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class 12 geography bharat log aur arthvyavastha chapter 6 solution hindi

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6) जल संसाधन


प्र० 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए।

(i) निम्नलिखित में से जल किस प्रकार का संसाधन है?
(क) अजैव संसाधन
(ख) अनवीकरणीय संसाधन
(ग) जैव संसाधन
(घ) चक्रीय संसाधन

(ii) निम्नलिखित नदियों में से, देश में किस नदी में सबसे ज्यादा पुनः पूर्तियोग्य भौमजल संसाधन हैं?
(क) सिंधु
(ख) ब्रह्मपुत्र
(ग) गंगा
(घ) गोदावरी

(iii) घन कि०मी० में दी गई निम्नलिखित संख्याओं में से कौन-सी संख्या भारत में कुल वार्षिक वर्षा दर्शाती है?
(क) 2,000
(ख) 3,000
(ग) 4,000
(घ) 5,000

(iv) निम्नलिखित दक्षिण भारतीय राज्यों में से किस राज्य में भौमजल उपयोग (% में) इसके कुल भौमजल संभाव्य से ज्यादा है?
(क) तमिलनाडु
(ख) कर्नाटक
(ग) आंध्र प्रदेश
(घ) केरल

(v) देश में प्रयुक्त कुल जल का सबसे अधिक समानुपात निम्नलिखित सेक्टरों में से किस सेक्टर में है?
(क) सिंचाई
(ख) उद्योग
(ग) घरेलू उपयोग
(घ) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर:
(i) (घ) चक्रीय संसाधन
(ii) (ग) गंगा
(iii) (ग) 4,000
(iv) (क) तमिलनाडु
(v) (क) सिंचाई

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।

(i) यह कहा जाता है कि भारत में जल-संसाधनों में तेजी से कमी आ रही है। जल संसाधनों की कमी के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।

उत्तर: भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण जल की प्रतिव्यक्ति उपलब्धता दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। साथ ही उपलब्ध जल संसाधन औद्योगिक, कृषि और घरेलू प्रदूषकों से प्रदूषित होता जा रहा है। इस कारण उपयोगी जल संसाधनों की उपलब्धता कम होती जा रही है।


(ii) पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु राज्यों में सबसे अधिक भौमजल विकास के लिए कौन-से कारक उत्तरदायी हैं?

उत्तर: पंजाब, हरियाणा तथा तमिलनाडु राज्यों में भौमजल विकास सबसे अधिक इसलिए संभव हुआ है क्योंकि इन प्रदेशों में कृषि के अंतर्गत उगाई जाने वाली फसलों को सिंचाई की आवश्यकता होती है। हरित क्रांति का शुभारंभ भी इन्हीं राज्यों से हुआ था साथ ही भौमजल की मात्रा भी इन राज्यों में सर्वाधिक है।


(iii) देश में कुल उपयोग किए गए जल में कृषि का हिस्सा कम होने की संभावना क्यों है?

उत्तर: धीरे-धीरे ही सही भारत में औद्योगिकीकरण का स्तर बढ़ रहा है तथा कृषिक्षेत्र कम हो रहा है। नगरों के समीप की भूमि पर कृषि के अलावा अनेक आर्थिक गतिविधियों में भूमि उपयोग बढ़ने से कृषि भूमि सिकुड़ती जा रही है। अतः भविष्य में जल का उपयोग भी कृषि की अपेक्षा अन्य आर्थिक गतिविधियों में बढ़ने की संभावना है।


(iv) लोगों पर संदूषित जल/गंदे पानी के उपयोग के क्या संभव प्रभाव हो सकते हैं?

उत्तर: विश्व बैंक और विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत में एक-चौथाई संक्रामक रोग जल जनित हैं। संदूषित जल से उत्पन्न होने वाली बीमारियाँ हैं अतिसार, पीलिया, हैजा, रोहा, आंतों के कृमि आदि।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।

(i) देश में जल संसाधनों की उपलब्धता की विवेचना कीजिए और इसके स्थानिक वितरण के लिए उत्तरदायी निर्धारित करने वाले कारक बताइए।

उत्तर: भारत में जल संसाधनों की उपलब्धता के चार मुख्य स्रोत हैं – (i) नदियाँ (ii) झीलें (iii) तलैया (iv) तालाब। यह जल वर्षण के विविध रूपों से प्राप्त होता है।
देश में एक वर्ष में वर्षण से प्राप्त कुल जलराशि की मात्रा लगभग 4,000 घन कि०मी० है। धरातलीय जल और पुनः पूर्तियोग्य भौमजल से 1,869 घन कि०मी० जल की उपलब्धता है। जिसका केवल 60% अर्थात् 1,122 घन कि०मी० का ही लाभदायक उपयोग किया जा सकता है। भारत में होने वाली वर्षा में अत्यधिक सामयिक व स्थानिक विभिन्नता पायी जाती है। कुल वर्षा का अधिकांश भाग मानसूनी मौसम तक संकेद्रित है। गंगा, ब्रह्मपुत्र व बराक नदियों के जल ग्रहण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है जोकि भारत का एक-तिहाई क्षेत्रफल है। किंतु यहाँ । कुल धरातलीय जल-संसाधनों का 60% जल पाया जाता है। दक्षिण भारतीय नदियाँ जैसे-गोदावरी, कृष्णा व कावेरी में जल प्रवाह का अधिकतर भाग उपयोग में लाया जा रहा है जबकि गंगा व ब्रह्मपुत्र नदी घाटियों में यह अभी तक संभव नहीं हो पाया है। नदियों में जल प्रवाह उनके जल ग्रहण क्षेत्र के आकार तथा उनके जल ग्रहण क्षेत्र में हुई वर्षा पर निर्भर करता है। भारत में नदियों व उनकी सहायक नदियों की कुल संख्या 10,360 है। इनमें 1,869 घन कि०मी० वार्षिक जल प्रवाह होने का अनुमान है जिसका केवल 32% अर्थात् 690 घन कि०मी० जल का उपयोग किया जा सकता है।

(ii) जल संसाधनों का ह्रास सामाजिक द्वंद्वों और विवादों को जन्म देते हैं। इसे उपयुक्त उदाहरणों सहित समझाइए।

उत्तर: जल एक नवीकरणीय चक्रीय प्राकृतिक संसाधन है जोकि पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है किंतु पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का केवल 3% ही अलवणीय अर्थात् मानव के लिए उपयोगी है, शेष 97% जल लवणयुक्त अथवा खारा है जो केवल नौ संचालन व मछली पकड़ने के अलावा मानव के लिए प्रत्यक्ष उपयोग में नहीं आता। अलवणीय जल की उपलब्धता भी स्थान और समय के अनुसार भिन्न-भिन्न है। इसलिए इस दुर्लभ संसाधन के आवंटन और नियंत्रण को लेकर समुदायों, राज्यों तथा देशों के बीच द्वंद्व, तनाव व लड़ाई-झगड़े तथा विवाद होते रहे हैं। जैसे|
(i) पंजाब, हरियाण व हिमाचल प्रदेश में बहने वाली नदियों के जल बँटवारे को लेकर विवाद।
(ii) नर्मदा नदी के जल को लेकर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व गुजरात राज्यों में विवाद।
(iii) कावेरी नदी के जल बँटवारे को लेकर केरल, तमिलनाडु व कर्नाटक राज्यों में विवाद।
जनसंख्या के बढ़ने के साथ-साथ जल की प्रतिव्यक्ति उपलब्धता दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। उपलब्ध जल औद्योगिक, कृषि व घरेलू निस्सरणों से प्रदूषित होता जा रहा है अतः उपयोगी, शुद्ध जल संसाधनों की उपलब्धता और सीमित होती जा रही है।

(iii) जल-संभर प्रबंधन क्या है? क्या आप सोचते हैं कि यह सतत पोषणीय विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है?

उत्तर: जल-संभर प्रबंधन का संबंध, मुख्य रूप से धरातलीय तथा भौमजल संसाधनों के कुशल व दक्ष प्रबंधन से है। इसके अंतर्गत बहते वर्षा जल को विभिन्न विधियों द्वारा रोककर अंत:स्रवण, तालाब, पुनर्भरण तथा कुओं आदि के द्वारा भौमजल का संचयन और पुनर्भरण करना शामिल है। जल संभर प्रबंधन का उद्देश्य प्राकृतिक जल संसाधनों और समाज की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना है। कुछ क्षेत्रों में जल-संभर विकास परियोजनाएँ पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का कायाकल्प करने में सफल हुई हैं। जैसे
1. हरियाली-केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल-संभर विकास परियोजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण जनसंख्या को पीने, सिंचाई, मत्स्यपालन और वन रोपण के लिए जल-संभर विधि से जल का संरक्षण करना है। यह परियोजना लोगों के सहयोग से ग्राम पंचायतों द्वारा निष्पादित की जा रही है।
2. नीरू-मीरू (जल और आप )-यह कार्यक्रम आंध्रप्रदेश में तथा अरवारी पानी संसद (अलवर राजस्थान में) लोगों के सहयोग से चलाई जा रहे हैं जिनमें जल संग्रहण के लिए संरचनाएँ जैसे अंत:स्रवण, तालाब, ताल
(जोहड़) की खुदाई की गई हैं तथा रोक बाँध बनाए गए हैं।
3. तमिलनाडु में घरों में जल संग्रहण संरचना का निर्माण आवश्यक बना दिया गया है।
4. महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित रालेगॅन सिद्धि एक छोटा-सा गाँव है। यह पूरे देश में जल-संभर विकास का एक जीवंत उदाहरण है। देश में लोगों को जल-संभर विकास प्रबंधन के लाभों को बताकर उनमें जागरूकता पैदा करके जल की उपलब्धता को सतत पोषणीय विकास से जोड़ा जा सकता है।

एक अंक वाले प्रश्न

प्रश्न 1. भारत किन दो नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र बहुत बड़े है।

उत्तर : भारत में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र बहुत बड़े है।

प्रश्न 2. भारत के उन प्रमुख राज्यों के नाम बताइए जो अपने भौम जल का उपयोग क्षमता से कम करते हैं।

उत्तर : छत्तीसगढ़, उड़ीसा, केरल ऐसे राज्य है जो अपनी भौम जल क्षमता से कम जल का उपयोग करते हैं।

प्रश्न 3 . किन राज्यों में लैगून व झीलों का प्रयोग धरातलीय जल संसाधनों के रूप में होता है?

उत्तर : केरल, उड़ीसा और पं बंगाल राज्यों में।

प्रश्न 4. ‘जल गुणवत्ता’ का अभिप्राय स्पष्ट करो ।

उत्तर : “जल गुणवत्ता” से तात्पर्य जल की शुद्धता या अनावश्यक बाहरी पदार्थों से रहित जल से है।

प्रश्न 5, देश में अत्यधिक प्रदूषित दो नदियाँ कौन-सी है?

उत्तर : गंगा और यमुना नदी ।

प्रश्न 6. दिल्ली से वाराणसी में मध्य गंगा नदी पर स्थित दो ऐसे महानगरों के नाम बताओं जो अत्यधिक प्रदूषण फैलाते हैं। “

उत्तर : कानपुर, इलाहाबाद।

प्रश्न 7. भारत में जलसंभर विकास की शुरूआत किस क्षेत्र से हुई? ।

उत्तर : महाराष्ट्र में अहमदनगर (रालेगन सिद्धि गाँव)


प्रश्न 8. जल संभर प्रबंधन का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

उत्तर : जल संभर प्रबंधन का प्रमुख उद्देश्य
प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाना है।

प्रश्न 9. ‘जल की गुणवत्ता का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : ‘जल की गुणवत्ता का तात्पर्य जल की शुद्धता या अनावश्यक बाहरी पदार्थों से रहित जल से है।

प्रश्न 10. ‘भारत की समुद तट रेखा विशाल व दंतुरित है। इसी कारण बहुत सी लैगून व झीलें बन गई है। किन्हीं दो राज्यों के नाम बताइयें जहाँ लैगून व झीलें प्रमुखतया है।

उत्तर : केरल, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 11.लैगून व झीलों में खारा जल है – इसका उपयोगल किन क्षेत्रों में किया जाता है?

उत्तर : इसका उपयोग मछलीपालन, चावल की कुछ किस्मों, नारियल आदि की सिंचाई में किया जाता है।

प्रश्न 12. राष्ट्रीय जल संसाधन की गुणवत्ता की मॉनीटरिंग कौन-सी दो कम्पनियाँ करती हैं?

उत्तर : केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड (सी.पी.सी.बी.)
राज्य प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड
(एस. पी.सी.बी.)

प्रश्न 13. जल संमर प्रबंधन का क्या अर्थ है?

उत्तर : धरातलीय व भौम जल संसाधनों का दक्ष प्रबंधन ही जल संभर प्रबंधन कहलाता है।

प्रश्न 14, आन्ध्र प्रदेश में किन दो नदियों को औपचारिक तौर पर जोड़ा गया है?

उत्तर : गोदावरी व कृष्णा नदी।

प्रश्न 15 . भारत में जल प्रदूषण के किन्हीं दो स्त्रोतो का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : 1) वाहित मल निपटान
2) नगरीय वाही जल
3) उद्योगों से विषाक्त जल का स्राव
4) नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र
5) कृषित भूमि के ऊपर से बहता हुआ जल

प्रश्न 16. भारत में जल की गुणवत्ता के निम्नीकरण का मुख्य कारण है।

उत्तर: भारत की बढ़ती जनसंख्या तथा औद्योगिक विकास की तीव्र गति।

प्रश्न 17, राजस्थान के अलवर जिले में चलाया जाने वाला जल संग्रहण कार्यक्रम का क्या नाम है?

उत्तर : अरवारी पानी संसद ।

प्रश्न 18. यमुना नदी किन दो शहरों के बीच सबसे अधिक प्रदूषित है।

उत्तर : दिल्ली और इटावा

प्रश्न 19. “हरियाली’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : हरियाली केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल संभर विकास परियोजना है।

प्रश्न 20. राष्ट्रीय जल नीति 2002 में जल आबंटन की प्राथमिकता क्या थी?

उत्तर : पेय जस प्रमुख प्राथमिकता थी, उसके बाद सिंचाई, जलशक्ति नौकायन, औद्योगिक और अन्य उपयोग है।

तीन अंक वाले प्रश्न

प्रश्न 21. अलवणीय जल के बंटवारे पर विवाद वर्षों से चले आ रहे है तथा इनके बढ़ने की आशंका है इसके दो कारण बताइये।
अथवा
आधुनिक समय में विकास को सुनिश्चित करने के लिए जल का मूल्यांकन जल का कार्यक्षम उपयोग और संरक्षण आवश्यक हो
गया है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर 1) आज धरातल पर मानव उपयोग के लिए अलवणीय जल का एक बहुत छोटा भाग ही उपलब्ध है। यह भी बढ़ती जनसंख्य, तकनीकी प्रगति व प्रदूषण के कारण घटता जा रहा है।

2) भारत में जल की उपलब्धता समय और स्थान के अनुसार भिन्न-भिन्न है। यह भी आज जलवायु परिवर्तनों के कारण और
जटिल होती जा रही है।

3) इन जल संसाधनों पर नियंत्रण करना आज विभिन्न राज्यों व प्रदेशों के मध्य विवाद एवं तनाव का विषय बनते जा रहे हैं।

अतः आज विकास को सुनिश्चित करने के लिए जल का मूल्यांकन कार्यक्षम उपयोग एवं संरक्षण आवश्यक हो गया है।


प्रश्न 22 भारत में उद्योग जल संसाधनों को प्रदूषित करने में किस प्रकार उत्तरदायी है। उदाहरण के साथ स्पष्ट करें।
अथवा
भारत में तीव्र औद्योगिकरण जल संसाधनों का तेजी से हृस किया है, स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः 1) उद्योगों से निकला अवशिष्ट पदार्थों को बिना शुद्ध किये नदियों व
झीलों में डाला जाता है।
2) ये प्रदूषण तत्व जल जीवों को नुकसान पहुँचाते है।
3) रसायन चमड़ा, लुग्दी एवं कागज उद्योग सर्वाधिक नुकसान पहुँचाने वाले उद्योग


प्रश्न 23. दक्षिण भारत की प्रमुख नदियों में अपने वार्षिक जल प्रवाह का अधिकतर भाग काम में लाया जाता है। लेकिन ब्रह्मपुत्र व नदियों के बेसिनों में ऐसा संभव नहीं हो पाया है । क्यों

उत्तर : 1) गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदियों के बेसिनों में दभारत की नदियों की अपेक्षा
अधिक वर्षा होती है। इनका प्रवाह बहुत तीव्र एवं वर्ष पर्यन्त है।

2) गंगा व ब्रह्मपुत्र जैसे उत्तर भारतीय नदियों का धरातल मुलायम समतल व नदी अवरोधों से मुक्त है। इसलिए इन नदियों के जल का अधिकांश भाग समुद्रों में चला जाता है। इसका प्रयोग नहीं होता।

3) दक्षिण भारत की नदियों में जल का अधिकांश भाग तालाबों व जलाशयों
में एकत्र किया जाता है। इन नदियों पर जल प्रपात व अन्य अवरोध पाये जाते हैं इस कारण उनके जल का अधिकांश भाग प्रयोग में लाया जाता है

प्रश्न 24. भारत में जल संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक हैं ? किन्हीं तीन कारणों को स्पष्ट कीजिए?

उत्तर: 1) अलवणीय जल की घटती उपलब्धता
2) शुद्ध जल की घटती उपलब्धता।
3) जल की बढ़ती मांग।
4) तेजी से फैलते हुए प्रदूषण से जल की गुणवत्ता का हास

पाँच अंक वाले प्रश्न

प्रश्न 30. वर्षा जल संग्रहण किसे कहते है? वर्षा जल संग्रहण के आर्थिक व सामाजिक मूल्यों का विश्लेषण कीजिए। (किन्हीं चार का)
अथवा
वर्षा जल संग्रहण के किन्हीं पांच उपयोगों का वर्णन करें।

उत्तर : वर्षा जल संग्रहण विभिन्न उपयोगों के लिए वर्षा के जल को रोकने और एकत्र करने की विधि है।
वर्षा जल संग्रहण के आर्थिक व सामाजिक मूल्य:-
1) पानी के उपलब्धता को बढ़ाता है जिसे सिंचाई तथा पशुओं के लिए उपयोग किया जाता है।
2) भूमिगत जल स्तर को नीचा होने से रोकता है।
3) मृदा अपरदन और बाढ़ को रोकता है।
4) लोगों में सामूहिकता की भावना को बढ़ाता है।
5) भौम जल को पम्प करके निकालने में लगने वाली ऊर्जा की बचत करता है।
6) लोगों में समस्या समाधान की प्रवृत्ति बढ़ाता है।
7) प्रकृति से मधुर संबंध बनाने में सहायक होता है।
8) लोगों को एक-दूसरे के पास लाता है।
9) फ्लुराइड और नाइट्रेटस जैसे संदूषकों को कम कर के भूमिगत जल की गुणवत्ता को बढ़ाता है।

प्रश्न 31हमारे देश में जल संसाधन किन समस्याओं से जूझ रहा है व्याख्या कीजिए?

उत्तर : जल मानव की आवश्यक आवश्यकताओं में आता है लेकिन आज जल
संसाधन की प्रति व्यक्ति उपलब्धता दिनों दिन कम होती जा रही है। इससे जुड़ी समस्यायें निम्नलिखित है।

1) जल की उपलब्धता में कमी :- जनसंख्या वृद्धि एवं सिंचाई के साधनों में वृद्धि के कारण भूमिगत जल का दोहन बढ़ गया है जिससे
भूमिगत जल का स्तर दिनों दिन घट रहा है। नगरों की बढ़ती जनसंख्या। को पेय जल की आपूर्ति कठिन हो रहा है।

2) जल के गुणों का हास : – जल का अधिक|
उपयोग होने से जल भंडारों में कमी आती है साथ ही उसमें बाह्य अवांछनीय पदार्थ जैसे
जीव औद्योगिक अपशिष्ट आदि मिलते जाते है जिससे नदियाँ जलाशय सभी प्रभावित होते हैं। इसमें जलीय तन्त्र भी प्रभावित होता है। कभी-कभी प्रदूषक नीचे तक पहुँच जाते हैं और भूमिगत जल को प्रदूषित करते हैं।

3) जल प्रबन्धन :- जल प्रबंधन के लिए देश में अभी भी पर्याप्त जागरूकता नहीं है। सरकारी स्तर पर बनी नीतियों एवं कानूनों का प्रभावशाली रूप से कार्यान्वयन नहीं हो पा रहा है इसीलिये प्रमुख नदियों के संरक्षण के लिए बनी योजनायें निरर्थक साबित हुई है।

4) जागरूकता एवं जानकारी का अभाव :- जल एक सीमित संसाधन है हाँलाकि यह पुनः पूर्ति योग्य है, इसे सुरक्षित एवं शुद्ध रखना हमारी जिम्मेदारी है और इस तरह की जागरूकता का अभी देश में अभाव है

प्रश्न 32. जल संभर प्रबन्धन के लिए सरकार द्वारा उठाये गये प्रमुख कदम कौन से हैं? कम से कम चार बिन्दुओं में स्पष्ट करें?
अथवा
जल संभर प्रबंधन की व्याख्या करे। इसके मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर : जल संमर प्रबंधन :- धरातलीय एवं भौम जल संसाधनों का द प्रबन्धन, जिसमें कि वे व्यर्थ न हो, जल संभर प्रबन्धन कहलाता है। इससे भूम, जल पौधे एवं प्राणियों तथा मानव संसाधन के संरक्षण को भी विस्तृत अर्थ में शामिल करते हैं।

प्रमुख कदम :-
1) “हरियाली” केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल संभर विकास परियोजना है। इस योजना से ग्रामीण जल संरक्षण करके पेय जल की समस्या को दूर करने के साथ-साथ वनरोपण, मत्स्य पालन एवं सिंचाई की सुविधा भी प्राप्त कर सकते हैं।

2) नीरू मीरु कार्यक्रम आन्ध्रप्रदेश में चलाया गया है जिसका तात्पर्य है। जल और आप इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों को जल संरक्षण की विधियाँ सिखाई गई है।

3) अरवारी पानी संसद-राजस्थान में जोहड़ की खुदाई एवं रोक बांध बनाकर जल प्रबन्धन किया गया है।

4) तमिलनाडु में सरकार द्वारा घरों में जल संग्रहण संरचना आवश्यक कर दी गई है। उपर्युक्त सभी कार्यक्रमों में स्थानीय निवासियों को जागरूक करने उनका सहयोग लिया गया है।

उद्देश्य :-
1) कृषि और कृषि से संबंधित क्रियाकलापों जैसे उद्यान, कृषि, वानिकी और वन संवर्धन का समग्र रूप से विकास करना।
2) कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए।
3) पर्यावरणीय हास को रोकना तथा लोगों के जीवन को ऊंचा उठाना।

प्रश्न 32. जल संसाधनों के कम होने के उत्तरदायी किन्हीं तीन कारकों की व्याख्या कीजिए,।भारत में जल प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिए किन्हीं दो वैधानिक उपायों को बताइएI
अथवा
भविष्य में भावी पीढ़ी को जल के लिए संकटमय स्थिति में ग्रासित होने के काना पड़ सकता है। इस स्थिति के उत्पन्न होने के कारणों की विवेचना करो।

उत्तर : भारत में जल संसाधनों की कमी के कारण :-
1) अत्यधिक उपयोग : – बढ़ती जनसंख्या के कारण जल संसाधन का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। घरेलू ही नहीं औद्योगिक
में भी जल अत्यधिक उपयोग इस कमी को और भी बढ़ा देता है।

2) नगरीय क्षेत्रों का धरातल कक्रीट युक्त होना:- बढ़ते विकास व औद्योगिकरण के कारण अब नगरीय क्षेत्रों में कहीं भी धरातल
नहीं है बल्कि कंक्रीट युक्त हो चुका है जिसमें भूमि के नीचे जल रिसाव की मात्रा में कमी होती जा रही है और भौम जल संसाधनों में
कमी आ गई है।

3) वर्षा जल संग्रहण के संदर्भ में जागरूकता की कमी :- वर्षा जल संग्रहण के द्वारा संसाधनों का संरक्षण आसानी से किया जा
सकता है। इसके लिए जरूरत है लोगों को जागरूक करने की ताकि वो वर्षा जल के महत्व को समझे और विभिन्न विधियों द्वारा उसका संग्रहण व संरक्षण कर सकें। वर्षा जल संग्रहण घरेलू उपयोग भूमिगत जल पर निर्भरता को कम करता है।

4) जलवायविक दशाओं में परिवर्तन :- जलवायु की दशाओं में परिवर्तन के कारण मानसून में भी परिवर्तन आता जा रहा है। जिसके कारण धरातलीय व भौम जल संसाधनों में लगातार कमी आ रही है।

5) किसानों द्वारा कृषि कार्यों के लिए जल की अति उपयोग :- किसानों द्वारा कृषि कार्यों के लिए अत्यधिक धरातलीय व भौम जल का
उपयोग जल संसाधनों में कमी ला रहा है। बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वर्ष में तीन बार कृषि करने से जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।

वैधानिक उपाय :-
(1) जल अधिनियम-1974 (प्रदूषण का निवारण और नियन्त्रण)
(2) पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम -1986
(3) जल उपकर अधिनियम-1977

प्रश्न 34. भारत में सिंचाई की बढ़ती हुई मांग के लिए उत्तरदायी कारकों का वर्णन कीजिए?

उत्तर : भारत एक उष्ण कटिबन्धीय प्रदेश है इसलिए यहाँ सिंचाई की माँग अधिक है। सिंचाई की बढ़ती माँग के कारण निम्नलिखित है :

• वर्ष का असमान वितरण : – देश में सारे वर्ष वर्षा का अभाव बना ।
रहता है। अधिकांश वर्षा केवल (मानसून) वर्षा के मौसम में ही होती है। इसलिए शुष्क ऋतु में सिंचाई के बिना कृषि संभव नहीं।

• वर्षा की अनिश्चितता :- केवल वर्षा का आगमन ही नहीं बल्कि पूरी मात्रा भी ।
अनिश्चित है इस उतारचढ़ाव की कमी केवल सिंचाई द्वारा ही पूरा किया जा सकता है।

• परिवर्तन शीलता :- वर्षा की भिन्नता व परिवर्तनशीलता अधिक है। किन्हीं क्षेत्रों में वर्षा अधिक होती है तो कहीं कमकहीं समय से पहले तो कहीं बाद में । इसलिए सिंचाई के बिना भारतीय कृषि ‘मानसून का जुआ बनकर रह जाती है।

• मानसूनी जलवायु :- भारत की जलवायु मानसूनी है जिसमें केवल तीन से चार महीने तक ही वर्षा होती है। अधिकतर समय शुष्क ही रहता है जबकि कृषि पूरे वर्ष होती है इसलिए सिंचाई पर भारतीय कृषि अधिक निर्भर है।

• खाद्यान्न व कृषि प्रधान कच्चे माल की बढ़ती माँग :- देश की बढ़ती जनसंख्या के कारण खाद्यान्नों व कच्चे माल की माँग में
निरन्तर वृद्धि हो रही है। इसलिए बहुफसली कृषि जरूरी है जिसके कारण सिंचाई की माँग बढ़ रही है

प्रश्न 35. भारत में ‘जलसंभर प्रबंधन’ और ‘वर्षा जल संग्रहण ’ धरातलीय जल संसाधनों के दक्ष प्रबंधन और संरक्षण की विधियाँ किस प्रकार है, स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : जल संभर प्रबंधन
(i) जल संभर प्रबंधन द्वारा बहते जल को रोका जाता है।
(ii) इसके द्वारा भौम जल का संचयन और पुनर्भरण अनेक विधियों जैसेअंतः अवण तालाब, पुनर्भरण से किया जाता है।
(iii) इसके अंतर्गत सभी संसाधनों प्राकृतिक तथा जल संभर सहित मानवीय संसाधनों के संरक्षण, पुनरुत्पादन को सम्मिलित किया जाता है।
(iv) नीरू मीरू (आंध्रप्रदेश) तथा अरवारी पानी संसद अलवर राजस्थान के अंतर्गत लोगों के सहयोग से विभिन्न जल संग्रहण
संरचनाएं जैसे अंतः श्रवण तालाब ताल की खुदाई की गई है और। बाँध बनाए गए है।

वर्षा जल संग्रहण :-
(I) ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत वर्षा जल संग्रहण सतह संचयन जलाशयों, जैसे-झीलों, तालाबों आदि में किया जाता है।
(ii) राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण ढाँचे जिन्हें कड अथवा टाँका के नाम से जानी जाती है निर्माण घर में संग्रहीत वर्षा जल को एकत्र करने के लिए किया जाता है।
(iii) जल संग्रहण पानी की उपलब्धता को बढ़ाता है, भूमिगत जल स्तर को नीचा होने से रोकता है, फ्लोराइड और नाइट्रेटस जैसे संदूषकों को कम करने अवमिश्रिण भूमिगत जल की गुणवत्ता बढ़ाता है।

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