अध्याय -3
मुद्रा व साख
याद रखने योग्य बातें :-
1. वस्तुओं के बदले वस्तुओं का लेन-देन वस्तु विनिमय प्रणाली कहलाता है।
2. मुद्रा के आविष्कार से वस्तु विनिमय प्रणाली की सबसे बड़ी कठिनाई “आवश्यकताओं का दोहरा संयोग” का समाधान संभव हुआ।
3. जब एक व्यक्ति किसी चीज को बेचने की इच्छा रखता हो, वही वस्तु दूसरा व्यक्ति भी बरीदने की इच्छा रखता हो अर्थात् मुद्रा का उपयोग किये बिना, तो उसे आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहा जाता है।
4. कागजी मुद्रा, कागज़ के उपयोग से बने विभिन्न प्रकार के अंकित मूल्य के नोटों से है।
5. सोना, चाँदी, निकल, तौबा आदि किसी भी धातु के उपयोग से बनी मुद्रा को धात्विक मुद्रा कहते हैं।
6. विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का कार्य करने के कारण, मुद्राको विनिमय का माध्यम कहा जाता है।
7. मुद्रा विनियम के माध्यम के रूप में तभी मान्य होती है जब उस देश की सरकार उसे इस कार्य के लिए प्राधिकृत करती है व कानूनी मान्यता प्रदान करती है।
8. भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया केन्द्रीय सरकार की ओर से विभिन्न मूल्यों के करेंसी नोट जारी करता है।
9. उधार देने या निवेश करने के ध्येय से जनता के मांगने पर या चैक आदि के माध्यम से राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय जमाएं स्वीकार करने को बैंकिंग
कहते हैं।
10. बैंक, सहकारी समितियों आदि ऋण के औपचारिक स्रोत हैं।
11. अनौपचारिक ऋण में साहूकार, दोस्त, रिश्तेदारों आदि से लिया गया ऋण आता है।
12. समर्थक ऋणाधार – ऐसी सम्पत्ति है, जिसका मालिक कर्जदार है और वह इस सम्पत्ति का उपयोग उधारदाता को गारन्टी प्रदान करने के लिए करता है
13. समर्थक ऋणाधार के उदाहरण – कृषि भूमि, इमारतें, गाडी, पशु, मकान,bजेवर, बैंको में जमा माँग आदि हितों की रक्षा के लिए, अपनी जरूरतों
को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर होते है।
14. वांग्लादेश का ग्रामीण बैंक स्वयं सहायता समूह का एक सफल उदाहरण।
15. प्रामीण बैंक के संस्थापक व 2006 में नोबल पुरूस्कार विजेता मोहम्मद युनूस। उचित शर्तों के साथ ऋण उपलब्ध करवाया जाए तो, लाखों छोटे
लोग अपनी लाखों छोटी बड़ी गतिविधियों के जरिये विकास का बड़ा चमत्कार कर सकते है।
16. चेक एक ऐसा कागज है जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चैक पर लिखे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को एक खास रकम का भुगतान करने का आदेश देता है।
1 अंक वाले संभावित प्रश्न
1. मुद्रा के आविष्कार से ‘वस्तु विनिमय प्रणाली’ की किस कठिनाई का समाधान हुआ?
उत्तर :- “आवश्यकताओं के दोहरे संयोग” की।
2. मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहा जाता है?
उत्तर :- क्योकि यह विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का कार्य करती है।
3. बैंक अपने पास कितना नकद कोष रखते हैं?
उत्तर :- कुल राशि का 15 प्रतिशत।
4. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विनिमय के लिए कौन सी करेंसी का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :- डॉलर का
5. विनिमय के रूप में कोई मुद्रा कब मान्य होती है ?
उत्तर :- जब उस देश की सरकार उसे इस कार्य के लिए प्राधिकृत करती है।
6. अनौपचारिक ऋण किन स्रोतों से प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर :- महाजन, दोस्त, रिश्तेदारों आदि से।
7. बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक किसका उदाहरण है?
उत्तर :- स्वयं सहायता समूह का।
8. अनौपचारिक स्रोतों से प्राप्त ऋण अधिक महँगा क्यों होता है?
उत्तर :- क्योंकि व्याज की दर ज्यादा होती है।
9. आत्मनिर्भर समूहों में बचत व ऋण संबंधित निर्णय कोन लेता है?
उत्तर :- समूह के सदस्य।
10. सिक्कों के प्रयोग से पहले, कौन सी वस्तु मुद्रा के रूप में प्रयोग की जाती थी?
उत्तर :- अनाज
3/5 अंक वाले प्रश्न
1. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, क्या क्या कार्य करता है?
उत्तर :- * सरकार की ओर से मुद्रा जारी करता है।
* बैंको व समितियों की कार्य प्रणाली पर नज़र रखता है।
* ब्याज की दरों व ऋण की शर्तों पर निगरानी रखता है।
* बैंक कितना नकद शेष अपने पास रखे हुए हैं इसकी सूचना रखता है।
* ऋण किस प्रकार वितरित किये जा रहे हैं इस पर नज़र रखता है।
2. समर्थक ऋणाधार क्या है? उदाहरण सहित बताओ।
उत्तर :- उधार दाता, उधार प्राप्तकर्ता से समर्थक ऋणाधार के रूप में ऐसी परिसम्पतियों की मांग करता है जिन्हें बेचकर वह अपनी ऋण राशि की
वसूली कर सके। ये परिसम्पत्तियाँ ही समर्थक ऋणाधार कहलाती है। उदाहरण :- कृषि भूमि, जेवर, मकान, पशुधन, बैंक जमा आदि।
3. साब के औपचारिक व अनौपचारिक क्षेत्र की विशेषताएँ बताइये।
उत्तर :- साख के औपचारिक क्षेत्र
1) बैंक, सहकारी समितियों
2) पूर्व निश्चित ब्याज दर
3) उधार लेने वाले का शोषण नहीं
4) ऋण वापसी के लिए अनावश्यक दबाव नहीं।
अनौपचारिक क्षेत्र
1) महाजन, साहुकार, रिश्तेदार
2)अनिश्चित व अधिक ब्याज दर
3) उधार लेने वाले का शोषण होता है।
4) कर्ज-जाल में फंसने की संभावना।
4. क्या कारण है कि कुछ व्यक्तियों या समूहों को बैंक कर्ज देने को तैयार नहीं होते?
उत्तर :- 1)ग्रामीण क्षेत्रों में बैंको की अनुपस्थिति।
2) समर्थक ऋणाधार न होना।
3) जरूरी कागजात न होना।
4) ऋण की शर्ते पूरी न कर पाना।
5. वस्तु विनिमय प्रणाली की कोई तीन सीमाएं बताइये?
उत्तर :- 1) वस्तु विनिमय के लिए दोहरे संयोग की शर्त का पूरा होना आवश्यक।
2) धन या मूल्य के संचयन में कठिनाई।
3) अविभाज्य वस्तुओं का विनिमय कठिन।
4) वस्तुओं को भविष्य में प्रयोग के लिए संग्रहित करना (लम्बे समय तक) कठिन।
5) सेवाओं का मूल्य निर्धारण व विनिमय में कठिनाई।
6. क्या सलीम व स्वप्ना दोनों के लिए ऋण एक सी परिस्थिति उत्पन्न करता है? व्याख्या करें।
उत्तर :- 1) सलीम के लिए ऋण ने सकारात्मक भूमिका निभाई।
2) उसने लाभ भी कमाया व ऋण भी चुकाया।
3) स्वप्ना के लिए ऋण की नकारात्मक भूमिका थी।
4) वह ऋण चुकाने व लाभ कमाने में असमर्थ थी।
5) वह ऋण-जाल में फंस गई, उसे जमीन वेचनी पड़ी।
7. कर्ज-जाल कव उत्पन्न होता है? उदाहरण देकर बताइए।
उत्तर :- 1) जब कर्जदार अपना पिछला ऋण चुकाने में असमर्थ होता है।
2) पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज ले लेता है।
3) उसे ऋण अदायगी के लिए अपनी परिसम्पत्ति वेचनी पड़ जाती है।
4) उसकी आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो जाती है।
8. ऋण की शर्ते किसे कहा जाता है? यह किस
प्रकार भिन्न हो सकती है?
उत्तर :- ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागजात और भुगतान के तरीकों को सम्मिलित रूप से “ऋण की शर्ते कहा जाता है। ऋण की शर्ते
विभिन्न व्यक्तियों या समूहों के लिए अलग अलग हो सकती है।
9. गरीबों के लिए स्वयं सहायता समूह संगठनों के पीछे मूल विचार क्या है?
उत्तर :- 1) गरीबों को संगठित रूप में कार्य के लिए प्रेरित करना।
2) स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना।
3) शोषण से बचाना।
4) कर्जदारों को कर्ज-जाल से बचाना।
5) महिलाओं को स्वावलंबी बनाना व रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध करवाना।
10. भारत में औपचारिक ऋण क्षेत्रक को विस्तृत करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर :- 1) अनौपचारिक स्रोतों से ऋण प्राप्ति आसान होती है परन्तु शोषण अधिक होता है।
2) व्याज की दरे अनिश्चित व उच्च होती है।
3) गरीब, अशिक्षित लोग आसानी से ऋण जाल में फंस जाते हैं।
4) ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारों पर निर्भरता कम करने के लिए।
5) छोटे कर्जदारों को आसानी से ऋण उपलब्ध करवाने के लिए।
प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से
प्रश्न 1. जोखिम वाली परिस्थितियों में ऋण कर्जदार के लिए और समस्याएँ खड़ी कर सकता है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :- हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत-सी गतिविधियों में ऐसे बहुत से सौदे होते हैं जहाँ किसी-न-किसी रूप में ऋण को प्रयोग होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज की मुख्य माँग फसल उगाने के लिए होती है। किसान ऋतु के आरंभ में फसल उगाने के लिए उधार लेते हैं और फसल तैयार हो जाने पर उधार चुका देते हैं। किंतु यदि किसी वजह से फसल बरबाद हो जाती है, तो कर्ज की अदायगी असंभव हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में किसान अपनी जमीन का कुछ हिस्सा बेचने को मजबूर हो जाता है। इस प्रकार, इस जोखिम वाली परिस्थिति में कर्जदार के लिए ऋण लेने से कई समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। और उसकी कमाई बढ़ने की बजाय उसकी स्थिति और बदतर हो जाती है।
प्रश्न 2. मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की समस्या को किस तरह सुलझाती है? अपनी ओर से उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर :- वस्तु विनिमय प्रणाली में मुद्रा का प्रयोग किए बिना सीधे वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाता था । ऐसी स्थिति में माँगों का दोहरा संयोग होना आवश्यक था । उदाहरण के लिए, यदि किसी कपड़ा व्यापारी को चावल चाहिएं तो उसे ऐसे किसान को खोजना होगा, जो चावल के बदले कपड़े खरीदना चाहता हो। इस समस्या का समाधान मुद्रा का प्रयोग करके किया जाता है। मुद्रा माँगों के दोहरे संयोग की समस्या को समाप्त कर देती है। मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है, इसे विनिमय का माध्यम भी कहा जाता है।
प्रश्न 3. अतिरिक्त मुद्रा वाले लोगों और जरूरतमंद लोगों के बीच बैंक किस तरह मध्यस्थता करते हैं?
उत्तर :- अतिरिक्त मुद्रा वाले व्यक्ति अपनी मुद्रा को बैंकों में अपने नाम से खाता खोलकर जमा कर देते हैं। बैंक ये निक्षेप स्वीकार करते हैं और इस पर सूद भी देते हैं। इस तरह लोगों की मुद्रा बैंकों के पास सुरक्षित रहती है और इस पर सूद भी मिलता है। लोगों को इसमें से जब चाहे मुद्रा निकालने की सुविधा भी प्रदान की जाती है। बैंक इस जमा राशि का केवल 15% हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं। बैंक जमा राशि के प्रमुख भाग को कर्ज देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए कर्ज की बहुत माँग रहती है। बैंक लोगों को कर्ज देता है और उन पर ब्याज लगाता है। इस प्रकार बैंक दो गुटों के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं।
प्रश्न 4. 10 रुपये के नोट को देखिए। इसके ऊपर क्या लिखा है? क्या आप इस कथन की व्याख्या कर सकते हैं?
उत्तर :- दस रुपये के नोट के ऊपर लिखा है भारतीय रिजर्व बैंक। इसका अर्थ है कि भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ से करेंसी नोट जारी करता है। भारतीय कानून के अनुसार किसी व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाजत नहीं है। इसके अलावा कानून रुपयों को विनिमय के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की वैधता प्रदान करता है। भारत में रुपये को सौदों में अदायगी करने से मना नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 5. हमें भारत में ऋण के औपचारिक स्रोतों को बढ़ाने की क्यों ज़रूरत है?
उत्तर :- औपचारिक स्तर पर ऋण देनेवालों की तुलना में अनौपचारिक खंड के ज्यादातर ऋणदाता कहीं ज्यादा ब्याज वसूल करते हैं। इस प्रकार अनौपचारिक स्तर पर लिया गया ऋण कर्जदाता को कहीं अधिक महँगा पड़ता है। अधिक ब्याज से कर्जदार की आय का अधिकतर हिस्सा ऋण उतारने में खर्च हो जाता है। इससे ऋण का बोझ बढ़ सकता है। व्यक्ति ऋण के फंदे में जकड़ सकता है। इन सभी कारणों से भारत में ऋण के औपचारिक स्रोतों को बढ़ाने की आवश्यकता है। बैंकों और सहकारी समितियों को ज्यादा कर्ज देना चाहिए। इसके जरिए लोगों की आय बढ़ सकती है, क्योंकि फिर बहुत से लोग अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए सस्ता कर्ज ले सकेंगे। सस्ता और सामर्थ्य के अंदर का कर्ज देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।
प्रश्न 6. गरीबों के लिए स्वयं सहायता समूहों के संगठनों के पीछे मूल विचार क्या हैं? अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।
उत्तर :- भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक मौजूद नहीं हैं। जहाँ हैं, वहाँ भी बैंक से कर्ज लेना साहूकार से कर्ज लेने की अपेक्षाज्यादा मुश्किल है। ऋणाधार की कमी होने के कारण भी गरीब परिवार बैंकों से ऋण नहीं ले पाते। इसलिए गरीब लोग महाजनों से ऋण लेते हैं जो ब्याज की दरें ऊँची रखते हैं। गरीबों को इस हालात से बचाने के लिए ऋण देने के नए तरीकों को अपनाने की कोशिश की गई है। आत्मनिर्भर गुटों के संगठन के पीछे भी यही विचार है। इन गुटों को सरकार ऋण देती है। इस ऋण को उतारने की जिम्मेदारी भी गुट की होती है। आत्मनिर्भर गुट कर्जदारों को ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारने में मदद करते हैं। उन्हें समयानुसार विभिन्न लक्ष्यों के लिए एक यथोचित ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है। इससे गाँव के पुरुष व महिलाएँ स्वावलंबी बन जाते हैं। गुट की नियमित बैठकों के जरिए लोगों को एक माध्यम मिलता है जहाँ वे तरह-तरह के सामाजिक विषयों, जैसे–स्वास्थ्य, पोषण और हिंसा इत्यादि पर आपस में चर्चा कर पाते हैं। प्रश्न
7. क्या कारण है कि बैंक कुछ कर्जदारों को कर्ज देने के लिए तैयार नहीं होते?
उत्तर :- बँक कुछ कर्जदारों को कर्ज देने के लिए तैयार नहीं होते । जो कर्जदार ऋण की शर्ते पूरी नहीं कर पाते, बैंक उन्हें कर्ज नहीं देते । ब्याज दर, संपत्ति और कागजात की माँग और भुगतान के तरीके, इन सबको मिलाकर ऋण की शर्ते कहा जाता है। बैंक ऋण से औपचारिकता है। अगर औपचारिकताएँ पूरी न हों तो बैंक ऋण नहीं दे पाते।
प्रश्न 8. भारतीय रिजर्व बैंक अन्य बैंकों की गतिविधियों पर किस तरह नज़र रखता है? यह ज़रूरी क्यों है?
उत्तर :- भारत में भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ से करेंसी नोट जारी करता है। इसके साथ-साथ यह अन्य बैंकों की गतिविधियों पर नजर रखता है। भारतीय रिज़र्व बैंक यह देखता है कि बैंक वास्तव में नकद शेष बनाए हुए हैं। बैंक केवल लाभ बनाने वाली इकाइयों और व्यापारियों को ही ऋण मुहैया नहीं करा रहे, बल्कि छोटे किसानों, छोटे उद्योगों, छोटे कर्जदारों को भी ऋण दे रहे हैं। समय-समय पर बैंकों को (आर०बी०आई०) को यह जानकारी देनी पड़ती है कि वे कितना और किनको ऋण दे रहे हैं और उसकी ब्याज की दरें क्या हैं। यह इसलिए जरूरी है, ताकि ऋण की सुविधा सभी को मिलती रहे।
प्रश्न 9. विकास में ऋण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर :- हमारे जीवन की बहुत-सी गतिविधियों में ऐसे बहुत से सौदे होते हैं जहाँ किसी-न-किसी रूप में ऋण का प्रयोग होती है। ऋण (उधार) से हमारा तात्पर्य एक सहमति से है, जहाँ उधारदाता कर्जदार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ मुहैया कराता है और बदले में कर्जदार से भुगतान करने का वादा लेता है। ऋण उत्पादक की कार्यशील पूँजी की जरूरत को पूरा करता है। उसे उत्पादन के कार्यशील खर्चे तथा उत्पादन को समय पर खत्म करने में मदद करता है। इसके जरिए वह अपनी कमाई बढ़ा पाता है। इस स्थिति में ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।
प्रश्न 10. मानव को एक छोटा व्यवसाय करने के लिए ऋण की जरूरत है। मानव किस आधार पर यह निश्चित करेगा कि उसे यह ऋण बैंक से लेना चाहिए या साहूकार से? चर्चा कीजिए।
उत्तर :- मानवे को एक छोटा व्यवसाय शुरू करना है। इसके लिए वह ऋण किससे ले ?इसके लिए उसे दोनों ऋण स्थितियों की तुलना करनी होगी। यदि वह साहूकार से ऋण लेगा तो साहूकार अधिक ब्याज की दर पर ऋण देगा । वह नाजायज तरीकों से अपने पैसे वापस लेने की कोशिश कर सकता है। उसकी गतिविधियों पर देखरेख करनेवाली कोई संस्था नहीं है। यदि वह बैंक से ऋण लेगा तो उसे सीमित ब्याज पर ऋण मिलेगा। इसके जरिए उसकी आय बढ़ सकती है। बैंक से सस्ता और सामर्थ्य के अंदर का कर्ज मिलता है। इसलिए मानव अपने व्यवसाय के लिए बैंक से ही कर्ज लेना चाहेगा।
प्रश्न 11. भारत में 80 प्रतिशत किसान छोटे किसान हैं, जिन्हें खेती करने के लिए ऋण की जरूरत होती है।
(क) बैंक छोटे किसानों को ऋण देने से क्यों हिचकिचा सकते हैं?
(ख) वे दूसरे स्रोत कौन हैं, जिनसे छोटे किसान कर्ज ले सकते हैं?
(ग) उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए कि किस तरह ऋण की शर्ते छोटे किसानों के प्रतिकूल हो सकती हैं?
(घ) सुझाव दीजिए कि किस तरह छोटे किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है?
उत्तर :-
(क) बैंक छोटे किसानों को ऋण देने से इसलिए हिचकिचाते हैं क्योंकि छोटे किसान ऋण की शर्ते पूरी नहीं कर पाते। ऋण के लिए ऋणाधार का उनके पास सर्वथा अभाव रहता है।
(ख) ये छोटे किसान आमतौर से साहूकारों से कर्ज लेते हैं तो ये साहूकार बिना ऋणाधार के कर्ज तो दे देते हैं किंतु ब्याज की दरें अधिक रखते हैं।
(ग) ऋण की शर्ते छोटे किसानों के प्रतिकूल हो सकती हैं। ब्याज दर, संपत्ति और कागजात की माँग और भुगतान के | तरीके आदि ऋण की शर्ते होती हैं। उदाहरणत: यदि छोटा किसान ऋण लेना चाहेगा तो उसे ये शर्ते पूरी करनी होगीं। उसे वे कागजात देने पड़ेंगे जो उसके वेतन, संपत्ति आदि का रिकार्ड दिखाते हों । यदि किसान के पास ये सब चीजें नहीं हैं तो उसे ऋण नहीं मिल पाता।
(घ) छोटे किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए सहकारी समितियों की स्थापना की जा सकती है। ये सहकारी समितियाँ किसानों, बुनकरों, औद्योगिक मजदूरों इत्यादि को सस्ते दामों पर ऋण उपलब्ध करा सकती हैं। सहकारी समितियाँ कृषि उपकरण खरीदने, खेती तथा व्यापार करने, मछली पकड़ने, घर बनाने और तमाम अन्य किस्म के खर्चे के लिए ऋण उपलब्ध कराती है। प्रश्न
प्रश्न 12. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –
(क) …………………… परिवारों की ऋण की अधिकांश जरूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती हैं।
(ख) …………………… ऋण की लागत ऋण का बोझ बढ़ाती है।
(ग) …………………… केंद्रीय सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करता है।
(घ) बैंक………………. पर देने वाले ब्याज से ऋण पर अधिक ब्याज लेते हैं।
(ङ) …………………… संपत्ति है जिसका मालिक कर्जदार होता है जिसे वह ऋण लेने के लिए गारंटी के रूप में इस्तेमाल करता है, जब तक ऋण चुकता नहीं हो जाता।
उत्तर :- (क) ग्रामीण (ख) ऋणफंदा (ग) भारतीय रिज़र्व बैंक (घ) जमा (ङ) ऋणाधार|
प्रश्न 13. सही उत्तर का चयन करें
(क) स्वयं सहायता समूह में बचत और ऋण संबंधित अधिकतर निर्णय लिए जाते हैं
• बैंक द्वारा • सदस्यों द्वारा • गैर सरकारी संस्था द्वारा
(ख) ऋण के औपचारिक स्रोतों में शामिल नहीं है
• बैंक • सहकारी समिति • मालिक
उत्तर :- (क) सदस्यों द्वारा (ख) मालिक।