अध्याय – 4
“जाति, धर्म और लैंगिक मसले”
स्मरणीय बातें :-
1. श्रम का लैंगिक विभाजन – लिंग के आधार पर काम का बंटवारा। जैसे- घर के अंदर के अधिकतर काम औरतें करती हैं।
2. नारीवादी-औरत और मर्द दोनों के लिए एक समान अधिकारों की मांग करना या नारी सशक्तिकरण की माँग।
3.स्वीडन, नार्वे और फिनलैंड जैसे देशों में सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी का स्तर काफी ऊँचा है।
4. पितृ-प्रधान समाज – ऐसा समाज जिसमें परिवार का मुखिया पिता होता है और उन्हें औरतों की तुलना में अधिक अधिकार होता है।
5. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में पुरूष साक्षरता की दर 76 प्रतिशत तथा महिलाओं में साक्षरता की दर 54 प्रतिशत थी।
6. 2001 की जनसंख्या के अनुसार भारत में लिंग अनुपात 927 थी।
7. लोकसभा में महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से भी कम है
8. जबकि राज्य विधान सभाओं में उनका प्रतिनिधित्व 5 प्रतिशत से भी कम .. भारत के प्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं की संख्या 10 लाख से ज्यादा है।
9. . पारिवारिक कानून – विवाह, तलाक, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे परिवार से जुड़े मसलों से संबंधित कानून।
10. साम्प्रदायिकता – जव किसी धर्म के मानने वाले लोग अपने धर्म को दूसरों के धर्मों से श्रेष्ठ समझने लगते हैं।
11. धर्मनिरपेक्षता – ऐसी ब्यवस्था जिसमें राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता। सभी धर्मों को एक समान महत्व दिया जाता है तथा नागरिकों को
किसी भी धर्म को अपनाने की आजादी होती है।
12. वर्ण व्यवस्था – विभिन्न जातीय समूहों का समाज में पदानुक्रम।
13, सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार – किसी राज्य में एक निश्चित आयु के बाद सभी लोगों को एक समान मत देने का अधिकार।
14. जातिवाद – जाति के आधार पर लोगों में
भेदभाव करना।
1 अंक वाले प्रश्न :-
1. समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई असमान भूमिकाएं क्या कहलाती है?
उत्तर :- लैंगिक विभाजन।
2. भारत में औरतों के लिए आरक्षण की व्यवस्था किन प्रतिनिधि संस्थाओं में है?
उत्तर :- पंचायती राज की संस्थाओं में।
3. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत के किन राज्यों में लिंगानुपात 800 से भी कम है?
उत्तर :- पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और गुजरात।
4. स्थानीय सरकारों में महिलाओं के लिए कितने प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है?
उत्तर :- 33 प्रतिशत
5. लिंगानुपात किस कहते हैं।
उत्तर :- प्रति 1000 पुरूषों पर महिलाओं की संख्या।
6. ‘धर्म को राजनीति से कभी भी अलग नहीं किया जा सकता’ – ये शब्द किसने कहे हैं?
उत्तर :- महात्मा गाँधी।
7. एक ऐसे समुदाय के लोग जो साधारतया पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में रहते हैं और जिनका बाकी समाज से अधिक मेल जोल नहीं है, क्या कहते हैं ?
उत्तर :- अनुसूचित जनजाति।
8. उस प्रक्रिया को क्या कहते हैं जिसमें लोग ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन करते हैं?
उत्तर :- शहरीकरण।
3/5 अंक वाले प्रश्न :-
1. जीवन में उन विभिन्न पहलुओं का जिक्र करें जिनमें भारत में स्त्रियों के साथ भेदभाव होता है।
उत्तर :- 1) महिलाओं के ऊपर पूरा घरेलू दायित्व।
2) पुरुषों का अत्यधिक नियंत्रण।
3) व्यवस्थापिकाओं में कम प्रतिनिधित्व।
4) कन्या भ्रूण हत्या
5) स्त्री शिक्षा को कम महत्व।
6) पारिश्रमिक वितरण में असमानता।
2. जाति के आधार पर भारत में चुनावी नतीजे तय नहीं किये जा सकते। कारण लिखिए।
उत्तर :- 1) मतदाताओं में जागरूकता – कई बार मतदाता जातीय भावना से ऊपर उठकर मतदान करते हैं।
2) मतदाताओं द्वारा अपने आर्थिक हितों और राजनीतिक दलों को प्राथमिकता।
3) किसी एक संसदीय क्षेत्र में किसी एक जाति के लोगों का बहुमत न होना।
4) मतदाताओं द्वारा विभिन्न आधारों पर मतदान करना।
3. भारत को एक धर्म निरपेक्ष राज्य बनाने वाले विभिन्न प्रावधान कोन कोन है?
उत्तर :-1) भारत का कोई राजकीय धर्म नहीं है।
2) भारत में सभी धर्मों को एक समान महत्व दिया गया है।
3) प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छानुसार किसी भी धर्म को अपनाने की स्वतत्रता है।
4) भारतीय संविधान धार्मिक भेदभाव को असंवैधानिक घोषित करता है।
4.भारत सरकार ने नारी असमानता को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए है?
उत्तर :- 1) दहेज को अवैध घोषित करना।
2) पारिवारिक सम्पत्तियों में स्त्री-पुरुष को वरावर एक।
3) कन्या भ्रूण हत्या को कानूनन अपराध घोषित करना।
4) समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक का प्रावधान।
5) नारी शिक्षा पर विशेष जोर देना।
6) बेटी पढ़ाओ, देश बढ़ाओ जैसी योजना।
5. बताइए कि भारत में किस तरह अभी भी जातिगत असमानताएँ जारी है?
उत्तर :- 1) आज भी हमारे देश में कुछ जातियों के साथ अछूतों जैसा बर्ताव किया जाता है।
2) आज भी अधिकतर लोग अपनी जाति या कबीले में विवाह करते
3) कुछ जातियों अधिक उन्नत है तो कुछ खास जातियाँ अत्यधिक पिछड़ी हुई।
4) कुछ जातियों का अभी भी शोषण हो रहा है।
चुनाव अथवा मंत्रिमंडल के गठन में जातीय समीकरण को ध्यान में रखना।
6. साम्प्रदायिक राजनीति के विभिन्न रूपों का वर्णन करें।
उत्तर :- 1) कट्टर पंधी विचारधारा वाले लोग।
2) धार्मिक आधार पर मतों का ध्रुवीकरण।
3) धर्म के आधार पर लोगों को चुनाव में प्रत्याशी घोषित करना।
4) साम्प्रदायिक हिंसा और खून बराबा।
5) साम्प्रदायिक दिशा में राजनीति की गतिशीलता।
6) साम्प्रदायिकता के आधार पर राजनीतिक दलों का अलग-अलग खेमों में बैट जाना। जैसे- आवरलैंड में नेशलिस्ट और यूनियनिस्ट पार्टी।
7. नारीवादी आदोलन किस कहते हैं? इसकी विशेषताओं और प्रभाव को बताइए?
उत्तर :- महिलाओं के राजीतिक और वैधानिक दर्जे को ऊँचा उठाने, उनके लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की मांग और उनके व्यक्तिगत
एवं पारिवारिक जीवन में बराबरी की मांग करने वाले आंदोलन को नारीवादी आंदोलन कहते हैं।
विशेषताएँ :-
1) यह आंदोलन महिलाओं के राजनैतिक अधिकार और सत्ता पर उनको पकड़ की वकालत करता है।
2) इसमें महिलाओं को घर की चार-दीवारी के भीतर कैद रखने और घर के सभी कामों का बोझ डालने का विरोध सम्मिलित है।
3) यह पितृसत्तात्मक परिवार को मातृसत्तात्मक बनाने की ओर अग्रसर है
4) महिलाओं की शिक्षा तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों में उनके व्यवसाय, सेवा आदि का समर्थक है।
5) यह महिलाओं के हर प्रकार के शोषण का विरोध करता है।
8. भारत में स्वतंत्रता के उपरात महिलाओं की
स्थिति में कुछ सुधार हुए हैं परंतु वे अभी भी पुरुषों से काफी पीछे हैं। इस कथन को विभिन्न तथ्यों
और सादयों से समझाइए।
उत्तर :-1) साक्षरता की दर – महिलाओं में साक्षरता की दर 54 प्रतिशत है जबकि पुरुषों में 76 प्रतिशत।
2) ऊँचा वेतन और ऊँची स्थिति के पद, इस क्षेत्र में पुरुष महिलाओं से बहुत आगे हैं।
3) असमान लिंग अनुपात – अभी भी प्रति 1000 पुरूषों पर महिलाओं की संख्या 933 है।
4) घरेलु और सामाजिक उत्पीड़न
5) जन प्रतिनिधि संस्थाओं में कम भागीदारी अथवा प्रतिनिधित्व।
6) महिलाओं में पुरुषों की तुलना में आर्थिक आत्मनिर्भरता कम।
9. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की विशेषताएँ लिखिए देश की आबादी में उनके प्रतिशत क्या हैं?
उत्तर :- अनुसूचित जातियाँ । वे जातियों जो हिन्दू सामाजिक व्यवस्था में उच्य जातियों से अलग और अछूत मानी जाती हैं। जो दलित के रूप में मानी जाता हैं तथा जिनका अपेक्षित विकास नहीं हुआ है।
अनुसूचित जनजातियाँ ऐसा समुदाय जो साधारणतया पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में रहते हैं और जिनका बाकी समाज से अधिक मेलजोल नहीं है। साथ ही उनका विकास नहीं हुआ है।
अनुसूचित जातियों का प्रतिशत 16.2 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत 8.2 प्रतिशत है.।
10. भारत में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। कारण बताइए।
उत्तर :- 1) महिलाओं में राजनीतिक जागरूकता का अभाव है।
2) पुरुष अभी भी महिलाओं को आगे आने नहीं देते।
3) राजनीतिक दल महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुपात में टिकट नहीं देते।
4) महिलाओं में शिक्षा का अभाव है।
11. अगर एक सी सामाजिक असमानताएं कई समूहों में मौजूद हो, तो फिर एक समूह के लोगों के लिए दूसरे समूहों से अलग पहचान बनाना मुश्किल हो जाता है। उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए।
उत्तर :- 1) किसी एक मुद्दे पर कई समूहों के हित एक जैसे हो सकते हैं, जबकि किसी दूसरे मुद्दे पर उनके नजरिये में अंतर हो सकता है।
2) उत्तरी आयरलैंड और नीदरलैंड दोनों ही ईसाई बहुल देश हैं, लेकिन यहाँ के लोग प्रोस्टेंट और कैथोलिक खेमे में बंटे हए हैं।
3) उत्तरी आयरलैंड में वर्ग और धर्म में शहरी समानता है। वहाँ कैथोलिक समुदाय गरीब है और उनके साथ भेदभाव होता है।
4) नीदरलैंड में वर्ग और धर्म के बीच समानता नहीं है। वहाँ कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट दोनों ही अमीर एवं गरीब हैं।
5) उत्तरी आयरलैंड में दोनों ही समुदायों में भारी मारकाट चलती है परंतु नीदरलैंड में ऐसा नहीं है।
12. लैंगिक विभाजन की राजनीतिक अभिव्यक्ति और इस सवाल पर राजनीतिक गोलबंदी ने सार्वजनिक जीवन में किस प्रकार महिलाओं की
भूमिका को बढ़ाने में मदद की है।
उत्तर :- लैंगिक विभाजन की राजनीतिक अभिव्यक्ति और इस सवाल पर राजनीतिक
गोलबंदी ने सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भूमिका को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित किया है :-
1) आज विभिन्न पेशे में महिलाओं की भूमिका पहले से अधिक देखने को मिलती है। जैसे-डॉक्टर, इंजीनियर, प्रबंधक आदि।
2) पहले उपर्युक्त कामों के लिए महिलाओं को योग्य नहीं समझा जाता था।
3) दुनिया के कुछ चुनिन्दा देशों जैसे-नार्वे फिनलैंड आदि में महिलाओं की भागीदारी का स्तर ऊँचा है।
4) भारत में आजादी के बाद महिलाओं का प्रतिनिधित्व राजनीति एवं अन्य क्षेत्रों में बढ़ा है, परन्तु अभी भी वे पुरुषों से काफी पीछे हैं।
प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से
प्रश्न 1. जीवन के उन विभिन्न पहलूओं का जिक्र करें जिनमें भारत में स्त्रियों के साथ भेदभाव होता है या वे कमज़ोर स्थिति में होती हैं।
उत्तर :- हमारे देश में आजादी के बाद से महिलाओं की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। पर वे अभी भी पुरुषों से काफी पीछे हैं। हमारा समाज अभी भी पितृप्रधान है। औरतों के साथ अभी भी कई तरह के भेदभाव होते हैं।
1. महिलाओं में साक्षरता की दर अब भी मात्र 54 फीसदी है जबकि पुरुषों में 76 फीसदी। स्कूल पास करनेवाली लड़कियों की एक सीमित संख्या ही उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ा पाती हैं। अभी भी माँ-बाप अपने संसाधनों को लड़के-लड़की दोनों पर बराबर खर्च करने की जगह लड़कों पर ज्यादा खर्च करना पसंद करते हैं।
2. साक्षरता दर कम होने के कारण ऊँची तनख्वाह वाले और ऊँचे पदों पर पहुँचने वाली महिलाओं की संख्या बहुत ही कम है। भारत में स्त्रियाँ पुरुषों से अधिक काम करती हैं किंतु अक्सर उनके काम को मूल्यवान नहीं माना जाता।
3. काम के हर क्षेत्र में यानी खेल-कूद की दुनिया से लेकर सिनेमा के संसार तक और कल-कारखानों से लेकर खेत-खलिहानों तक महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम मजदूरी मिलती है। भले ही दोनों ने समान काम किया हो।
4. भारत के अनेक हिस्सों में अभी भी लड़की को जन्म लेते ही मार दिया जाता है। अधिकांश परिवार लड़के की चाह रखते हैं। इस कारण लिंग अनुपात गिरकर प्रति हजार लड़कों पर 927 रह गया है।
5. भारत में सार्वजनिक जीवन में, खासकर राजनीति में महिलाओं की भूमिका नगण्य ही है। अभी भी महिलाओं को घर की चहारदीवारी के भीतर रखा जाता है।
महिलाओं के उत्पीड़न, शोषण और उन पर होनेवाली हिंसा की खबरें हमें रोज पढ़ने को मिलती हैं। शहरी इलाके तो महिलाओं के लिए खासतौर से असुरक्षित हैं। वे अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं क्योंकि वहाँ भी उन्हें मारपीट तथा अनेक तरह की घरेलू हिंसा झेलनी पड़ती है।
प्रश्न 2. विभिन्न तरह की सांप्रदायिक राजनीति का ब्यौरा दें और सबके साथ एक-एक उदाहरण भी दें।
उत्तर :- सांप्रदायिकता राजनीति में अनेक रूप धारण कर सकती है
1. सांप्रदायिकता की सबसे आम अभिव्यक्ति रोजमर्रा के जीवन में ही दिखती है। इनमें धार्मिक पूर्वाग्रह, धार्मिक समुदायों के बारे में बनी बनाई धारणाएँ और एक धर्म को दूसरे धर्म से श्रेष्ठ मानने की मान्यताएँ शामिल हैं।
2. सांप्रदायिक भावना वाले धार्मिक समुदाय राजनीतिक प्रभुत्व स्थापित करना चाहते हैं। इसके लिए धर्म के आधार पर राजनीतिक दलों का गठन किया जाता है तथा फिर धीरे-धीरे धर्म पर आधारित अलग राज्य की माँग करके देश की एकता को नुकसान पहुँचाया जाता है। जैसे-भारत में अकाली दल, हिंदू महासभा आदि दल धर्म के आधार पर बनाए गए। धर्म के आधार पर सिक्खों की खालिस्तान की माँग इसका उदाहरण है।
3. सांप्रदायिक आधार पर राजनीतिक दलों द्वारा धर्म और राजनीति का मिश्रण किया जाता है। राजनीतिक दलों द्वारा अधिक वोट प्राप्त करने के लिए लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काया जाता है। जैसे- भारत में भारतीय जनता | पार्टी धर्म के नाम पर वोट हासिल करने की कोशिश करती है। बाबरी मस्जिद का मुद्दा इसका उदाहरण है।
4. कई बार सांप्रदायिकता सबसे गंदा रूप लेकर संप्रदाय के आधार पर हिंसा, दंगा और नरसंहार कराती है। विभाजन के समय भारत और पाकिस्तान में भयानक सांप्रदायिक दंगे हुए थे। आज़ादी के बाद भी बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई है। 1984 के हिंदू-सिक्ख दंगे इसका प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 3. बताइए कि भारत में किस तरह अभी भी जातिगत असमानताएँ जारी हैं?
उत्तर :- आधुनिक भारत में जाति की संरचना और जाति व्यवस्था में भारी बदलाव आया है। किंतु फिर भी समकालीन भारत से जाति प्रथा विदा नहीं हुई है। जातिगत असमानता के कुछ पुराने पहलू अभी भी बरकरार हैं
1. अभी भी ज्यादातर लोग अपनी जाति या कबीले में ही शादी करते हैं।
2. संवैधानिक प्रावधान के बावजूद छुआछूत की प्रथा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
3. जाति व्यवस्था के अंतर्गत कुछ जातियाँ लाभ की स्थिति में रहीं तथा कुछ को दबाकर रखा गया। इसका प्रभाव आज भी नज़र आता है। यानी ऊँची जाति के लोगों की आर्थिक स्थिति सबसे अच्छी है वे दलित तथा आदिवासियों की आर्थिक स्थिति सबसे खराब है।
4. हर जाति में गरीब लोग हैं पर गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करनेवालों में अधिक संख्या निचली जातियों के लोगों की है। ऊँची जातियों में गरीबी का प्रतिशत सबसे कम है।
5. आज सभी जातियों में अमीर लोग हैं पर यहाँ भी ऊँची जातिवालों का अनुपात बहुत ज्यादा है और निचली जातियों का बहुत कम।
6. जो जातियाँ पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में आगे थीं, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भी उन्हीं का बोलबाला है। जिन जातियों को पहले शिक्षा से वंचित रखा जाता था, उनके सदस्य अभी भी पिछड़े हुए हैं।
आज भी जाति आर्थिक हैसियत के निर्धारण में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि अभी भी जातिगत असमानताएँ जारी हैं।
प्रश्न 4. दो कारण बताएँ कि क्यों सिर्फ़ जाति के आधार पर भारत में चुनावी नतीजे तय नहीं हो सकते?
उत्तर :- भारत में जाति व्यवस्था भी धर्म की तरह चुनावों को प्रभावित करती है किंतु केवल जाति के आधार पर ही चुनावी नतीजे तय नहीं हो सकते
1. देश के किसी भी एक संसदीय चुनाव क्षेत्र में किसी एक जाति के लोगों का बहुमत नहीं है। इसलिए हर पार्टी और । उम्मीदवार को चुनाव जीतने के लिए एक जाति और समुदाय से ज्यादा लोगों का भरोसा हासिल करना होता है।
2. कोई भी पार्टी किसी एक जाति या समुदाय के सभी लोगों का वोट हासिल नहीं कर सकती। जब लोग किसी जाति विशेष को किसी एक पार्टी का वोट बैंक’ कहते हैं तो इसका मतलब यह होता है कि उस जाति के ज्यादातर लोग उसी पार्टी को वोट देते हैं।
इस प्रकार चुनाव में जाति की भूमिका महत्त्वपूर्ण तो होती है किंतु दूसरे कारण भी महत्त्वपूर्ण होते हैं। मतदाताओं का लगाव जाति के साथ-साथ राजनीतिक दलों से भी होता है। सरकार के काम-काज के बारे में लोगों की राय और नेताओं की लोकप्रियता का चुनावों पर निर्णायक असर होता है।
प्रश्न 5. भारत की विधायिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की स्थिति क्या है?
उत्तर :- भारत की विधायिकाओं में महिला प्रतिनिधियों का अनुपात बहुत ही कम है। जैसे-लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या कुल सांसदों की दस प्रतिशत भी नहीं है। राज्यों की विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व 5 प्रतिशत से भी कम है। इस मामले में भारत दुनिया के अन्य देशों से बहुत नीचे है। भारत, अफ्रीका और लैटिन अमरिका के कई देशों से पीछे है। कभी-कभार कोई महिला प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बन भी जाए तो मंत्रिमंडलों में पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है।
प्रश्न 6. किन्हीं दो प्रावधानों का जिक्र करें जो भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बनाते हैं।
उत्तर :- संविधान निर्माताओं ने सांप्रदायिकता से निपटने के लिए भारत के लिए धर्मनिरपेक्ष शासन का मॉडल चुना और इसके लिए संविधान में महत्त्वपूर्ण प्रावधान किए गए :
1. भारतीय राज्य ने किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में अंगीकार नहीं किया है। श्रीलंका में बौद्ध धर्म, पाकिस्तान में इस्लाम और इंग्लैंड में ईसाई धर्म का जो दर्जा रहा है उसके विपरीत भारत का संविधान किसी धर्म को विशेष दर्जा नहीं देता।
2. संविधान सभी नागरिकों को किसी भी धर्म का पालन करने और प्रचार-प्रसार करने की आजादी देता है।
3 संविधान धर्म के आधार पर किए जाने वाले किसी तरह के भेदभाव को अवैधानिक घोषित करता है।
प्रश्न 7. जब हम लैंगिक विभाजन की बात करते हैं तो हमारा अभिप्राय होता है।
(क) स्त्री और पुरुष के बीच जैविक अंतर।
(ख) समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई असमान भूमिकाएँ।
(ग) बालक और बालिकाओं की संख्या का अनुपात।
(घ) लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में महिलाओं को मतदान का अधिकार न मिलना।
उत्तर :- (ख) समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई असमान भूमिकाएँ।
प्रश्न 8. भारत में यहाँ औरतों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है।
(क) लोकसभा
(ख) विधानसभा
(ग) मंत्रिमंडल
(घ) पंचायती राज की संस्थाएँ।
उत्तर :-
(घ) पंचायती राज की संस्थाएँ।
प्रश्न 9. सांप्रदायिक राजनीति के अर्थ संबंधी निम्नलिखित कथनों पर गौर करें। सांप्रदायिक राजनीति इस धारणा पर आधारित है किः
(अ) एक धर्म दूसरों से श्रेष्ठ है।
(ब) विभिन्न धर्मों के लोग समान नागरिक के रूप में खुशी-खुशी साथ रह सकते हैं।
(स) एक धर्म के अनुयायी एक समुदाय बनाते हैं।
(द) एक धार्मिक समूह का प्रभुत्व बाकी सभी धर्मों पर कायम करने में शासन की शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
इनमें से कौन या कौन-कौन सा कथन सही है?
(क) अ, ब, स और द (ख) अ, ब, और द (ग) अ और स (घ) ब और द
उत्तर :- (ग) अ और स सही है।
प्रश्न 10. भारतीय संविधान के बारे में कौन सा कथन गलत है?
(क) यह धर्म के आधार पर भेदभाव की मनाही करता है।
(ख) यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है।
(ग) सभी लोगों को कोई भी धर्म मानने की आजादी देता है।
(घ) किसी धार्मिक समुदाय में सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है।
उत्तर :- (ख) यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है।
प्रश्न 11. ””’पर आधारित सामाजिक विभाजन सिर्फ भारत में ही है।
उत्तर :- जाति पर आधारित सामाजिक विभाजन सिर्फ भारत में ही है।