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class 12 geography bharat log aur arthvyavastha chapter 7 solution hindi

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7) खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

प्र० 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए।

(i) निम्नलिखित में से किस राज्य में प्रमुख तेल क्षेत्र स्थित है?
(क) असम
(ख) बिहार
(ग) राजस्थान
(घ) तमिलनाडु

(ii) निम्नलिखित में से किस स्थान पर पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन स्थापित किया गया था?
(क) कलपक्कम
(ख) नरोरा
(ग) राणाप्रताप सागर
(घ) तारापुर

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज भूरा हीरा के नाम से जाना जाता है?
(क) लौह
(ख) लिगनाइट
(ग) मैंगनीज
(घ) अभ्रक

(iv) निम्नलिखित में कौन-सा ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है?
(क) जल
(ख) सौर
(ग) ताप
(घ) पवन

उत्तर:
(i) (क) असम
(ii) (घ) तारापुर
(iii) (ख) लिगनाइट
(iv) (ग) ताप

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) भारत में अभ्रक के वितरण का विवरण दें।

उत्तर: भारत में अभ्रक मुख्यतः झारखंड, आंध्र प्रदेश में राजस्थान से प्राप्त किया जाता है। इसके अलावा तमिलनाडु प० बंगाल तथा मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु व महाराष्ट्र में भी अभ्रक पाया जाता है। झारखंड के निचले हजारीबाग पठार व आंध्र प्रदेश में नेल्लोर जिले में सर्वोत्तम प्रकार के अभ्रक का उत्पादन होता है।


(ii) नाभिकीय ऊर्जा क्या है? भारत के प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्रों के नाम लिखें।

उत्तर: रेडियोधर्मी पदार्थों जैसे यूरेनियम व थोरियम के संलयन से प्राप्त ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। भारत में यूरेनियम व थोरियम के पर्याप्त भंडार हैं। भारत के प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्र हैं-तारापुर (महाराष्ट्र), रोवत भाटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरोरा (उत्तर प्रदेश), कैगा (कर्नाटक) तथा काकरापारा (गुजरात)।


(iii) अलौह धातुओं के नाम बताएँ। उनके स्थानिक वितरण की विवेचना करें।

उत्तर: बॉक्साइट, ताँबा, सोना व चाँदी अलौह धातुएँ हैं। उड़ीसा बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु भी बॉक्साइट के अन्य उत्पादक राज्य हैं। ताँबा मुख्यतः झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान राज्य में पाया जाता है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक व तमिलनाडु अन्य ताँबा उत्पादक राज्य है।


(iv) ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत कौन-से हैं?

उत्तर: ये सतत पोषणीय ऊर्जा के नवीकरण योग्य स्रोत हैं, जैसे-सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, ज्वारीय तथा तरंग ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा तथा जैव ऊर्जा आदि ऊर्जा अपारंपरिक स्रोत हैं। ये स्रोत पर्यावरण के अनुकूल हैं साथ ही कम खर्चीले व टिकाऊ हैं।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।

(i) भारत के पेट्रोलियम संसाधनों पर विस्तृत टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भातर में व्यवस्थित ढंग से खनिज तेल का अन्वेषण तथा उत्पादन 1956 ई० में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की स्थापना के बाद प्रारंभ हुआ। उससे पहले असम में डिगबोई एकमात्र तेल उत्पादक केंद्र था जहाँ नहोर पोंग नामक स्थान पर 1857 ई० में भारत में पहला कुआँ खोदा गया था। हाल ही के वर्षों में देश के दूरतम पश्चिमी एवं पूर्वी तटों पर तेल के नए निक्षेप मिले हैं। इनमें डिगबोई, नहार कटिया तथा मोरान प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र हैं। गुजरात में अंकलेश्वर, कालोल, मेहसाणा, नवागाम, कोसांबा तथा लुनेज प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र हैं। मुंबई हाई, अरब सागर के अपतटीय क्षेत्र मुंबई से 160 कि०मी० दूर हैं, जिनमें 1976 ई० से उत्पादन प्रारंभ हुआ था। तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग को पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी तथा कावेरी के बेसिनों में यह अन्वेषणात्मक कूपों में पाया गया है। कूपों से निकाला गया तेल अपरिष्कृत तथा अनेक अशुद्धिओं से परिपूर्ण होता है। प्रयोग से पहले इसे शोधित करना पड़ता है। भारत में दो प्रकार के तेलशोधक कारखाने/रिफाइनरीज हैं – (क) क्षेत्र आधारित, (ख) बाजार आधारित। भारत में कुल 18 परिष्करण शालाएँ हैं-डिगबोई (क्षेत्र आधारित) तथा बरौनी (बाज़ार आधारित) तेलशोधक कारखाने हैं। खनिज तेल के शोधन के बाद इससे प्राप्त प्रमुख उत्पाद-पेट्रोलियम पदार्थ हैं जिनका उपयोग, मोटर-वाहनों, रेलवे तथा वायुयानों के अंतर-दहन ईंधन के रूप में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए होता है। इसके अनेक सह-उत्पाद पेट्रो-रसायन उद्योगों जैसे-उर्वरक, कृत्रिम रबर, कृत्रिम रेशे, दवाइयाँ, वैसलीन, स्नेहकों, मोम, साबुन तथा अन्य सौंदर्य प्रसाधनों, में प्रक्रमित किए जाते हैं।

(ii) भारत में जल विद्युत पर एक निबंध लिखें।

उत्तर: जल विद्युत, ऊर्जा का असमाप्य परंपरागत स्रोत है जिसका उपयोग कृषि क्षेत्र, उद्योगों व घरेलू सेक्टरों में विभिन्न उपकरणों व मशीनों को चलाने के लिए किया जाता है। विद्युत कई अन्य स्रोतों से भी उत्पन्न की जाती है, जिनमें ताप विद्युत व नाभिकीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। फिर इसे उपयोग हेतु, माँग वाले क्षेत्रों को विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों के द्वारा भेज दिया जाता है। किंतु जल विद्युत, इन सबसे में सबसे महत्त्वपूर्ण विद्युत स्रोत है, क्योंकि –

1. भारत में जल विद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक दशाएँ इसके अनुकूल हैं। जैसे यहाँ वर्षभर बहने वाली सदानीरा नदियाँ हैं।
2. हिमालय से निकलने वाली नदियों पर अनेक झरने, गॉर्ज व प्रपात मौजूद हैं, जहाँ विद्युत उत्पन्न करने के लिए प्राकृतिक दशाएँ मौजूद हैं।
3. दक्षिण भारत की नदियाँ भी अपने प्रवाह के पठारी भागों में ऐसी ही अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती हैं। जहाँ बाँध बनाकर जल विद्युत उत्पन्न की जा सकती है।इनके अलाचा निम्नलिखित कारक भी इसके विकास में सहायक हैं
1. भारत में बाँध निर्माण के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकी उपलब्ध है।
2. जल विद्युत केंद्र स्थापित करने से लेकर उपभोग क्षेत्रों तक विद्युत को पहुँचाने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों का । विकास व विस्तार परम आवश्यक है। अनेक विद्युत स्टेशनों व सब स्टेशनों के निर्माण में भारी निवेश की | जरूरत होती है।/भारत में इसका नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।
3. विद्युत उपयोग के लिए विभिन्न उपकरणों व मशीनों के निर्माण के लिए औद्योगिक विकास व बाज़ार दोनों की आवश्यकता होती है। भारत में, धीरे-धीरे ही सही इनका विस्तार हो रहा है।
4. भारत में अनेक बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं का विकास जल विद्युत प्राप्त करने व सिंचाई के लिए। नहरें विकसित करने के लिए किया गया है।
5. विद्युत को संरक्षित नहीं किया जा सकता इसलिए इसके उत्पादन का तुरंत उपयोग होना आवश्यक है अन्यथा | यह व्यर्थ चली जाती है। अत: इसके उत्पादन व माँग के बीच समन्वय होना जरूरी है।
6. भारत में प्रतिवर्ष 322 KWH शक्ति उत्पन्न की जाती है जबकि देश में कुल जलराशि से लगभग 90,000 बिलियन M.W. जल विद्युत प्राप्त करने की क्षमता है।
7. भारत में पहला जल विद्युत गृह कर्नाटक के शिव समुद्रम में स्थापित किया गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में कई विद्युत ग्रिड स्थापित किए गए हैं। अब एक एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे विद्युत आपूर्ति उन क्षेत्रों में संभव हो सकेगी जहाँ इसकी माँग है।

(एक अंक वाले प्रश्न)

प्रश्न 1. खनिज की परिभाषा दीजिये।

उत्तर : एक खनिज वह प्राकृतिक पदार्थ है जिसमें निश्चित रासायनिक व भौतिक गुण होते हैं। इनकी उत्पत्ति का आधार अजैविक, कार्बनिक या अकार्बनिक हो सकता है।

प्रश्न 2. लौह अयस्क के कौन से दो मुख्य प्रकार भारत में पाये जाते हैं?

उत्तर : हेमेटाइट एवं मैग्नेटाइट ।

प्रश्न 3. भारत का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र गोंडवाना कोयला क्षेत्र है। यह क्षेत्र किस नदी की घाटी में स्थित है तथा इस क्षेत्र के सबसे बड़े कोयला क्षेत्र का क्या नाम है ।

उत्तर : i) दामोदर नदी की घाटी में
i) झरियां कोयला क्षेत्र

प्रश्न 4. कूपों से निकाला गया खनिज तेल सीधे प्रयोग में नहीं लाया जा सकता। क्यों?

उत्तर : कूपों से निकाला गया खनिज तेल अपरिष्कृत तथा अनेक अशुद्धियों से परिपूर्ण होता है।

प्रश्न 5. अन्य सभी अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की अपेक्षा सौर तापीय। प्रौद्योगिकी अधिक लाभ प्रद है क्यों?

उत्तर : ऊर्जा के अन्य गैर परम्परा गत साधनों की अपेक्षा सौर ऊर्जा उत्पादन में।
कम लागत आती है। सौर ताप हर जगह प्राप्त होती है तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 6. भारत के उत्तरी पश्चिमी प्रदेश की खनिज पट्टी किन खनिजों के लिये प्रसिद्ध है?

उत्तर : तांबा, जिंक, बलुआपत्थर, ग्रेनाइट, संगमरमर जिप्सम आदि।

प्रश्न 7. गेल (GAIL) की स्थापना क्यों की गई?

उत्तर : गेल की स्थापना प्राकृतिक गैस के परिवहन एवं विपणन के लिये की गई।

प्रश्न 8. भारत में कोयला निक्षेप मुख्यतकिन शैल क्रमों में पाया जाता है?

उत्तर : कोयला मुख्यतः 2 भूगर्भिक कालों की शैल क्रमों में पाया जाता है। गोंडवाना और टर्शियरी निक्षेप।

(तीन अंक वाले प्रश्न)

प्रश्न 9, तांबे के दो लाभ बताइए। भारत के चार मुख्य ताँबा क्षेत्रों का उल्लेख करो।

उत्तर : तांबे के लाभ
1) बिजली की मोटरें, ट्रांसफार्मर, जेनरेटर्स आदि के बनाने तथा विद्युत उद्योग के लिए ताँबा अपरिहार्य धातु है।
2) यह एक आघातवर्दनीय तथा तन्य धातु हैं।
3) आभूषणों को मजबूती प्रदान करने के लिए इसे सोने के साथ मिलाया जाता है।

खनन क्षेत्र:- झारखण्ड का सिंहभूमि जिला,
मध्यप्रदेश में बालाघाट
कर्नाटक में चित्रदुर्ग
राजस्थान में झुझुन, अलवर व खेतड़ी जिले।


प्रश्न 10, मैंगनीज के दो लाभ बताओ तथा चार उत्पादक राज्यों का उल्लेख करो।

उत्तर : लाभ :-
1) लौह अयस्क के प्रगलन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
2) इसका उपयोग लौह मिश्र धातु तथा विनिर्माण में भी किया जाता है।

खनन क्षेत्रः- उड़ीसा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश व झारखण्ड।


प्रश्न 11. ‘मुम्बई हाई और ‘सागर सम्राट’ क्यों प्रसिद्ध है ।
या
अपटत वेधन क्या है? भारत से उदाहरण देकर समझाइये ।

उत्तर: समुद्र तट से दूर समुद्र की तली में मौजूद प्राकृतिक तेल को वेधन करके
प्राप्त करना अपतट वेधन है।
खम्बात की खाड़ी के निकट अरब सागर में खनिज तेल के भण्डार प्राप्त हुए हैं। सागर तट से दूर ‘बाम्बे हाई नामक तेल क्षेत्र में ‘सागर सम्राट’ नामक जहाज से खुदाई से 1947 में तेल प्राप्त हुआ। यह क्षेत्र भारत में सबसे अधिक तेल उत्पन्न करता है।

प्रश्न 12: भूतापीय ऊर्जा किसे कहते हैं? इसका क्या महत्व है?

उत्तर : जब पृथ्वी के गर्भ से मैग्मा निकलता है तो अत्याधिक उष्मा निर्युक्त होती है। इसे भूतापीय ऊर्जा कहते हैं। इसे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त गीजर कूपों से निकलते गर्म पानी से ताप ऊर्जा पैदा की जा सकती है। जैसे भारत में हिमाचल प्रदेश के मनीकरण में
भूतापीय ऊर्जा संयंत्र अधिकृत किया जा चुका है।

प्रश्न 13, जैव ऊर्जा, ऊर्जा का संभावित स्रोत है। भारत जैसे विकासशील देश में यह ग्रामीण एवं शहरी जीवन को बेहतर बना सकता है। स्पष्ट कीजिए
या
जैव ऊर्जा की परिभाषा देते हुये इसके लाभ बताइये।

उत्तर : i) जैव ऊर्जा उस ऊर्जा को कहा जाता है जिसे जैविक उत्पादों से प्राप्त किया जाता है। इसमें कृषि अवशेष, सीवेज का अवशेष व औद्योगिक अपशिष्ट शामिल होते हैं।
ii) जैव ऊर्जा पर्यावरण अनुकूल है। यह ग्रामीण जीवन में लोगों की आत्मनिर्भरता को बढ़ाकर उनके आर्थिक जीवन को बेहतर बनाएगा तथा जलाऊ लकड़ी पर निर्भरता को घटाएगां
iii) शहरी क्षेत्रों के विशाल मात्रा में निकलने वाले अपशिष्टों के उचित निपटान की समस्या का समाधान व उनकी ऊर्जा की पूर्ति को सुनिश्चित करेगा।

प्रश्न 14. पवन ऊर्जा पर संक्षिप्त टिप्पणी दो।
अथवा
पवन ऊर्जा पूर्ण रूपेण प्रदूषण मुक्त और ऊर्जा का असमाप्य स्रोत है। इसकी भारत में अपार संभावनाएँ है। स्पष्ट करो।

उत्तर : पवन:- ऊर्जा प्रदूषण मुक्त ऊर्जा का असमाप्य स्रोत है। पवन की गतिज ऊर्जा को टरबाइन के माध्यम से विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। संभावित पवनों व पछुआ पवनों जैसे स्थायी पवन प्रणालियाँ तथा मानसून पवनों को ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। भारत में पवन ऊर्जा के लिए राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में अनुकूल परिस्थिति विद्यमान हैं।

गुजरात के कच्छ में लाम्बा का पवन ऊर्जा संयंत्र एशिया का सबसे बड़ा संयंत्र है। तमिलनाडु के तूतिकोरिन में भी पवन ऊर्जा का एक अन्य संयंत्र है।

प्रश्न 16. नाभिकीय ऊर्जा के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले खनिज कौन से हैं। भारत में ये कहाँ पाये जाते हैं?

उत्तर : नाभिकीय ऊर्जा के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले महत्वपूर्ण खनिज यूरेनियम और थोरियम है। यूरेनियम निक्षेप धारवाड़ शैलों में पाये जाते हैं । राजस्थान के उदयपुर, अलवर, , मध्य प्रदेश के दुर्ग तथा महाराष्ट्र के भंडारा जिलों में यूरेनियम पाया जाता है । थोरियम केरल के तटीय क्षेत्र की बालू में मोनाजाइट और इल्मेनाइट से प्राप्त किया जाता है । मोनाजाइट निक्षेप केरल के पालाक्कड़ तथा कोलाम जिलों आन्ध्रप्रदेश के विशाखापटनम् तथा महानन्दी के डेल्टा में भी पाये जाते हैं।


प्रश्न 17. भारत में पाए जाने वाले खनिजों की तीन विशेषताओं का वन कीजिए?

उत्तर : भारत में पाए जाने वाली खनिजों की विशेषताए:-
1) खनिजअसमान रूप में वितरित होते हैं। सब जगह सभी खनिज नही मिलते ।
2) अधिक गुणवत्ता वाले खनिज, कम गुणवत्ता वाले खनिजों की तुलना में कम मात्रा में पाए जाते हैं। खनिजों की गुणवत्ता व
मात्रा में प्रतिलोमी संबंध पाया जाता है ।
3) सभी खनिज समय के साथ समाप्त हो जाते हैं। भूगार्मिक दृष्टि से इन्हें बनने में लम्बा समय लगता है और आवश्यकता
के समय इनका तुरन्त पुनर्भरण नहीं किया जा सकता है।’

प्रश्न 18. भारत में खनिज तथा ऊर्जा संसाधनों के असमान वितरण का वर्णन उपयुक्त उदाहरण देकर कीजिए।

उत्तर (i) भारत में अधिकांश धात्विक खनिज प्रायद्वीपीय पठारी क्षेत्र की प्राचीन क्रिस्टलीय शैलों में पाए जाते है।
(ii) कोयले का लगभग 97.10 भाग दामोदर, सोन, मदानदी और गोदावरी नदियों की घाटियों में पाया जाता है।
(iii) पैट्रोलियम के आरक्षित भंडार असम, गुजरात तथा मुंबई हाई में पाए जाते है। नए आरक्षित क्षेत्र कृष्णा – गोदावरी तथा कावेरी वेसिनों में पाए गए है।


प्रश्न 19, रासायिक और भौतिक गुणों के आधार पर खनिजों को दो वर्षों में वर्गीकत कीजिए तथा प्रत्येक वर्ग के खनिज का एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: रासायनिक व भौतिक गुणों के आधार पर खनिज दो प्रकार के होते है
(i) धात्विक खनिज:-लौह अयस्क, तांबा व सोना, मैंगनीज और वाक्साइट आदि धातु से प्राप्त होते है, इन्हें धात्विक खनिज कहते हैं
(ii) अधात्विक खनिज:- ये खनिज दो प्रकार के होते है। इनमें कुछ खनिज, कार्बनिक उत्पति के होते हैं, जैसे जीवाश्म ईधन जिन्हें खनिज ईधन भी कहते है जैसे कोयला और पैट्रोलियम। अन्य अकार्बनिक उत्पति के खनिज होते है। जैसे अभ्रक, चूना पत्थर और ग्रेफाइट आदि।

भारत में खनिज की पेटियो निम्नलिखित है:-
1) उतर पूर्वी पठारी पट्टी
2) दक्षिण पश्चिमी पठारी पट्टी
3) उत्तरी पश्चिमी पट्टी

प्रश्न 20. अलौह खनिजों के नाम बताइए बाक्साइट के वितरण की चार बिन्दुओं में विवेचना कीजिए।

उत्तर: बॉक्साइट का वितरण:-
(i) बॉक्साइट मुख्यतः टर्शियरी निक्षेपों में पाया जाता है। यह विस्तृत रूप से प्रायद्वीपीय भारत के पठारी क्षेत्रों अथवा पर्वत श्रेणियों के साथ-साथ देश के तटीय भागों में भी पाया जाता है।
(ii) उड़ीसा बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक है। कालाहांडी तथा संभलपूर अग्रणी उत्पादक है।
(iii) झारखंड में लोहारडागा जिने की पैटलैंडस में भी इसके समृद्ध निक्षेप है।
गुजरात के भावनगर और जामनगर, छत्तीसगढ़ में अमरकंटक के पठार, मध्यप्रदेश में कटनी, महाराष्ट्र में कोलाबा, थाणे, कोतहापुर महत्वपूर्ण उत्पादक है।

प्रश्न 21 . भारत में खनिजों की तीन प्रमुख विस्तृत पट्टियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: 1) उतर पूर्वी पठारी पट्टी इस पट्टी के अंतर्गत छोटा, नागपुर पठार झारखंड उड़ीसा का पठार, पं. बंगाल तथा छत्तीसगढ़ के कछ भाग सम्मिलित है। यहां पर विभिन्न प्रकार के खनिज उपलब्ध है। इनमें लोह अयस्क, कोयला मैंगनीज आदि प्रमुख है।
2) दक्षिणी परिचमी पठारी पट्टी-यह पट्टी कर्नाटक, गोआ. तमिलनाडु की उच्च भूमि और केरल में विस्तृत है। यह पट्टी लौह धातुओं तथा बॉक्साइट में समृद्ध है।
3) उत्तर पश्चिमी पट्टी-यह पटटी राजस्थान में अरावली और गुजराज के कुछ भाग पर विस्तृत है। यहां खनिज धारवाड़ क्रम की शैलों में पाये जाते है जिनमें तांबा, जिंक, आदि प्रमुख खनिज है। गुजरात में पेट्रोलियम के निक्षेप है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 22. भारत में खनिजों का संरक्षण क्यों आवश्यक है? हम उनका संरक्षण किस प्रकार कर सकते हैं।

उतर:- खनिज समय के साथ समाप्त हो जाते हैं। भूगर्मिक दृष्टि से इन्हें बनने में
लम्बा समय लगता है और आवश्यकता के समय तुरन्त इनका पुनर्भरण नहीं किया जा सकता। इसलिए सतत् पोषणीय विकास तथा आर्थिक विकास के लिए खनिजों का संरक्षण करना आवश्यक हो जाता है।

संरक्षण की विधियाँ:-
1) इसके लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, पवनतरंग व भूतापीय ऊर्जा के असमाप्य स्रोतों का प्रयोग करना चाहिए।
2) धात्विक खनिजों में, छाजन धातुओं के उपयोग तथा धातुओं के पुर्नचक्रण पर बल देना चाहिए।
3) अत्यल्प खनिजों के लिए प्रति स्थापनों का उपयोग भी खनिजी के संरक्षण में सहायक है।
4) सामरिक व अति अल्प खनिजों के निर्यात को भी घटाना चाहिए
5) सबसे उचित तरीका है खनिजों का सूझ-बूझ से तथा मितव्यतता है। प्रयोग कराना है ताकि वर्तमान आरक्षित भण्डारों का लंबे समय तक प्रयोग किया जा सके।

प्रश्न 23. सतत पोषणीय विकास की चुनौती के लिए आर्थिक विकास की चाह का पर्यावरणीय मुद्दों से समन्वय आवश्यक हैं। इन कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर : i) भारत में संसाधनों के उपयोग के परंपरागत तरीकों के कारण बड़ी मात्रा में संसाधनों का अपव्यय हुआ है। अतः विकास को न रोकते हुये ऊर्जा के गैर परंपरागत साधनों का उपयोग हो।
ii) भारत में संसाधनों के वर्तमान उपयोग ने गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया है। जीवाश्म इंधनों का उपयोग सीमित हो । प्रदूषण से निपटने के उपाय अपनाये जायें।
iii) संसाधनों के अतिशोषण व अविवेक पूर्ण उपयोग ने समाज में असमानता व तनाव को बढ़ाया है। संसाधनों को बचाया जाय।
iv) पोषणीय विकास भावी पीढ़ी के लिए संसाधनों के संरक्षण का संतत आहवान करता है।
v) सतत पोषणीय विकास के लिए आर्थिक विकास के तरीकों व पर्यावरण की सुरक्षा के मुद्दों के साथ समन्वय आवश्यक है। धात्विक खनिजों का पुनर्चक्रण हो। खनिजों के स्थानापन्न वस्तुओं का उपयोग हो।


प्रश्न 24. भारत में खनिजों का संरक्षण क्यों आवश्यक है? हम उनका संरक्षण किस प्रकार कर सकते है? दो बिदुओं में व्यख्या कीजिए।

उत्तरः खनिज समय के साथ समाप्त हो जाते हैं। भूगर्मिक दृष्टि से इन्हें बनने में लम्बा समय लगता है और आवश्यकता के समय इनका तुरंत पुनर्भरण नहीं किया जा सकता है। इसलिए इनका संरक्षण अति आवश्यक है।

(i) अति अल्प धात्विक खनिजों के स्थान पर प्रतिस्थापकों का उपयोग खनिजों की पूर्ति को घटा सकता है।
(ii) धात्विक खनिजों का पुनर्चकण (Regycling) करके तथा छाजन धाताओं का उपयोग करके खनिज धातुओं को संरक्षित कर सकते हैं। सामरिक और अति अल्प खनिजों का निर्यात घटाकर उनके भंडारो को भविष्य के लिए किया सुरक्षित जा सकता है।
(iii) सामरिक और के अति अल्प खनिजों निर्यात घटाकर उनके भंडारों को भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा सकता है।


प्रश्न 25, भारत में अपरंपरागत ऊर्जा के पांच स्त्रोतो के नाम बताइए और प्रत्येक स्त्रोत का एक संभावित क्षेत्र भी बताइए।

उतर: अपरम्परागत ऊर्जा स्त्रांत:-
(i) सौर ऊर्जा (ii) पवन ऊर्जा (iii) ज्वारीय ऊर्जा (iv) भूतापीय ऊर्जा (v) जैव ऊर्जा

प्रत्येक स्त्रोत का एक संभावित क्षेत्र:-
(i) सौर ऊर्जा – भारत के पश्चिमी भागों गुजरात व राजस्थान में और ऊर्जा के विकास की अधिक संभावनाएं है।
(ii) पवन ऊर्जा पवन ऊर्जा के लिए राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तथा कर्नाटक में अनुकूल परिस्थितियां विद्यमान है।
(iii) ज्वारीय ऊर्जा – भारत के पश्चिमी तट के साथ ज्वारीय ऊर्जा विकसित होने की व्यापक संभावनाएं है।
(iv) भूतापीय ऊर्जा – इसके लिए हिमालय प्रदेश में विकसित होने की व्यापक संभावनाएं है।
(v) जैव ऊर्जा – ग्रामीण क्षेत्रों में जैव ऊर्जा विकसित होने की व्यापक संभावनाएं है।


प्रश्न 26‘ऊर्जा के अपरंपरागत स्त्रोत अधिक आरंभिक लागत के बावजूद अधिक टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल तथा सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराते है”। कथन की जाँच कीजिए।

उतर: • सौर, पवन, जल, भूतापीय ऊर्जा तथा जैव ऊर्जा के अपरंपरागत स्त्रोत है। ये सभी साधन पर्यावरण अनुकूल है।
• ये समान रूप से वितरित है।
• ये अधिक आरंभिक लागत से प्रभावित होते है।
• ये साधन पारिस्थतिक-अनुकूल होते है।
• पवन ऊर्जा पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त है।
• महासागरीय धाराएं ऊर्जा का अपरिमित भंडार गृह है।
• जैव ऊर्जा ग्रामीण लोगो की आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा तथा जलाऊ । लकड़ी पर दबाव कम करेगा।

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