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class 10 political science chapter 7 solution hindi

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अध्याय – 7
लोकतंत्र के परिणाम

याद रखने योग्य बातें :-
1. आज विश्व के 100 देश किसी ना किसी तरह की लोकतांत्रिक व्यवस्था चलाने का दावा करते हैं। इनका औपचारिक संविधान है। इनके यहां चुनाव होते हैं और राजनीतिक दल भी हैं। साथ ही वे अपने नागरिकों को कुछ युनियादी अधिकारों की गारंटी भी देते है।
2. लोकतंत्र में इस बात की पक्की व्यवस्था होती है कि फैसले कुछ कायदे कानूनों के अनुसार हों।
3. कोई नागरिक यह जानना चाहे कि फैसले लेने में नियमों का पालन हुआ है या नहीं तो वह इसका पता लगा सकता है। उसे न सिर्फ यह जानने का अधिकार है बल्कि उसके पास इसके साधन भी उपलब्ध हैं, इसे पारदर्शिता कहते हैं।
4. लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था निश्चित रूप से अन्य शासनों से बेहतर है। यह पेच शासन व्यवस्था है। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था लोगों की अपनी
शासन व्यवस्था है। इसी कारण सम्पूर्ण विश्व में लोकतंत्र के विचार के प्रति जबरदस्त समर्थन का भाव है।

5. लोकतात्रिक व्यवस्था राजनीतिक समानता पर आधारित होती है। प्रतिनिधियों के चुनाव में हर व्यक्ति का स्तर बराबर होता है।
6. तानाशाही का समर्थन करने वाली राजनैतिक विचारधारा को निरंकुशतावाद कहते हैं।
7. लिंग भेद, जातिभेद और साम्प्रदाविक प्रवृत्ति सामाजिक असमानता के रूप हैं।
8. कानून के शासन से आशय है कि एक देश के सविधान के प्रति अटूट निष्ठा के साथ शासन करना।

1 अंक वाले प्रश्न

1. लोकतंत्र की परिभाषा लिखिए।

उत्तर :- जनता का शासन, जनता के लिये व जनता के द्वारा


2. तानाशाही का समर्थन करने वाली विचारधारा को क्या कहते है ?

उत्तर :- निरंकुशतावाद

3. लोकतंत्र अच्छा क्यों है?

उत्तर :- यह नागरिकों को समानता का अधिकार देता है।

4. किस प्रकार की सरकार सबसे बेहत्तर मानी जाती है ?

उत्तर :- लोकतांत्रिक सरकार।

5. ‘नागरिक स्वतंत्रता’ क्या है?

उत्तर :- नागरिकों के मौलिक अधिकार जिनकी रक्षा करना कानून करता है।

6. सामाजिक असमानता का कोई एक रूप लिखिए।

उत्तर :- लिंग भेद, जातिभेद या कोई अन्य।

7. बहुमत के शासन का क्या अर्थ है?

उत्तर :- बहुमत का निर्णय होना।

8. कुछ लोगों का अथवा एक दल का शासन क्या कहलाता है?

उत्तर :- तानाशाली या एक दलीय शासन व्यवस्था।

लघु । दीर्घ प्रश्न (3/5 अंक)

1. लोकतंत्र की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर :- 1. नागरिकों में समानता को बढ़ावा देता है।
2. व्यक्ति की गरिमा को बढ़ाता है।
3. इससे फैसलों में बेहतरी आती है।
4. इसमें गलतियों को सुधारने का अवसर होता है।

2.लोकतांत्रिक व्यवस्था को तानाशाही से बेहतर क्यों माना जाता है?

उत्तर :- * लोकतंत्र में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव होते हैं।
* लोकतंत्र में नीति तथा निर्णयों पर खुली बहस होती है।
* लोकतंत्र में वैध सरकार होती है।
* लोकतंत्र में नागरिकों की स्थिति बेहत्तर होती है।

3. लोकतंत्र के सामाजिक परिणाम लिखिए?

उत्तर :- * लोकतांत्रिक व्यवस्था सद्भावनापूर्ण जीवन उपलब्ध कराती है।
* इसमें सामाजिक टकराबों की संभावना कम रहती है।
* व्यक्ति की गरिमा और स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है
* लोकतंत्र में समाज के कमजोर वर्गों को समानता का दर्जा देने पर बल दिया जाता है।

4.लोकतंत्र किस प्रकार एक वैध सरकार को जन्म देता है।

उत्तर :- 1) लोकतान्त्रिक सरकार एक जवाबदेह सरकार है।
2) नागरिकों को निर्णय निर्माण प्रक्रिया की जाँच करने के अधिकार और साधन प्राप्त होते हैं।
3) लोकतंत्र एक जिम्मेदार सरकार है। यह नागरिकों के विचारों और उम्मीदों का ध्यान रखती है।
4) लोकतांत्रिक सरकार एक वैध सरकार हे क्योंकि यह जनता द्वारा चुनी जाती है।

5.लोकतंत्र किस प्रकार नागरिकों को शांतिपूर्ण और सद्भावनापूर्ण जीवन देता है?

उत्तर :- 1) प्रत्येक नागरिक को मत देने और चुनाव लड़ने का अधिकार है।
2) यह नागरिकों को सामाजिक समानता उपलब्ध कराता है।
3) लोकतंत्र टकरावों तथा आपसी मतभेद को समाप्त करने में मदद करता है।
4) लोकतंत्र में बहुमत को सदा अल्पमत के साथ काम करने की जरूरत होती है ताकि सरकार सभी की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व कर सके।

6. लोकतंत्र नागरिकों की गरिमा को कैसे बनाये रखता है ?

उत्तर :- 1) लोकतंत्र सम्मान एवं स्वतंत्रता की भावना को जन्म देता है।
2) लोकतंत्र में सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार किया जाता है।
3) लोकतंत्र ने महिलाओं को पुरुषों के समान दर्जा प्रदान किया है।
4) लोकतंत्र में जाति आधारित असमानताओं एवं कुरताओं का कोई नैतिक एवं कानूनी आधार नहीं है।

7.शिकायतें किस प्रकार लोकतंत्र को सफल बनाने में सहयोग देती हैं?

उत्तर :- 1) बहुत समय से स्त्रियों को समान अधिकार, न्याय और स्वतंत्रता से वंचित रखा गया था। मगर ‘लोकतंत्र ने सभी अधिकार सुनिश्चित कर दिये।
2) समाज के कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करना।
3) उचित प्रतिनिधित्व देने से विभिन्न जातीय समूहों के बीच टकराव कम हुआ है। मतभेदों को दूर करने के लिए लोकतंत्र संवैधानिक तरीका उपलब्ध कराता है।

8.लोकतंत्र के सिद्धान्तों को जीवन के सभी क्षेत्रों में कैसे लागू किया जा सकता है?

उत्तर :- 1) किसी लोकतांत्रिक फैसले में उन सभी लोगों से राय विचार करने तथा सहमति प्राप्त करने की प्रक्रिया शामिल है जो इस फैसले से प्रभावित होने वाले हैं।
2) सभी व्यक्तियों को निर्णय निर्माण प्रक्रिया में भाग लेने का समान अधिकार है।
3) किसी भी धनी पा शक्तिशाली लोगों को विशेष अधिकार प्राप्त नहीं है।

9. तानाशाही सरकार की तुलना में लोकतांत्रिक सरकार की कमियाँ वताएँ।

उत्तर :- 1) तानाशाही की तुलना में लोकतंत्र में निर्णय लेने में कुछ अधिक समय लगता है क्योंकि तानाशाही में औपचारिकता नहीं होती।
2) तानाशाही सरकार की तुलना में लोकतांत्रिक सरकार ज्यादा खर्चीली है क्योंकि यहाँ निश्चित अवधि के बाद चुनाव होते है।
3) तानाशाही में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार हो सकता है परंतु लोकतंत्र में हर स्तर पर भ्रष्टाचार हो सकता है।
4) लोकतंत्र में चुनाव जीतने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया जाता है उसके तानाशाही में ऐसा नहीं होता है।

10. नीचे दिए गए ब्यौरों में लोकतंत्र की चुनौतियों की पहचान करें। ये स्थितियाँ किस तरह नागरिकों के गरिमापूर्ण, सुरक्षित और शांतिपूर्ण जीवन के लिए चुनौती पेश करती है? लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नीतिगत-संस्थागत उपाय भी सुझाएँ।

1) उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उड़ीसा में दलितों और गैर दलितों के प्रवेश के लिए अलग- अलग दरवाजा रखने वाले एक मंदिर को एक ही दरवाजे से सबको प्रवेश की अनुमति देनी पड़ी।
2) भारत के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे है
3) जम्मू-कश्मीर के गंडवारा में मुठभेड़ बताकर जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा तीन नागरिकों की हत्या करने के आरोप को देखते हुए इस घटना की जांच के आदेश दिए गए।

उत्तर :- 1) यहाँ मुख्य चुनौती जातिवाद है।
सुझाव । जिन संस्थाओं के द्वारा जातिवाद को बढ़ावा दिया जाता है, उन्हें प्रतिबंधित करना चाहिए। लोगों में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कानून बनाना चाहिए।
2) कृषि के लिए आधारभूत सुविधाएँ अपर्याप्त है। भारतीय कृषि अभी भी बहुत हद तक मानसून पर निर्भर है। सुझाव । कम व्याज दर पर किसानों को ऋण दिया जाना चाहिए। कृषि सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए तथा किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
3) आतंकवाद के नाम पर निर्दोष नागरिकों की हत्या नहीं करनी चाहिए।

सुझाव:- पुलिस बल को नागरिकों और आतंकवादियों की पहचान की समुचित सूचना होनी चाहिए। नागरिकों में विश्वास बहाली का माहोल बनाना चाहिए। पुलिस की कार्यवाही को पारदर्शी बल के बीच सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए।

11. क्या आप सोच सकते हैं कि सरकार कैसे आपके और आपके परिवार के बारे में जानती है। (उदाहरण राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र)
सरकार के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए आपके पास कौन-कौन से स्त्रोत हैं?

उत्तर :- सरकार के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे पास निम्नलिखित स्रोत हैं :-
1) सूचना का अधिकार
2) राजनीतिक नेताओं के द्वारा
3) अखबारों और दूरदर्शन पर सरकार द्वारा दिए गए विज्ञापन।
4) राजनीति पर आधारित वाद-विवाद
5) साहित्यकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के लेख

प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से


प्रश्न 1. लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर :- लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं

1. चुनाव लड़ना – राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं। अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़ा जाता है। राजनीतिक दल उम्मीदवारों का चुनाव कई तरीकों से करते हैं। भारत में दल के नेता ही उम्मीदवार चुनते हैं।

2. नीतियाँ व कार्यक्रम जनता के सामने रखना – दल अलग-अलग नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाताओं के सामने रखते हैं और मतदाता अपनी पसंद की नीतियाँ और कार्यक्रम चुनते हैं। लोकतंत्र में समान या मिलते-जुलते विचारों को एक साथ लाना होता है ताकि सरकार की नीतियों को एक दिशा दी जा सके। दल तरह-तरह के विचारों को बुनियादी राय तक समेट लाता है। सरकार प्रायः शासक दल की राय के अनुसार नीतियाँ तय करती है।

3. कानून निर्माण में निर्णायक भूमिका – राजनीतिक दल देश के कानून निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कानूनों पर औपचारिक बहस होती है और विधायिका में पास करवाना पड़ता है। लेकिन विधायिका के सदस्य किसीन-किसी दल के सदस्य होते हैं। इस कारण वे अपने दल के नेता के निर्देश पर फैसला करते हैं।

4. सरकार बनाना – दल ही सरकार बनाते व चलाते हैं। जो दल चुनाव जीतता है वह सरकार बनाता है तथा महत्त्वपूर्ण नीतियों और फैसलों के मामले में निर्णय भी लेता है। पार्टियाँ नेता चुनती हैं उनको प्रशिक्षित करती हैं फिर उन्हें मंत्री बनाती हैं ताकि वे पार्टी की इच्छानुसार शासन चला सकें।

5. विरोधी दल के रूप में काम करना – चुनाव हारने वाले दल शासक दल के विरोधी पक्ष की भूमिका निभाते हैं। सरकार की गलत नीतियों और असफलताओं की आलोचना करने के साथ वे अपनी अलग राय भी रखते हैं। विरोधी दल सरकार के खिलाफ आम जनता को गोलबंद करते हैं।

6. जनमत निर्माण करना – राजनीतिक दल जनमत
निर्माण का कार्य भी करते हैं। चुनावों के समय, चुनाव प्रचार के दौरान तथा बाद में सरकार बनाने के बाद भी राजनीतिक दल विभिन्न मुद्दों को उठाकर जनता को राजनीतिक शिक्षण देने का काम करते हैं जिससे एक स्वस्थ जनमत का निर्माण होता है।

7. कल्याणकारी कार्यक्रमों को जनता तक पहुँचाना – दल ही सरकारी मशीनरी और सरकार द्वारा चलाए गए कल्याण कार्यक्रमों तक लोगों की पहुँच बनाते हैं। एक साधारण नागरिक के लिए किसी सरकारी अधिकारी की तुलना में किसी राजनीतिक कार्यकर्ता से जान-पहचान बनाना, उससे संपर्क साधना आसान होता है। इसी कारण लोग दलों को अपने करीब मानते हैं। दलों को भी लोगों की माँगों को ध्यान में रखना होता है वरना जनता अगले चुनावों में उन्हें हरा सकती है।

प्रश्न 2. राजनीतिक दलों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?

उत्तर :- लोकतंत्र में राजनीतिक दल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं किंतु उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो निम्नलिखित हैं

1. आंतरिक लोकतंत्र का अभाव – पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव पाया जाता है। पार्टियों के पास न सदस्यों की खुली सूची होती है, न नियमित रूप से सांगठनिक बैठकें होती है। इनके आंतरिक चुनाव भी नहीं होते। कार्यकर्ताओं से वे सूचनाओं का साँझा भी नहीं करते। सामान्य कार्यकर्ता अनजान ही रहता है कि पार्टियों के अंदर क्या चल रहा है। परिणामस्वरूप पार्टी के नाम पर सारे फैसले लेने का अधिकार उस पार्टी के नेता हथिया लेते हैं। चूंकि कुछ ही नेताओं के पास असली ताकत होती है। इसलिए पार्टी के सिद्धांतों और नीतियों से निष्ठा की जगह नेता से निष्ठा ही ज्यादा महत्त्वपूर्ण बन जाती है।

2. वंशवाद की चुनौती – दलों के जो नेता होते हैं वे अनुचित लाभ लेते हुए अपने नजदीकी लोगों और यहाँ तक कि अपने ही परिवार के लोगों को आगे बढ़ाते हैं। अनेक दलों में शीर्ष पद पर हमेशा एक ही परिवार के लोग आते हैं। यह दल के अन्य सदस्यों के साथ अन्याय है। यह बात लोकतंत्र के लिए भी अच्छी नहीं है क्योंकि इससे अनुभवहीन और बिना जनाधार वाले लोग ताकत वाले पदों पर पहुँच जाते हैं।

3. धन और अपराधी तत्वों की घुसपैठ – सभी राजनीतिक दल चुनाव जीतना चाहते हैं। इसके लिए वे हर तरीका अपना सकते हैं। वे ऐसे उम्मीदवार खड़े करते हैं जिनके पास काफी पैसा हो या जो पैसे जुटा सकें। कई बार पार्टियाँ चुनाव जीत सकने वाले अपराधियों का समर्थन करती है या उनकी मदद लेती है। जिससे राजनीति का अपराधीकरण हो गया है।

4. विकल्पहीनता की स्थिति – सार्थक विकल्प का अर्थ है विभिन्न पार्टियों की नीतियों और कार्यक्रमों में अंतर हो। कुछ वर्षों से दलों के बीच वैचारिक अंतर कम होता गया है। यह प्रवृत्ति दुनियाभर में देखने को मिलती है। भारत की सभी बड़ी पार्टियों के बीच आर्थिक मसलों पर बड़ा कम अंतर रह गया है। जो लोग इससे अलग नीतियाँ बनाना चाहते हैं उनके पास कोई विकल्प उपलब्ध नहीं होता।

प्रश्न 3. राजनीतिक दल अपना कामकाज बेहतर ढंग से करें, इसके लिए उन्हें मजबूत बनाने के कुछ सुझाव दें।

उत्तर :- भारत में राजनीतिक दलों और उसके नेताओं को सुधारने के लिए हाल में जो प्रयास किए गए हैं या जो सुझाव दिए गए हैं। वे निम्नलिखित हैं

1. विधायकों और सांसदों को दल-बदल करने से रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया। निर्वाचित प्रतिनिधियों के मंत्री पद या पैसे के लोभ में दल-बदल करने में आई तेजी को देखते हुए ऐसा किया गया। नए कानून के अनुसार अपना दल बदलने वाले सांसद या विधायक को अपनी सीट भी नॅवानी होगी। इस नए कानून से दल-बदल में कमी आई है।
2. उच्चतम न्यायालय ने पैसे और अपराधियों का प्रभाव कम करने के लिए एक आदेश जारी किया है। इसके द्वारा चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपनी संपत्ति को और अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का ब्यौरा एक शपथपत्र के माध्यम से देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था से लोगों को अपने उम्मीदवारों के बारे में। बहुत-सी पक्की सूचनाएँ उपलब्ध होने लगी हैं।
3. चुनाव आयोग ने एक आदेश के जरिए सभी दलों के लिए सांगठनिक चुनाव कराना और आयकर का रिटर्न भरना जरूरी बना दिया है। दलों ने ऐसा करना शुरू कर भी दिया है, पर कई बार ऐसा सिर्फ खानापूर्ति के लिए होता है।


कुछ अन्य कदम जो राजनीतिक दलों में सुधार के लिए सुझाए गए हैं –

1. राजनीतिक दलों के आंतरिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। सभी दल अपने सदस्यों की सूची रखें, अपने संविधान का पालन करें, सबसे बड़े पदों के लिए खुले चुनाव कराएँ।
2. राजनीतिक दल महिलाओं को एक खास न्यूनतम अनुपात में जरूर टिकट दें। इसी प्रकार दल के प्रमुख पदों पर भी औरतों के लिए आरक्षण होना चाहिए।
3. चुनाव का खर्च सरकार उठाए। सरकार दलों को चुनाव लड़ने के लिए धन दे।
4. राजनीतिक दलों पर लोगों द्वारा दबाव बनाया जाए। यह काम पत्र लिखने, प्रचार करने और आंदोलन के जरिए किया जा सकता है। यदि दलों को लगे कि सुधार न करने से उनका जनाधार गिरने लगेगा तो इसे लेकर वे गंभीर होने लगेंगे।
5. सुधार की इच्छा रखने वालों का खुद राजनीतिक दलों में शामिल होना।राजनीतिक दलों ने अभी तक इन सुझावों को नहीं माना है। अगर इन्हें मान लिया गया तो संभव है कि इनसे कुछ सुधार हो।

प्रश्न 4. राजनीतिक दल का क्या अर्थ होता है?

उत्तर :- राजनीतिक दल को लोगों के एक ऐसे संगठित समूह के रूप में समझा जा सकता है जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करता है। समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर यह समूह कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता है।

प्रश्न 5. किसी भी राजनीतिक दल के क्या गुण होते हैं?

उत्तर :-
1. राजनीतिक दल समाज के सामूहिक हितों को ध्यान में रखकर कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम बनाते हैं।
2. दल लोगों का समर्थन पाकर चुनाव जीतने के बाद उन नीतियों को लागू करने का प्रयास करते हैं।
3. दल किसी समाज के बुनियादी राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाते हैं।
4. दल समाज के किसी एक हिस्से से संबंधित होता है इसलिए इसका नजरिया समाज के उस वर्ग विशेष की तरफ झुका होता है।
5. किसी दल की पहचान उसकी नीतियों और उसके सामाजिक आधार से तय होती है।
6. राजनीतिक दल के तीन मुख्य हिस्से हैं-नेता, सक्रिय सदस्य, अनुयायी या समर्थक।


प्रश्न 6. चुनाव लड़ने और सरकार में सत्ता सँभालने के लिए एकजुट हुए लोगों के समूह को “कहते हैं।

उत्तर :- राजनीतिक दल।

प्रश्न 8. इनमें से कौन बहुजन समाज पार्टी का संस्थापक है?

(क) काशीराम
(ख) साहू महाराज
(ग) बी०आर० अंबेडकर
(घ) ज्योतिबा फुले

उत्तर :- (क) काशीराम।

प्रश्न 9. भारतीय जनता पार्टी का मुख्य प्रेरक सिद्धांत क्या है?

(क) बहुजन समाज
(ख) क्रांतिकारी लोकतंत्र
(ग) सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
(घ) आधुनिकता

उत्तर :- (ग) सांस्कृतिक राष्ट्रवाद।

प्रश्न 10. पार्टियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर गौर करें

(अ) राजनीतिक दलों पर लोगों का ज्यादा भरोसा नहीं है।
(ब) दलों में अक्सर बड़े नेताओं के घोटालों की गूंज सुनाई देती है।
(स) सरकार चलाने के लिए पार्टियों का होना जरूरी नहीं।

इन कथनों में से कौन सही है?
(क) अ, ब और स (ख) अ और ब (ग) ब और स (घ) अ और स।

उत्तर :- (ख) अ और ब सही है।

प्रश्न 11. निम्नलिखित उद्धरण को पढ़े और नीचे दिए गए प्रश्नों के जवाब दें :
मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं। गरीबों के आर्थिक और सामाजिक विकास के प्रयासों के लिए उन्हें अनेक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्हें और उनके द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक को संयुक्त रूप से वर्ष 2006 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया । फ़रवरी 2007 में उन्होंने एक राजनीतिक दल बनाने और संसदीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनका उद्देश्य सही नेतृत्व को उभारना, अच्छा शाासन देना और नए बांग्लादेश का निर्माण करना है। उन्हें लगता है कि पारंपरिक दलों से अलग एक नए राजनीतिक दल से ही नई राजनीतिक संस्कृति पैदा हो सकती है। उनका दल निचले स्तर से लेकर ऊपर तक लोकतांत्रिक होगा।

नागरिक शक्ति नामक इस नये दल के गठन से बांग्लादेश में हलचल मच गई है। उनके फैसले को काफ़ी लोगों ने पसंद किया तो अनेक को यह अच्छा नहीं लगा। एक सरकारी अधिकारी शाहेदुल इस्लाम ने कहा, ”मुझे लगता है कि अब बांग्लादेश में अच्छे और बुरे के बीच चुनाव करना संभव हो गया है। अब एक अच्छी सरकार की उम्मीद की जा सकती है। यह सरकार न केवल भ्रष्टाचार से दूर रहेगी बल्कि भ्रष्टाचार और काले धन की समाप्ति को भी अपनी प्राथमिकता बनाएगी।”

पर दशकों से मुल्क की राजनीति में रुतबा रखने वाले पुराने दलों के नेताओं में संशय है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है : ”नोबेल पुरस्कार जीतने पर क्या बहस हो सकती है पर राजनीति एकदम अलग चीज़ है। एकदम चुनौती भरी और अक्सर विवादास्पद।” कुछ अन्य लोगों का स्वर और कड़ा था। वे उनके राजनीति में आने पर सवाल उठाने लगे। एक राजनीतिक प्रेक्षक ने कहा, “देश से बाहर की ताकतें उन्हें राजनीति पर थोप रही हैं।”

क्या आपको लगता है कि यूनुस ने नयी राजनीतिक पार्टी बनाकर ठीक किया?

क्या आप विभिन्न लोगों द्वारा जारी बयानों और संदेशों से सहमत हैं? इस पार्टी को दूसरों से अलग काम करने के लिए खुद को किस तरह संगठित करना चाहिए? अगर आप इस राजनीतिक दल के संस्थापकों में एक होते तो इसके पक्ष में क्या दलील देते? ।

उत्तर :- जहाँ तक मेरा ख्याल है यूनुस ने नयी राजनीतिक पार्टी बनाकर ठीक ही किया। जनहित की इच्छा रखनेवालों को अवश्य ही आगे आना चाहिए और अच्छे-अच्छे काम करने चाहिए।

जनकल्याण करने वालों को आलोचनाओं की परवाह कभी नहीं करनी चाहिए। उन्हें अपना काम करते जाना चाहिए।

मुहम्मद यूनूस द्वारा निर्मित यह पार्टी निस्संदेह निष्पक्ष तथा जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित होगी। इस पार्टी में ईमानदार लोगों का समावेश होना चाहिए। क्योंकि तभी यह एक मिसाल बन पाएगी और दूसरों से अलग काम कर पाएगी।

यदि मैं इस राजनीतिक दल के संस्थापकों में एक होता तो मैं आम जनता को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता कि मुहम्मद यूनुस द्वारा निर्मित पार्टी आदर्शों पर आधारित है और वह उनका कल्याण अवश्य करेगी।

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