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class 10 geography chapter 5 solution hindi

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अध्याय – 5
खनिज और ऊर्जा संसाधन

महत्वपूर्ण घटनायें । तथ्य :-
1. खनिज – हमारे जीवन का अति अनिवार्य भाग। सभी वस्तुओं का निर्माण खनिजों द्वारा होता है। एक कार्बनिक पदार्थ जिसमें कठोरता, रंग और निश्चित आकार होता है।

2. लिग्नाइट – निम्न कोटि का भूरा मुलायम कोयला।

3. अयस्क – लोहा, मैंगनीज, अभ्रक जैसे खनिज के अंशों का मिश्रित रूप। खनिज अयस्कों में पाये जाते हैं। जो कि विभिन्न में अशुद्धियों के साथ प्राकृतिक अवस्था में होते हैं।

4. हेमेटाइट – उद्योगों में प्रयोग होने वाला सर्वाधिक महत्वपूर्ण लोहा जिसमें 50-60 प्रतिशत लौह अंश होता है।

5. मैग्नेटाइट – उच्च कोटि का लौह अयस्क जिसमें 70 प्रतिशत लौह अंश होता है।

6. पेट्रोलियम – अशुद्ध या कच्चा खनिज तेल।।

7. खनन – उपयोगी खनिज पदार्थो के निष्कर्षण का काम।

8. लौह खनिज – जिन खनिजों में लौह अंश होता है जैसे लोहा, मैंगनीज़ आदि।

9. मुंबई हाई- मुंबई से 115 कि.मी. दूर अरब सागर में उथला समुद्री तेल क्षेत्र।

10. आणविक शक्ति – अणु के विखंडन से प्राप्त ऊर्जा।

11. आणविक खनिज – परमाणु ऊर्जा को धारण करने वाले पदार्थ जैसे यूरेनियम, थोरियम तथा बैरिलियम।

12. बॉयो गैस – ऊर्जा जो घास फूस, कृषि कचरा, जानवर तथा मानव अपशिष्ट पदार्थो से प्राप्त की जाती है।

13. धात्विक खनिज – वे खनिज जिनमें धातु का अंश अधिक होता है जैसे लौह अयस्क, बॉक्साइट।

14. अधात्विक खनिज – वे खनिज जिनमें धातु का अंश नहीं होता है जैसे चूना पत्थर, पोटाश आदि।

15. भूगर्भशास्त्री – वे वैज्ञानिक जो चट्टानों की प्रकृति और उनके निर्माण का अध्ययन करते हैं।

भारत में विभिन्न खनिज उत्पादन करने वाले क्षेत्रों का विवरण :-

* खनिज का नाम * उत्पादन करने वाले क्षेत्र
लौह अयस्क — छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा,
गोआ और कर्नाटक।

मैंगनीज़ — कर्नाटक, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र
और गोआ आदि।

एल्यूमिनियम (बॉक्साइट) — मध्य प्रदेश, गुजरात,
तमिलनाडु, छत्तीसगढ़।

अभ्रक — झारखंड, बिहार, आन्ध्र प्रदेश, राजस्थान
आदि।

ताँबा — मध्यप्रदेश, झारखण्ड, राजस्थान, कर्नाटक,
आन्ध्र प्रदेश

सोना — कर्नाटक और बिहार आदि।

कोयला — झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र आदि।

खनिज तेल — मुंबई हाई, असम, गुजरात, अरूणाचल प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु।

1 अंक वाले प्रश्न



1. अवसादी चट्टानों में खनिज कहाँ पाये जाते हैं ?

उत्तर :- अवसादी चट्टानों में खनिज परतों या संस्तरों में पाये जाते हैं।


2. लौह अयस्क की सर्वोत्तम किस्म कौन सी है?

उत्तर :- मैग्नेटाइट, 70 प्रतिशत लोहांश पाया जाता है।


3. मैंगनीज का उपयोग क्या क्या बनाने में किया जाता है?

उत्तर :- इस्पात, ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक दवाएँ और पेंट बनाने में।


4. चूना पत्थर किस उद्योग का आधारभूत कच्चा माल है?

उत्तर :- सीमेंट उद्योग।


5. मोनाजाइट रेत में कौन सा खनिज पाया जाता है?

उत्तर :- थोरियम।


6. ऊर्जा के गैर परंपरागत साधन कौन-कौन से हैं?

उत्तर :- पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा।


7. भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थित है ?

उत्तर :- भुज के निकट माधोपुर में (गुजरात)।


8. भारत में भू-तापीय ऊर्जा की दो परियोजनाएँ कहाँ शुरू की गई हैं ?

उत्तर :- हिमाचल प्रदेश के मणिकरण पार्वती घाटी में तथा लद्दाख में पूगा घाटी में।

9. रैट होल खनन क्या है?

उत्तर :- जोबाई तथा चेरापूंजी में कोयले का खनन, परिवार के सदस्यों द्वारा एक लंबी संकीर्ण सुरंग के रूप में किया जाता है।


10. मुंबई हाई किसलिए प्रसिद्ध है?

उत्तर :- भारत का सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र है। 63 प्रतिशत।


11. कौन सा खनिज सबसे कठोर होता है?

उत्तर :- हीरा सबसे कठोर होता है।


12. कौन सा खनिज प्रायः महासागरीय जल से प्राप्त किया जाता है ?

उत्तर :- मैग्नीशियम, नमक तथा ब्रोमाइन।


13. उस खनिज का नाम बताइए जिसका भारत विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक है?

उत्तर :- अभ्रक।


14. ताँबे का महत्त्व या उपयोग बताइए?

उत्तर :- घात वर्ध्य, तन्य व ताप सुचालक। बिजली के तार बनाने, रसायन उद्योग और इलैक्ट्रॉनिक्स में।


15. उच्चकोटि के कोयले का नाम बताइए?

उत्तर :- एंथ्रेसाइट।


16. भारत में सबसे बड़ी पवन ऊर्जा पेटी कहाँ अवस्थित है?

उत्तर :- नागरकोइल (तमिलनाडु) और जैसलमेर (राजस्थान) में।

लघु । दीर्घ प्रश्न (315 अंक वाले प्रश्न)

1. खनिजों का हमारे लिए क्या महत्व है?

उत्तर :- दैनिक जीवन में काम आने वाली छोटी से छोटी चीज़ सुई से लेकर जहाज तक खनिजों से बनाए जाते हैं। इमारतें, पुल तक खनिजों से बनाए जाते हैं। भोजन में भी खनिज होते हैं।
मशीनें और औज़ार खनिजों से बनते हैं।
परिवहन के साधन, बर्तन आदि खनिजों से ही बनाए जाते हैं।


2. खनिज कितने प्रकार के होते हैं तथा उनका वर्गीकरण किस आधार पर किया जाता है?

उत्तर :- खनिज 3 प्रकार के होते हैं।
1) धात्विक 2) अधात्विक 3) ऊर्जा खनिज
खनिजों का वर्गीकरण उनके रंग, चमक, कठोरता, घनत्व तथा क्रिस्टल के आधार पर किया जाता है।


3. आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता

उत्तर :- आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं। छोटे जमाव श्रािओं के रूप में तथा बड़े जमाव परत के रूप में पाए जाते हैं। जब ये तरल या गैसीय अवस्था में दरारों के सहारों से भू पृष्ट की ओर धकेले जाते हैं। तब ऊपर आते हुए ये ठंडे होकर जम जाते हैं। मुख्य धात्विक खनिज जैसे जस्ता, तांबा, जिंक और सीसा आदि इसके उदाहरण हैं।


4. लौह और अलौह खनिज में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :- * लौह खनिज.
1) जिनमें लोहे का अंश होता है।
2) लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल और कोबाल्ट आदि।

* अलौह खनिज
1) जिनमें लोहे का अंश नहीं होता है।
2) तांबा, सीसा, जस्ता और बॉक्साइट।

5. भारत में लौह अयस्क की तीन प्रमुख पेटियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर :- उड़ीसा – झारखण्ड पेटी
महाराष्ट्र – गोआ पेटी
बेलारी – चित्रदुर्ग, चिकमंगलूर – तुमकुर पेटी
दुर्ग – बस्तर-चन्द्रपुर पेटी

6. अभ्रक किस रूप में पाया जाता है ? भारत में इसके निक्षेपों के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए? अभ्रक के मुख्य उपयोग क्या हैं ?

उत्तर :- अभ्रक प्लेटों या परतों के रूप में पाया जाता है। अभ्रक के निक्षेप-
* छोटा नागपुर पठार के उत्तरी पठारी किनारों पर।
* बिहार-झारखण्ड की कोडरमा-गया-हज़ारीबाग पेटी।
* राजस्थान में अजमेर के पास।
* आंध्र प्रदेश की नेल्लोर पेटी।

अभ्रक, विद्युत और इलेक्ट्रानिक उद्योगों में प्रयोग किया जाता है।

7. भारत में गैस परिवहन की धमनी कही जाने वाली पाइपलाइन का नाम लिखिए। प्राकृतिक गैस के दो प्रमुख प्रयोक्ताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर :- 1700 कि.मी. लंबी हजीरा विजयपुर- जगदीशपुर गैस पाइपलाइन मुबई हाई और बसीन को पश्चिमी व उत्तरी भारत के उर्वरक, विद्युत
व अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ती है। ऊर्जा व उर्वरक उद्योग प्राकृतिक गैस के प्रमुख प्रयोक्ता हैं। तरल ईंधन (सीएनजी) संपीडित प्राकृतिक गैस का प्रयोग गाड़ियों में किया जा रहा है


8. भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है, क्यों?

उत्तर :- * भारत एक उष्ण-कटिबंधीय देश है।
* यह प्रदूषण रहित ऊर्जा संसाधन है।
* यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
* निम्नवर्ग के लोग आसानी से इसका लाभ उठा सकते हैं।


9. तापीय और जल विद्युत ऊर्जा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :- * तापीय विद्युत
i) यह विद्युत कोयले, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के प्रयोग से पैदा की जाती है।
ii) यह प्रदूषण युक्त है।
iii) स्थायी स्रोत नहीं है।
iv) अनवीकरणीय स्रोतों पर आधारित है।
v) भारत में 310 से अधिक ताप विद्युत के केन्द्र हैं।
जैसे- तलचेर, पांकी, नामरूप, उरन, नवेली आदि।

* जल विद्युत ऊर्जा
i) जल विद्युत ऊर्जा गिरते हुए जल की शक्ति का प्रयोग करके टरबाइन को चलाने से होता है।
ii) यह प्रदूषण रहित है।
iii) स्थायी स्रोत है।
iv) जल जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर आधारित है।
v) भारत में अनेक बहुउद्धेश्यीय परियोजनायें हैं।
जैसे- भाखड़ा नॉगल दामोदर घाटी कोपली आदि।

10. मुंबई हाई क्यों प्रसिद्ध है ? देश की अर्थव्यवस्था में उसका क्या स्थान

उत्तर :- मुम्बई के पास खनिज तेल के जिस अपतटीय क्षेत्र का पता चला है उसे मुंबई हाई कहते हैं।
भारत में कुल पेट्रोलियम उत्पादन का 63 प्रतिशत भाग मुंबई हाई से प्राप्त होता है। विदेशी मुद्रा की बचत होती है।


11. खनन उद्योग को घातक उद्योग क्यों कहा जाता है ?

उत्तर :- इस उद्योग से श्रमिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बहुत खराब प्रभाव पड़ता है।
* लगातार धूल व हानिकारक धुएँ में सांस लेना पड़ता है।
* श्रमिकों को फेफड़ों से संबंधित बीमारियाँ हो जाती हैं।
* खदानों में पानी भर जाने या आग लग जाने से श्रमिकों में डर बना रहता है।
* कई वार खदानों की छत के गिर जाने से उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ती है।
* खनन के कारण नदियों का जल प्रदूषित हो जाता है।
* भूमि और मिट्टी का अपक्षय होता है।

12. हम ऊर्जा का संरक्षण किस प्रकार कर सकते हैं?

उत्तर :- 1) जरूरत न होने पर बिजली बन्द कर देनी चाहिए।
2) सार्वजनिक वाहन का उपयोग करना चाहिए।
3) परंपरागत ऊर्जा के स्रोत सीमित हैं। इनका प्रयोग बड़े ध्यान से करना चाहिए।
4) नवीकरणीय साधनों का प्रयोग करना चाहिए।
5) विद्युत बचत करने वाले उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए।
6) कार – पूलिंग।


13. हमें खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है ? इसके संरक्षण के उपाय बताइए?

उत्तर :- * खनिज हमारे उद्योग और कृषि के आधार हैं।
* नवीकरण योग्य नहीं है।
* निक्षेपों की कुल मात्रा बहुत ही कम है।
* इनके निर्माण में लाखों वर्ष लग जाते हैं।
* हम बहुत तेजी से खनिजों का उपयोग कर रहे है।
* इन्हें आने वाली पीढ़ी के लिए सम्भाल कर रखना चाहिए।

संरक्षण के उपाय
* खनन एवं परिष्करण के दौरान इन पदार्थो की बर्बादी कम हो।
* जहाँ तक सम्भव हो प्लास्टिक (प्रमाणित) और लकड़ी का प्रयोग करें।
* रद्दी एवं पुराने माल का पुनः प्रयोग करना चाहिए।
* धातुओं का पुनः चक्रण व अन्य विकल्प ढूढना।
* नियोजित व सतत् पोषणीय तरीके से उपयोग।

प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अवशिष्ट भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है?
(क) कोयला
(ख) बॉक्साइट
(ग) सोना
(घ) जस्ता

(ii) झारखंड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित में से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?
(क) बॉक्साइट
(ख) अभ्रक
(ग) लौह अयस्क
(घ) ताँबा

(iii) निम्नलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?
(क) तलछटी चट्टानें
(ख) आग्नेय चट्टानें
(ग) कायांतरित चट्टानें ।
(घ) इनमें से कोई नहीं।

(iv) मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज पाया जाता है?
(क) खनिज तेल
(ख) यूरेनियम
(ग) थोरियम
(घ) कोयला।

उत्तर :- (i) ख, (ti) ख, (iii) क, (iv) ग।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
(i) निम्नलिखित में अंतर 30 शब्दों में बताएं
(क) लौह और अलौह खनिज
(ख) परंपरागत तथा गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधन

उत्तर :- (क) लौह और अलौह खनिज-वे खनिज जिनमें लोहे का अंश अधिक होता है, लौह खनिज कहलाते हैं। जैसे-लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल व कोबाल्ट आदि। जिन खनिजों में लोहे का अंश नहीं होता या बहुत कम होता है अलौह खनिज कहलाते हैं। जैसे–सोना, चाँदी, प्लेटिनम आदि।

(ख) परंपरागत और गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधन-कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस से उत्पन्न की गई ताप विद्युत, जल विद्युत और परमाणु शक्ति आदि ऊर्जा के परंपरागत साधन हैं। इन साधनों का नवीकरण नहीं किया जा सकता। ये स्रोत सीमित तथा लगातार प्रयोग से समाप्त होने के कगार पर हैं। सूर्य, वायु, ज्वार भाटे, जयोथर्मिल, बायो गैस, खेतों और पशुओं का कूड़ा-करकट, मनुष्य को मलमूत्र आदि ऊर्जा के गैर परंपरागत साधन हैं। ये साधन नवीकरण योग्य हैं। इनका बार-बार प्रयोग किया जा सकता है।


(ii) खनिज क्या हैं?

उत्तर :- खनिज उन प्राकृतिक साधनों को कहते हैं जो शैलों से प्राप्त होते हैं। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना है। खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं जिसमें कठोर, ठोस एवं नरम चूना तक शामिल है।


(iii) आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर :- आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विवरों में मिलते हैं। छोटे जमाव शिराओं के रूप में और वृहत् जमाव परत के रूप में पाए जाते हैं। इनका निर्माण भी अधिकतर उस समय होता है जब ये तरल अथवा • गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेले जाते हैं। ऊपर आते हुए ये ठंडे होकर जम जाते हैं। मुख्य धात्विक खनिज जैसे–जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा आदि इसी तरह शिराओं व जमावों के रूप में प्राप्त होते हैं।


(iv) हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है?

उत्तर :- वर्तमान औद्योगिक युग में विभिन्न प्रकार के खनिजों का भारी प्रयोग किया जाने लगा है। खनिज निर्माण की भूगर्भिक प्रक्रियाएँ इतनी धीमी हैं कि उनके वर्तमान उपभोग की दर की तुलना में उनके पुनर्भरण की दर अपरिमित रूप से थोड़ी है। इसलिए खनिज संसाधन सीमित तथा अनवीकरण योग्य है। समृद्ध खनिज निक्षेप हमारे देश की मूल्यवान संपत्ति हैं लेकिन ये अल्पजीवी हैं। अयस्कों के सतत् उत्खनन की गहराई बढ़ने के साथ उनकी गुणवत्ता घटती जाती है। इसलिए खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए खनिजों का सुनियोजित एवं सतत् पोषणीय ढंग से प्रयोग करना होगा।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) भारत में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर :- मानव के विकास में कोयले का विशेष महत्त्व है। कोयले के चार प्रकार हैं
1. पीट-इसमें कम कार्बन, नमी की अधिक मात्रा व निम्न ताप क्षमता होती है।
2. लिग्नाइट-यह निम्न कोटि का भूरा कोयला होता है। यह मुलायम होने के साथ अधिक नमीयुक्त होता है।
3. बिटुमिनस-गहराई में दबे तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयले को बिटुमिनस कोयला कहा जाता है।
4. एंथेसाइट-यह सबसे उत्तम प्रकार का कोयला होता है जिसमें कार्बन की मात्रा 80 प्रतिशत से अधिक होती है। यह ठोस काला व कठोर होता है।
कोयले के भारत में विस्तृत भंडार हैं। भारत में कोयला दो प्रमुख भूगर्भिक युगों के शैल क्रम में पाया जाता है। एक गोंडवाना जिसकी आयु 200 लाख वर्ष से कुछ अधिक हैं और दूसरा टरशियरी निक्षेप जो लगभग 55 लाख वर्ष पुराने हैं। गोंडवाना कोयले, जो धातुशोधन कोयलें हैं, के प्रमुख संसाधन दामोदर घाटी (प० बंगाल तथा झारखंड), झरिया, रानीगंज, बोकारो में स्थित है जो महत्त्वपूर्ण कोयला क्षेत्र हैं। गोदावरी, महानदी, सोन व वर्धा नदी घाटियों में भी कोयले के जमाव पाए जाते हैं। टरशियरी कोयला क्षेत्र उत्तर-पूर्वी राज्यों मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड में पाया जाता है। 1997-98 में भारत में कोई 32 करोड़ टन कोयले का उत्पादन हुआ जबकि 1951 ई० में केवल 3.23 करोड़ टन कोयले का उत्पादन हुआ था। भारत में उत्पादित होने वाले कोयले का दो-तिहाई से भी अधिक भाग बिजली पैदा करने के काम आता है।


(ii) भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों?

उत्तर :- भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य बहुत उज्ज्वल है जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
1. भारत एक उष्ण कटिबंधीय देश है। यहाँ सौर ऊर्जा के दोहन की असीम संभावनाएँ हैं। एक अनुमान के अनुसार यह लगभग 20 मेगावाट प्रति वर्ग किलामीटर प्रति वर्ष है।
2. भारत में फोटोवोल्टाइक तकनीक द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है।
3. भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र भुज के निकट माधोपुर में स्थित है, जहाँ सौर ऊर्जा से दूध के बड़े बर्तनों को कीटाणुमुक्त किया जाता है।
4. सूर्य का प्रकाश प्रकृति का मुफ्त उपहार है। इसलिए निम्न वर्ग के लोग आसानी से सौर ऊर्जा का लाभ उठा | सकते हैं।
5. कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि ऊर्जा के ऐसे स्रोत हैं जो एक बार प्रयोग के बाद दोबारा प्रयोग में नहीं लाए जा सकते, वहीं सौर ऊर्जा नवीकरणीय संसाधन हैं। इसे बार-बार प्रयोग में लाया जा सकता है।
6. ऐसी अपेक्षा है कि सौर ऊर्जा के प्रयोग से घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सकेगा। फलस्वरूप यह पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा और कृषि में भी खाद्य की पर्याप्त आपूर्ति होगी।
7. सौर ऊर्जा का प्रयोग हम अनेक प्रकार से कर सकते हैं। जैसे-खाना बनाने, पंप द्वारा जल निकालने, पानी को गरम करने, दूध को कीटाणु रहित बनाने तथा सड़कों पर रोशनी करने आदि के लिए।

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