अपरदन होता है मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत हट जाती है।
2) भूमि पर लगातार कृषि उपज लेते रहने से भी भूमि की उत्पादकता में कमी आ जाता है। इससे निपटने के लिये प्राकृतिक उर्वरक डालते रहना चाहिये।
3) लगातार जल भराव एवं नहरी सिंचाई भी भू-निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी है।
प्रश्न 17. भू-निम्नीकरण की प्रक्रिया के आधार पर निम्नीकृत भूमि को कितने वर्षों में रखा जा सकता है? प्रत्येक के बारे में बताइये ।
उत्तर : भूनिम्नीकरण प्रक्रिया को दो वगों में रखा जा सकता है:-
1) मानवीय क्रियाओं द्वारा भूमिनीकरण:- इसके अन्तर्गत कृषि के अन्तर्गत जमीन का अधिक दोहन, वनों को काटना, अत्यधिक चराई एवं अविवेकपूर्ण खनन कार्य व निर्माण कार्य शामिल है।
2) प्राकृतिक कारण द्वारा निम्नीकृत भूमि:- अवनालिका अपरदन जल भराव, खड़ी ढ़ाल पर अपरदन भूस्खलन आदि।
प्रश्न 18, आधुनिक समय में पर्यावरण प्रदूषण की बढ़ती समस्या वर्तमान ही नहीं भविष्य की पीढ़ी के लिए भी एक समस्या बन रही है। स्पष्ट करे।
उत्तर : आधुनिक समय में पर्यावरण प्रदूषण मानव के लिए एक गम्भीर समस्या बन
गई है। इससे पृथ्वी पर मानव जीवन खतरे में है। प्राकृतिक वातावरण पर हो रहे इस प्रदूषण का प्रभाव धीरे-धीरे इतना बढ़ता जा रहा है कि सभी मण्डल (जल, स्थल, वायु व जैव) इससे प्रभावित हो रहे हैं। जब से गाँवों, कस्बों व नगरो तथा औद्योगिकरण का विकास हुआ है तब से परिस्थिति धीरे-धीरे और भी अधिक बिगड़ने लगी है। हर प्रकार की अशुद्धियाँ वातावरण में बढ़ती जा रही है जो न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी गम्भीर समस्या बन रही है।
प्रश्न 19. वायु प्रदूषण क्या है? इसके प्रमुख स्रोत क्या है? मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का क्या प्रभाव पड़ता है?
अथवा
वायु ‘प्रदुषण शब्द की परिभाषा लिखिए। वायु प्रदुषण के किन्ही दो हानिकारण प्रभावों की व्याख्य कीजिए
उत्तर : धूल, धुंआ, जहरीली गैसे, दुर्गध व वाष्प की वायु में वृद्धि जो जीव जन्तुओं व सम्पत्ति के लिए हानिकारक होती , वायु प्रदूषण कहलाता है।
वायु प्रदूषण के स्रोत :- जीवाश्म ईंधन का दहन, खनन, औद्योगिक ठोस कचरा निपटान इसके प्रमुख स्त्रोत हैं ये स्त्रोत वायु में सल्फर नाइट्रोजन आक्साइड, हाइड्रोजन कार्बन व कबन-डाइ-ऑक्साइड व कार्बन मोनोऑक्साइड, सीसा व एस्बेस्टस छोड़ते हैं। जिससे वायु प्रदूषण होता है।
स्वास्थय पर प्रभाव :-
इसके कारण श्वसन तन्त्रीय, तंत्रिका तंत्रीय तथा रक्त संचार सम्बन्धी विभिन्न बिमारियाँ होती है।
नगरों के ऊपर घमू कोहरा छाया रहता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसके कारण अम्लीय वर्षा भी हो सकती है। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
प्रश्न 20. पेटलावाड विकास खण्ड के भील समुदाय ने अपना स्वयं का प्रयास करके विस्तृत भागों की सांझी संपदा को पुनर्जीवित किया है । तीन उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : 1) प्रत्येक परिवार ने सांझा संपदा में एक पेड़ लगाकर उसकी देखभाल की है।
2) प्रत्येक परिवार ने चारागाह भूमि पर चारा घास को बोया तथा दो वर्ष तक उसकी सामाजिक घेराबंदी की।
3) पशुओं की खुली चराई पर रोक लगाकर पशुओं के आहार हेतु नौंदों की स्थापना की।
प्रश्न 21. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से जनसंख्या का प्रवाह शहरों की ओर बढ़ता जा रहा है। इसके लिए उदारदायी कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : 1) भारत में नगरीय क्षेत्रों में मजदूरों की मांग अधिक रहती है,। इसलिए नियमित व अच्छी मजदूरी की आस लिए गाँवों से शहरो की ओर पलायन करते हैं।
2) भारत में ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरों में शिक्षा स्वास्थ्य व रोजगार के अच्छे अवसर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
3) गांवों में गरीब व भूमिहीन लोगों के साथ सामाजिक भेदभाव व जातीय संघर्ष भी इन लोगों को शहरों की ओर पलायन के लिए मजबूर करता है।
प्रश्न 22. भारत में नगरीय केन्द्र सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक-सांस्कृतिक एव विकास के अन्य संकेतकों के किसी अन्य क्षेत्र की अपेक्षा कहीं अधिक विविधतापूर्ण है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : 1) भारत के नगरीय केंद्रों में सबसे ऊपर फार्म हाउस तथा उच्च आय वर्ग की बस्तियाँ है। जिनमें चौड़ी सड़के, स्ट्रीट लाइट, जल व स्वच्छता की सुविधाएँ. पार्क उपवन तथा सुरक्षा के सभी उपाय मौजूद है।
2) दूसरी ओर भारत के नगरों में झुग्गी बस्तियाँ, गंदी बस्तियाँ व पटरी के किनारों व नालों की कगारों पर बनी बस्तियाँ हैं जिनमें किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है। ये नरक समान है लेकिन लोगों से भरी पड़ी है।
3) भारत के नगरों में कुछ गाँव भी अर्ध शहरी रूप में पाये जाते हैं जो ना तो पूर्णतः गाँव ही है और ना शहरीरूप ही प्राप्त कर सके है। इनमें उच्च आय वाले जमींदार व पुराने संपत्ति के स्वामी रहते है तक दूसरी ओर गरीब किराएदार भी एक कमरे में अपने परिवार को लेकर रहते हैं।
प्रश्न 23. यद्यपि जल प्रदूषण प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त प्रदूषकों से भी प्रदूषित होता है । परन्तु मानव स्रोतों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषक चिंता का वास्ताविक कारण हैं। क्यों।
उत्तर : 1) मानव जल को औद्योगिक, कृषि एवं सांस्कृतिक गतिविधयों से प्रदूषित करता है।
2) औद्योगिक कचरा जहरीली गैस, रासायनिक अवशेष व भारी धातुएँ बिना उपचार के जल स्रोतों में विसर्जित कर दी जाती है।
3) आधुनिक कृषि की पद्धतियॉ, रासायनिक पदार्थ कीटनाशक आदि भी जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं।
4) भारत में तीर्थ यात्राओं धार्मिक मेले, पर्यटन व अन्य सांस्कृतिक गतिविधियाँ जल स्रोतों को प्रदूषित कर रही है।
तीन अंक वाले प्रश्न
प्रश्न 24. भारत में नगरीय अपशिष्ट निपटान एक गम्भीर समस्य क्यों है कोई तीन कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर (i) तेजी से बढ़ती जनसंख्या तथा उसके लिए अपर्यापत सुविधाएँ तथा
विभिन्न स्त्रोतों द्वार अपशिष्ट की मात्रा में वृद्धि।
(ii) कारखानों, विद्युत गृहों तथा भवन निर्माण तथा विध्वंस से भारी मात्रा में निकली राख या मलबा।
(iii) अपशिष्ट / कचरे का पूर्णतः निपटान न होना। बिना एकत्र किये छोड़ना आदि।
प्रश्न 25, प्रयावरण का प्रदूषण कैसे होता है? पर्यावरणीय निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी विभिन्न चार प्रकार के प्रदूषणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: पर्यावरण प्रदूषण मानवीय क्रियाकलापों के अपशिष्ट उत्पादों से मुक्त द्रव्य एवं ऊर्जा का परिणाम है।
(i) जलप्रदूषण (ii) वायु प्रदूषण
(iii) भूप्रदूषण (iv) ध्वनि प्रदूषण
प्रश्न 26.भारत के जलाशयों को उद्योग किस प्रकार प्रदूषित करते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर (i) उद्योग अनेक अवांछित उत्पाद पैदा करते हैं। जिनमें औद्योगिक कचरा, प्रदूषित अपशिष्ट जल, जहरीली , रासायनिक अवशेष अनेक भारी धातुएँ, धुल धुऑ आदि शामिल है।
(ii) अधिकतर औद्योगिक कचरे को बहते जल में या झीलों आदि में विसर्जित कर दिया जाता है। परिणाम स्वरूप रासायनिक तत्व
जलाशयों, नदियों आदि में पहुँच जाते हैं।
(iii) सर्वाधिक जल प्रदूषण उद्योग चमड़ा लुगदी व कागज, वस्त्र तथा रसायन है।
(पाँच अंक वाले प्रश्न)
प्रश्न 27. भूमि निम्नीकरण की समस्या के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : इन सभी समस्याओं के प्रमुख कारण हैं:-
1) अति सिंचाईः- इसके कारण देश में उत्तरी मैदानों में लवणीय व क्षारीय क्षेत्रों में वृद्धि हुई है। सिंचाई मृदा की संरचना को बदल देती है। इनके अतिरिक्ति उर्वरक, कीटनाशी भी मृदा के प्राकृतिक, भौतिक रासायनिक व जैविक गुणों को नष्ट करके मृदा को बेकार कर देते हैं।
2) औद्योगिक अपशिष्ट:- उद्योगों द्वारा निकला अपशिष्ट जल को दूषित कर देता है और फिर दूषित जल से की गई सिंचाई मृदा के गुणों को नष्ट कर देती है।
3) नगरीय अपशिष्ट:- नगरों से निकला कूड़ा-करकट भूमि का निम्नीकरण करता है और नगरों से निकला जलमल व अपशिष्ट के विपैले रासायनिक पदार्थ आस-पास के क्षेत्रों की मृदा में मिलकर उसे प्रदूषित कर देते हैं।
4) चिमनियों का धुआं:- कारखानों व अन्य स्रोतों की चिमनियों से निकलने वाली गैसीय व कणिकीय प्रदूषकों को हवा दूर तक उड़ा ले जाती है और ये प्रदूषक मृदा में मिलकर उसे प्रदूषित करते हैं।
5) अम्ल वष:- कारखानों से निकलने वाली गंधक अम्लीय वर्षा का कारण है। इससे मृदा में अम्लता बढ़ती है। कोयले की खानो, मोटर वाहनो, ताप बिजली घरों से भारी मात्रा में निकले प्रदूषण मृदा व वायु को प्रदूषित करते हैं।
प्रश्न 28. भारत में गंदी बस्तियों की समस्याएँ क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 1) इन बस्तियों में रहने वाले लोग ग्रामीण पिछड़े इलाकों से प्रवासित होकर रोजगार की तलाश में आते हैं।
2) यहाँ अच्छे मकानों का मिलना कठिन है।
3) ये बस्तियाँ रेलवे लाइन, सड़क के साथपार्क या अन्य खाली पड़ी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बसायी जाती है।
4) खुली हवा, स्वच्छ पेयजल, शौच सुविधाओं, प्रकाश का सर्वथा अभाव होता है।
5) कम वेतन मजदूरी प्राप्त करने के कारण जीवन स्तर अति निम्न होता है ।
6) कुपोषण के कारण बीमारियों की संभावना बनी रहती है।
7) नशा व अपराध के कार्यों में लिप्त हो जाते हैं।
8) चिकित्सा सुविधाओं का अभाव।
प्रश्न 29. न्यू निम्नीकरण को रोकने/कम करने के उपाय बताओ।
उत्तर : 1) किसान रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग उचित मात्रा में करें।
2) नगरीय औद्योगिक गंदे पानी को उपचारित करके पुनः उपयोग में लाया जाये।
3) सड़ी-गली सब्जी व फलपशु मलमूत्र को उचित प्रौद्योगिकी द्वारा बहुमूल्य खाद में परिवर्तित किया जाये।
4) बस्तियों के आसपास खुले में शौच पर प्रतिबन्ध लगे।
5) प्लास्टिक से बनी वस्तुओं पर प्रतिबन्ध लगे।
6) कूड़ा-कचरा निश्चित स्थान पर ही डाला जाये ताकि उसका यथासम्भव निपटान हो सके।
7) वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाये।