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class 10 kritika chapter 4 notes

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Class 10 kritika chapter 4 एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! Notes

पाठ का सार
एक गाँव में दुलारी नाम की नाच-गाने का पेशा करने वाली स्त्री रहती थी। वह दुक्कड़ नामक बाजे पर गीत गाने के लिए प्रसिद्ध उसके कजली गायन का सब लोग सम्मान करते थे। गाने में ही सवाल-जवाब करने में वह बहुत वुफशल थी। एक बार खोजवं की तरफ से गीतों में सवाल-जवाब करते हुए दुलारी की मुलाकात टुन्नू नाम के एक ब्राह्मण लड़के से हुई। बजरडीहा वालों की से मधुर कंठ में टुन्नू ने उसके साथ पहली बार सवाल-जवाब किए। दुलारी ने तब अपने प्रति उसके प्रेम को अनुभव किया था। दु के घर आकर भी टुन्नू चुप रहता। कभी प्रेम को प्रकट नहीं करता था। होली के एक दिन पहले टुन्नू दुलारी के घर आया। उसने आश्रम की बुनी साड़ी दुलारी को दी। दुलारी ने उसे।बहुत डाँटा और साड़ी फेंक दी। टुन्नू अपमानित।होकर रोने लगा। उसके दुलारी के द्वारा फेंकी साड़ी पर टपकने लगे। उसने अपना प्रेम पहली बार प्रकट किया और कहा कि उसका मन रुप और उम्र की में नहीं बँधा है। टुन्नू के जाने के बाद दुलारी ने साड़ी पर पड़े आँसुओं के धब्बों को चूम लिया। उसने अपनी ढलती उम्र में प्रेम पहली बार इतने करीब से महसूस किया था। टुन्नू की लाई साड़ी को उसने अपने कपड़ों में सबसे नीचे रख लिया। टुन्नू और अपने को आत्मा का प्रेम समझते हुए भी दुलारी चिंतित थी। टुन्नू के जाने के बाद उसने खाना बनाना शुरू किया ही था कि मोहल्ले का नाम का एक परिचित आदमी आ गया, वह दुलारी पर अपना अधिकार समझता था। उसने सुंदर विदेशी साड़ियों का बंडल दुला देना चाहा। उस समय दुलारी को उसका आना बहुत बुरा लगा। नीचे विदेशी कपड़ों को जलाने के लिए वस्त्रों को इकट्ठा करते की भारत जननि तेरी जय, तेरी जय हो, की आवाज सुनकर दुलारी ने फेंकू का लाया विदेशी साड़ियों का बंडल नीचे फेंक दिया।बार जब फिर दुलारी ने कुछ और साड़ियों को फेंकना चाहा, तो फेंकू ने उसका हाथ पकड़ लिया और खिड़की बंद कर दी।


सरकारी गवाह बने पुलिस के एक आदमी अली सगीर ने देख लिया। दुलारी ने फेंकू को झाडू मार-मार कर घर से निकाल दिया जुलूस में शामिल टुन्नू के विरुद्ध अली सगीर ने फेंकू का साथ दिया। जुलूस के टाउन हॉल पहुंचने पर पुलिस ने टुन्नू को गालिर और विरोध करने पर पसली में जूतों की ठोकर मार-मारकर खत्म कर दिया। अंग्रेज सैनिकों ने अस्पताल का बहाना कर मरे टुन्नू वरुणा नदी में फेंक दिया। उधर नीचे आँगन में फेंकू को भगाकर दुलारी पड़ोसिनों से यह कह ही रही थी कि उसका टुन्नू से कोई नहीं है। इतने में झिंगुर नाम के एक पड़ोसी बच्चे ने टुन्नू के मारे जाने की खबर दी। दुख, क्रोध और आश्चर्य से भरी दुलारी रोने पर उसने टुन्नू की दी साड़ी पहनी और उसके मारे जाने का स्थान झिंगुर से पूछकर वहाँ जाने को तैयार हो गई। उसी समय फेंकू था। मुंशी के साथ आया। उसने दुलारी को थाने में होने वाली अमन सभा में गाने के लिए कहा। अगले दिन शाम को टाउन हॉल में सभा ने एक समारोह किया। उसमें जनता का कोई प्रतिनिधि नहीं था। दुलारी को उसमें बुलाया गया। उसे मौसम के अनुसार गीत के लिए मजबूर भी किया गया। अपने और प्रेमी के मारे जाने के स्थान पर गाते हुए दुलारी की आवाश दर्द से भरी थी। एक उदास के साथ उसके गाने के बोल थे- ‘एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा, कासों मैं पूछू?’ गीत गाते हुए उसने लोगों को इस बात का अह करा दिया था कि टुन्नू के मारे जाने में अली सगीर का हाथ है। टुन्नू के मारे जाने की आँखों देखी खबर लाने और लिखने वाले रिपोर्टर को एक अखबार के प्रधान संवाददाता ने अयोग्य कहा।
डाँटा और मुख्य संपादक से उसकी शिकायत भी की। मुख्य संपादक ने भी पूरी खबर सुनकर ‘सच्ची’ होते हुए भी छपने लायक नहीं मानी। वह जानता था कि खबरों की तह तक जाने से अखबार नहीं चलते। उससे विरोध होता है और कार्यालय बंद हो जाते हैं।

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