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class 10 history chapter 2 solution hindi

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अध्याय – 2
इंडो चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन

महत्वपूर्ण घटनायें । तथ्य :-
1. औपचारिक रूप से वियतनाम को 1945 में स्वतंत्रता मिली।
2. इंडो चाइना तीन देशों से मिलकर बना है – वियतनाम, कंबोडिया और
3. लाओस।1858 में फ्रांस ने पहली बार वियतनाम में प्रवेश किया। धीरे-धीरे उसने पूरे वियतनाम पर कब्जा कर लिया।
4. 1887 ई० ने फ्रेंच इंडो चाइना का गठन किया गया।
5. फ्रांसीसी शिक्षा देकर अपनी सभ्यता के रंग में रंगना चाहते थे।
6. 1907 में टोंकिन फ्री स्कूल खोला गया। विज्ञान, स्वच्छता व फ्रांसीसी भाषा की कथाएँ शामिल थीं।
7. 1926 में साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल में आंदोलन। विवाद का कारण कतार में बैठने के लिए कह ना।
8. 1903 हनोई में ब्यूबॉनिक प्लेग की महामारी फैल गई। चूहों को पकड़ने की मुहिम शुरू हो गई।
9. होआ – हाओ आंदोलन (1939)- इस आंदोलन के संस्थापक हुइन्ह फू सो थे। वह जादू टोना करते व गरीबों की मदद करते थे। फ्रांसीसी सरकार ने इन्हें पागल घोषित कर दिया। उन्हें पागल कहकर बुलाया जाता था।
10. 1854 ई० – फ्रांसीसियों की पराजय के बाद जिनेवा में चली शांति वार्ता में वियतनामियों को देश का विभाजन मानने को बाध्य कर दिया गया। उत्तर और दक्षिणी वियतनाम दो अलग-अलग राज्य बन गए।
11. 1974 – में पेरिस में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। अमेरिका के साथ टकराव की समाप्ति।
12. 1975 ई० में एन.एल.एफ द्वारा राष्ट्रपति महल पर कब्जा व वियतनाम के दोनों राष्ट्रों को मिलाकर एक राष्ट्र की स्थापना कर दी गई।

महत्वपूर्ण शब्दावली :-
1) औपनिवेशिक व्यवस्था – वह व्यवस्था जिसमें कोई देश किसी दूसरे देश पर कब्जा करके उसका आर्थिक और राजनीतिक शोषण करे, औपनिवेशिक व्यवस्था कहलाती है।
2) समन्वयवाद – एक ऐसा विश्वास जिसमें विभिन्नताओं की बजाय समानता पर ध्यान देते हुए अलग-अलग मान्यताओं और आचारों को
एक दूसरे के साथ लाने का प्रयास किया जाता है।
3. यातना शिविर – एक प्रकार की जेल जिसमें कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही लोगों को कैद में डाल दिया जाता है व उन्हें कठोर यातनाएँ दी जाती हैं।
4) गणतंत्र – आम जनता की सहमति और जन-प्रतिनिधित्व पर आधारित शासन व्यवस्था।
5) साम्यवाद – एक राजनैतिक आंदोलन जो एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था पर विश्वास करता है जिसमें राज्य जनता की ओर से सभी उत्पादन साधनों पर नियंत्रण रखता है। इसका उद्देश्य समाज में सभी को
समान अधिकार देना है।
6) नापाम – अमेरिका में विकसित किया गया एक ऐसा ऑर्गेनिक रसायन जो धीरे-धीरे जलता है और मानव त्वचा जैसी किसी भी सतह के संपर्क में आने पर उससे चिपक जाता है व जलता रहता है।
7) स्कॉलर्स रिवोल्ट – एक आंदोलन जो 1868 में फ्रांसीसी कब्जे और ईसाई धर्म के प्रसार के खिलाफ प्रारंभ हुआ था। इस आंदोलन की बागडोर शाही दरबार के अफसरों के हाथों में थी।

महत्वपूर्ण व्यक्तित्व :
1) फान चू त्रिन्ह – वियतनाम के एक राष्ट्रवादी नेता थे जो राजतंत्र के कट्टर विरोधी थे। वे फ्रांसीसियों को देश से निकालने के लिए शाही दरबार अथवा राजा की सहायता लेने के पक्ष में नहीं थे।
2) हुइन फू सो- वे होआ होआ आंदोलन के संस्थापक थे जो 1939 में वियतनाम में प्रारंभ हुआ। वह गरीबों की सहायता करते व जादू टोना
करते।
3) फान बोई चाऊ वियतनाम के महत्वपूर्ण राष्ट्रवादी। 1903 में उन्होंने रिवोल्यूशनरी सोसाइटी (दुई वान होई) नामक एक पार्टी का गठन किया।
4) कन्फ्यूशियस – ये एक चीनी विचारक थे, उन्होंने सदाचार, व्यवहार बुद्धि और उचित सामाजिक संबंधो को आधार बनाते हुए एक दार्शनिक व्यवस्था विकसित की।


1 अंक वाले प्रश्न

1) इंडो चाइना में कौन से देश सम्मिलित हैं?

उत्तर :- वियतनाम, लाओस, कम्बोडिया


2) संरचनागत परियोजनाएँ क्या होती हैं ?

उत्तर :- ऐसी विशाल परियोजनाएँ जिनसे अर्थव्यवस्था का ढाँचा तैयार होता


3)1930 की महामंदी का वियतनाम पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर :- वियतनाम पर प्रभाव –
1) रबड़ और चावल के दाम गिर गए।
2) किसानों पर कर्जा बढ़ने लगा।
3) बेरोजगारी में तेजी से वृद्धि।

4)वियतनाम की लपलपाती चिंगारी किसे कहा जाता था और क्यों ?

उत्तर :- न्हो अल और हा तिन्ह प्रांतों को रैडिकल आंदोलन की चली आ रही एक लंबी परंपरा के कारण लपलपाती चिंगारी कहा जाता था।

5) एजेंट ऑरेंज क्या है? अमेरिकी सेनाओं ने वियतनाम पर इसका छिड़काव क्यों किया?

उत्तर :- एक ऐसा जहर जिसके छिड़काव से पेड़ों की पत्तियाँ झड़ जाती हैं, पौधे मर जाते हैं। जिन ड्रमों में इसे रखा जाता था उन पर ऑरेंज रंग की
पट्टियाँ बनी होती थीं। इस जहर का छिड़काव इसलिए किया गया क्योंकि वे वियतनाम के जंगलों को नष्ट कर देना चाहते थे।

6) उपनिवेशों को क्यों स्थापित किया गया?

उत्तर :- साम्राज्यवादी देश की भलाई के लिए।

7) . सन यात सेन कौन था?

उत्तर :- चीन के महान नेता थे।


8) कन्फयूशियस कौन था?

उत्तर :- चीनी दार्शनिक


9) 1903 में हनोई के नवनिर्मित आधुनिक भाग में कौन सी महामारी फैली थी?

उत्तर :- ब्यूबॉनिक प्लेग


10) एकतरफा अनुबंध व्यवस्था से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर :- ऐसा अनुबंध जिसके तहत मजदूरों को कोई अधिकार नहीं दिए जाते थे। शर्तों के अनुसार काम न कर पाने पर मालिक उनके खिलाफ मुकदमें दायर कर देते, उन्हें सजा देते व जेलों में डाल देते थे।


11. वियतनाम सिल्क रूट से क्यों जुड़ा था? मुख्य कारण लिखिए?

उत्तर :- वियतनाम सिल्क रूट से इसलिए जुड़ा था क्योंकि इस रास्ते से वस्तुओं लोगो और विचारों की आवाजाही थी। व्यापार के अन्य रास्तों के माध्यम से वियतनाम उन दूरवर्ती इलाकों से भी जुड़ा था।

3/5 अंक वाले प्रश्न –

1. वियतनाम पर फ्रांसीसियों के कब्जे के बाद टकराव क्यों होने लगा?कारण लिखो।

उत्तर :- 1) फ्रांसीसियों का दबाव सबसे ज्यादा सैनिक व आर्थिक मामलों में था।
2) उन्होंने वियतनामी संस्कृति को तहस-नहस करने की कोशिश की।
3) फ्रांसीसियों और उनके वर्चस्व का अहसास करने वाली हर चीज के खिलाफ वियतनाम के लोगों ने विरोध किया।
4) यहाँ से वियतनाम में राष्ट्रवाद के बीज पड़े।

2. वियतनाम की सम्पदा का शोषण करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए फ्रांसीसियों द्वारा उठाए गए कदमों की व्याख्या करो।

उत्तर :- — फ्रांसीसियों ने मेकांग डेल्टा इलाके में खेती बढ़ाने के लिए नहर बनवाई, जल निकासी का प्रबंध।
— लोगों को जबरन काम पर लगाया गया।
— चावल के उत्पादन में वृद्धि। संसार का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया।

3. फ्रांसीसियों ने वियतनाम में संरचनात्मक परियोजनाओं का निर्माण क्यों और कैसे किया?

उत्तर :- वस्तुओं के आवागमन, फौजी टुकड़ियों की आवाजाही और पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण कायम करने के लिए।
— विशाल रेल नेटवर्क का निर्माण। वियतनाम के उत्तरी व दक्षिणी भागों को जोड़ा गया।
— रेल लाइन के जरिए कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह के रास्ते से होते हुए वियतनाम को स्याम देश से जोड़ दिया गया।
— फ्रांसीसी व्यवसायियों द्वारा कारोबार में मुनाफा कमाने के लिए सरकार पर दबाव।

4. वियतनाम के बँटवारे से पूरा देश युद्ध के मोर्चे में तब्दील होकर रह गया। इस कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर :- * अपने ही लोगों और पर्यावरण की तबाही।
* तख्तापलट में बायो डाई को गद्दी से हटाया गया। दिएम की अगुवाई में एक और निरंकुश शासन की स्थापना।
* तानाशाही के खिलाफ एन.एल.एफ की स्थापना। इसने हो ची मिन्ह के नेतृत्व वाली सरकार की सहायता से देश के एकीकरण के लिए आवाज़ उठाई।

5. उन संरचनात्मक परियोजनाओं का वर्णन कीजिए, जिन्हें फ्रांसीसी उपनिवेशकों ने वियतनाम में विकसित किया।

उत्तर :- — वियतनाम के मेकोंग डेल्टा इलाके में खेती बढ़ाने के लिए सबसे
पहले वहाँ नहरें बनाई, जल निकासी प्रबंध शुरू किया।
— सिंचाई व्यवस्था का विस्तार किया गया। कई नहरें व भूमिगत जल धाराएँ बनाई गई।
— लोगों को जबरन काम पर लगाने से चावल के उत्पादन में वृद्धि हुई। वियतनाम चावल का दुनिया में 1931 तक तीसरा बड़ा निर्यातक बन चुका था।

6. उपनिवेशों का विकास करना क्यों जरूरी है? कारण लिखो।

उत्तर :- 1) उपनिवेशों का विकास गुलाम देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हुआ।
2) विकास जरूरी है जिससे मुनाफा कमाया जा सकता है।
3) जीवन स्तर बेहतर होगा, वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे।
4) बाजार फैलेगा तो फ्रांसीसी व्यापारियों को फायदा होगा।

7. फ्रांसीसियों की शिक्षा नीति का वर्णन करें। वियतनाम में टोंकिन फ्री स्कूल खोलने के उद्देश्य की व्याख्या कीजिए।

उत्तर :- फ्रांसीसियों की शिक्षा नीति :-
1) मुख्य प्रश्न – शिक्षा किस हद तक दी जाए, किस भाषा में दी जाए।
2) धनी वर्ग पर चीनी संस्कृति का गहरा प्रभाव।
3) परंपरागत शिक्षा को तहस नहस किया। फ्रांसीसी किस्म के स्कूल खुले।
4) फ्रांसीसी भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने का दबाव नीति निर्माताओं द्वारा। कुछ का विचार था कि छोटी कक्षाओं में वियतनामी और बड़ी में फ्रांसीसी भाषा में शिक्षा दी जाए।
5) किताबों में फ्रांसीसियों और औपनिवेशक शासन का गुणगान। वियतनामियों को आदिम और पिछड़ा दर्शाया जाता जो बौद्धिक कार्य के लायक नहीं हैं।
6) 1907 में पश्चिमी शिक्षा प्रदान करने के लिए टोंकिन फ्री स्कूल खोला गया। स्कूल छात्रों को पश्चिमी शैली को अपनाने के लिए उकसाता था।
7) विद्यार्थियों को जानबूझकर फेल करना ताकि वे अच्छी नौकरियों की योग्यता प्राप्त न कर सकें।
8) पुस्तकों और पाठ्यक्रम का शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा विरोध हुआ।
9) शिक्षा के खिलाफ चल रहा संघर्ष धीरे-धीरे
उपनिवेशवाद के विरोध और स्वतंत्रता के हक में चलने वाला व्यापक आंदोलन बन गया।

टोंकिन फ्री स्कूल खोलने का उद्देश्य :-
1) फ्रांसीसी वियतनामियों को पश्चिमी ढंग की शिक्षा देना चाहते थे।
2) विज्ञान, स्वच्छता, फ्रांसीसी भाषा और साहित्य शामिल थे।
3) कक्षाएँ शाम को लगती थीं। इनके लिए फीस अलग देनी होती थी।
4) बच्चों को छोटे-छोटे बाल रखने की सलाह दी जाती थी।

8. चीन में शुरू हुए पूर्व की ओर चलो आन्दोलन की क्या विशेषताएँ थीं ?

उत्तर :- 1) 20वीं सदी के शुरू में चीन में शुरू।
2) 300 वियतनामी विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने जापान गए।
3) वियतनाम से फ्रांसीसीयों को निकालना।
4) जापानियों से हथियार व समर्थन की मांग।
5) वियतनामी विद्यार्थियों ने टोकियो में रेस्टोरेशन सोसायटी की स्थापना की।

9. स्वतंत्रता के लिए वियतनाम के संघर्ष में महिलाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर :- 1) 1960 के दशक के पत्र-पत्रिकाओं में दुश्मन से लोहा लेती औरतों की तस्वीर छपने लगी।
2) योद्धा के रूप में ही नहीं बल्कि कामगारों के रूप में भी पेश किया गया।
3) बूढ़ी या जवान औरतों को निःस्वार्थ भाव से देश की रक्षा करते दिखाया।

10. हो चि मिन्ह मार्ग की चार विशेषताओं का वर्णन करो।

उत्तर :- 1) इस मार्ग पर सड़कों का एक बड़ा जाल है जो पड़ोसी देशों से जोड़ता है।
2) फुटपाथों और सड़कों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से सैनिक व रसद सामग्री भेजी जाती थी।
3) इन मार्गो पर जगह-जगह छोटे सैनिक अड्डे व अस्पताल बने थे।
4) माल ढुलाई का काम कुली करते थे।

11. फ्रांसीसियों द्वारा प्लेग की समस्या को हल करने के लिए कौन से कदम उठाए गए?

उत्तर :- 1) 1902 में चूहों को पकड़ने की मुहिम शुरू की गई।
2) चूहे के बदले ईनाम दिया जाने लगा।
3) ईनाम के चक्कर में चूहे पकड़ते और छोड़ देते।
4) हनोई नगर में सफाई अभियान।


12. वियतनाम युद्ध किस प्रकार समाप्त हुआ? तीन बिंदुओं द्वारा व्याख्या कीजिए?

उत्तर :- 1) सरकारी नीति के खिलाफ व्यापक प्रतिक्रियाओं ने युद्ध खत्म करने के प्रयासों को बल प्रदान किया।
2) जनवरी 1947 में पेरिस के एक शांति समझौते में पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से अमेरिका के साथ चल रहा टकराव तो खत्म हो गया लेकिन साइगाल शासन और एन.एल.एफ. के बीच
टकराव जारी रहा।
3) 30 अप्रैल 1975 को एन.एल.एफ. ने राष्ट्रपति के महल पर कब्जा कर लिया और वियतनाम के दोनों हिस्सों को मिलाकर एक राष्ट्र की स्थापना कर दी गई।

प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

 प्रश्न 1. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें

(क) उपनिवेशकारों के सभ्यता मिशन का क्या अर्थ था?
(ख) हुइन फू सो।

उत्तर:- (क) उपनिवेशवाद में आर्थिक शोषण के अतिरिक्त उपनिवेशों को सभ्य बनाने का विचार भी काम कर रहा था। जिस तरह भारत के अंग्रेज़ दावा करते थे, उसी प्रकार फ्रांसीसियों का दावा था कि वे वियतनाम के लोगों को आधुनिक सभ्यता से परिचित करा रहे हैं। उनका विश्वास था कि यूरोप में सबसे विकसित सभ्यता कायम हो चुकी है। इसलिए वे मानते थे कि उपनिवेशों में आधुनिक विचारों का प्रसार करना यूरोपियों को ही दायित्व है और इस दायित्व की पूर्ति करने के लिए अगर उन्हें स्थानीय संस्कृतियों, धर्मों व परंपराओं को भी नष्ट करना पड़े तो इसमें कोई बुराई नहीं है। वैसे भी यूरोपीय शासक इन संस्कृतियों, धर्मों, परंपराओं को पुराना व बेकार मानते थे। उन्हें लगता था कि ये चीजें आधुनिक विकास को रोकती हैं।

(ख) हुइन फू सो-हुइन फू सो ‘होआ हाओ’ आंदोलन के संस्थापक थे। यह आंदोलन 1939 में शुरू हुआ था। यह आंदोलन 19वीं सदी के उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों में उपजे विचारों से प्रेरित था । हुइन फू सो जादू-येना और गरीबों की मदद किया करते थे। व्यर्थ के खर्चे के खिलाफ़ उनके उपदेशों का लोगों पर काफी असर था। वे बालिका वधुओं की खरीद-फरोख्त, शराब व अफ़ीम के प्रबल विरोधी थे। फ्रांसीसियों ने हुइन फू सो के आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया। उन्होंने फू सो को पागल घोषित कर दिया। फ्रांसीसी उन्हें पागल बोन्जे कहकर बुलाते थे। 1914 में फ्रांसीसी डॉक्टरों ने मान लिया कि वे पागल नहीं हैं। इसके बाद उन्हें वियतनाम से निष्कासित करके लाओस भेज दिया।

प्रश्न 2. निम्नलिखित की व्याख्या करें

• (क) वियतनाम के केवल एक-तिहाई विद्यार्थी ही स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे।
• (ख) फ्रांसीसियों ने मेकोंग डेल्टा क्षेत्र में नहरें बनवाना और जमीनों को सुखाना शुरू किया।
• (ग) सरकार ने आदेश दिया कि साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल उस लड़की को वापस कक्षा में ले, जिसे स्कूल से निकाल दिया गया था।
• (घ) हनोई के आधुनिक नवनिर्मित इलाकों में चूहे बहुत थे।

उत्तर:- (क) वियतनाम में स्कूलों में दाखिला लेने की ताकत वहाँ के धनी वर्ग के पास ही थी। यह देश की आबादी का एक छोटा हिस्सा था। जो स्कूल में दाखिला ले पाते थे, उनमें से बहुत थोड़े से विद्यार्थी ही ऐसे होते थे जो सफलतापूर्वक स्कूल की पढ़ाई पूरी कर पाते थे। दरअसल बहुत सारे बच्चों को तो आखिरी साल की परीक्षा में जानबूझ कर फेल कर दिया जाता था ताकि वे अच्छी नौकरियों के लिए योग्यता प्राप्त न कर सकें। आमतौर पर दो-तिहाई विद्यार्थियों को इसी तरह फेल कर दिया जाता था। 1925 में 1.7 करोड़ की आबादी में स्कूल की पढ़ाई पूरी करने वालों की संख्या 400 से भी कम थी।

(ख) फ्रांसीसियों ने वियतनाम के मेकोंग डेल्टा इलाके में खेती बढ़ाने के लिए सबसे पहले वहाँ नहरें बनवाईं और जमीनों को सुखाने के लिए जल निकासी का प्रबंध शुरू किया। सिंचाई की विशाल व्यवस्था बनाई गई। बहुत सारी नई नहरें और भूमिगत जल-धाराएँ बनाई गईं। ज्यादातर लोगों को जबरदस्ती काम पर लगाकर निर्मित की गई इस व्यवस्था से चावल के उत्पादन में वृद्धि हुई।

(ग) 1926 में साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल में एक बड़ा आंदोलन हुआ। यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब एक कक्षा में अगली सीट पर बैठी वियतनामी लड़की को पिछली कतार में जाकर बैठने के लिए कहा गया क्योंकि अगली सीट पर एक फ्रांसीसी लड़की को बैठना था। वियतनामी लड़की ने सीट छोड़ने से इनकार कर दिया। स्कूल का प्रिंसिपल एक फ्रांसीसी था। उसने, उस लड़की को स्कूल से निकाल दिया। अन्य विद्यार्थियों ने भी जब प्रिंसिपल के फैसले का विरोध किया तो उन्हें भी स्कूल से निकाल दिया गया। इसके बाद यह विवाद बहुत फैल गया। हालात बेकाबू होने लगे तो सरकार ने आदेश दिया कि लड़की को दोबारा स्कूल में वापस ले लिया जाए। प्रिंसिपल ने लड़की को दाखिला तो दे दिया लेकिन ये ऐलान भी कर दिया कि ”मैं सारे वियतनामियों को पाँव तले कुचल कर रख दूंगा।”

(घ) हनोई के फ्रांसीसी आबादी वाले हिस्से को एक खूबसूरत और साफ-सुथरे शहर के रूप में बनाया गया था। वहाँ चौड़ी सड़कें थीं और जल-निकासी का बढ़िया इंतजाम था। शहर के आधुनिक भाग में लगे विशाल सीवर आधुनिकता का प्रतीक थे। यही सीवर चूहों को पनपने के लिए भी आदर्श स्थान साबित हुए। ये सीवर चूहों की निर्बाध आवाजाही के लिए भी उचित थे। इनमें चलते हुए चूहे पूरे शहर में बेखटके घूमते थे और इन्हीं पाइपों के रास्ते चूहे फ्रांसीसियों के चाक-चौबंद घरों में घुसने लगे।

प्रश्न 3. टोंकिन फ्री स्कूल की स्थापना के पीछे कौन-से विचार थे? वियतनाम में औपनिवेशिक विचारों के लिहाज से यह उदाहरण कितना सटीक है?

उत्तर:- 1907 में येकिन फ्री स्कूल की स्थापना की गई। इस स्कूल के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार थे

1. पश्चिमी ढंग से शिक्षा देना था।

2. इस शिक्षा में विज्ञान, स्वच्छता और फ्रांसीसी भाषा की कक्षाएँ भी शामिल थीं।

3.यह वियतनाम में औपनिवेशिक विचारों का सटीक उदाहरण है क्योंकि स्कूल की राय में सिर्फ विज्ञान और पश्चिमी | विचारों की शिक्षा प्राप्त कर लेना ही काफी नहीं था, बल्कि आधुनिक बनने के लिए वियतनामियों को पश्चिम के लोगों जैसी ही दिखना भी पड़ेगा।

4. यह स्कूल अपने छात्रों को पश्चिमी शैलियों को अपनाने के लिए उकसाता था। बच्चों को छोटे-छोटे बाल रखने की | सलाह दी जाती थी। वियतनामियों के लिए यह अपनी पहचान को पूरी तरह बदल डालने वाली बात थी। वे तो पारंपरिक रूप से लंबे ही बाल रखते थे।


प्रश्न 4. वियतनाम के बारे में फान यू त्रिन्ह का उद्देश्य क्या था? फान बोई चाऊ और उनके विचारों में क्या भिन्नता थी?

उत्तर:- फान यू त्रिन्ह वियतनाम के प्रमुख राष्ट्रवादी नेताओं में से एक थे। वे राजशाही या राजतंत्र के कट्टर विरोधी थे। उन्हें यह
स्वीकार नहीं था कि फ्रांसीसियों को देश से निकालने के लिए शाही दरबार या राजा की सहायता ली जाए। वे एक लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना करना चाहते थे। पश्चिम के लोकतांत्रिक आदर्शों से प्रभावित चिन्ह पश्चिमी सभ्यता को पूरी तरह खत्म करने के खिलाफ़ थे। उन्हें मुक्ति के फ्रांसीसी क्रांतिकारी आदर्श तो पसंद थे, लेकिन उनका आरोप था कि खुद फ्रांसीसी ही उन आदर्शों का अनुसरण नहीं कर रहे हैं। उनकी माँग थी कि फ्रांसीसी शासक वियतनाम में वैधानिक एवं शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना करें और कृषि व उद्योगों का विकास करें।

फान बोई चाऊ भी एक राष्ट्रवादी नेता थे। इन्होंने 1903 में रेवोल्यूशनरी सोसायटी नामक पार्टी का गठन किया और तभी से वे उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के अहम नेता बने गए थे। इनके विचार फान बोई चाऊ से विपरीत थे। त्रिन्ह राजशाही को उखाड़ फेंकना चाहते थे, जबकि बोई चाऊ चाहते थे कि औपनिवेशिक शासन की समाप्ति के लिए राजशाही का प्रयोग किया जाए। त्रिन्ह की योजना थी कि लोगों को राजशाही के खिलाफ़ खड़ा किया जाए और फान बोई चाऊ इस योजना से असहमत थे । वास्तव में दोनों का लक्ष्य एक ही था लेकिन रास्ते अलग-अलग थे।

चर्चा करें

प्रश्न 1. इस अध्याय में आपने जो पढ़ा है, उसके हवाले से वियतनाम की संस्कृति और जीवन पर चीन के प्रभावों की चर्चा करें।

उत्तर:- इस अध्याय के आधार पर देखें तो वियतनाम की संस्कृति और जीवन पर चीन का प्रभाव स्पष्ट नजर आता है, जो इस प्रकार है

1. वियतनाम के प्रारंभिक इतिहास को देखें तो पता चलता है कि पहले यहाँ बहुत सारे समाज रहते.थे और पूरे इलाके | पर शक्तिशाली चीनी साम्राज्य का वर्चस्व था। जब वहाँ स्वतंत्र देश की स्थापना कर ली गई तो भी वहाँ के शासकों ने न केवल चीनी शासन व्यवस्था को बल्कि चीनी संस्कृति को भी अपनाए रखा।
2. वियतनाम समुद्री सिल्क रूट से भी जुड़ा हुआ था। इस कारण उसके चीन के साथ आर्थिक संबंध भी थे। इस रास्ते | से वस्तुओं, लोगों और विचारों को चीन के साथ आदान-प्रदान चलता रहता था।

3. इन दोनों देशों में बौद्ध धर्म और कन्फ्युशियस धर्म प्रमुख रहे जिन्होंने दोनों देशों के आपसी संबंधों को काफी मजबूत बना दिया।

4. वियतनाम का अभिजात वर्ग चीनी भाषा और कन्फ्यूशिसवाद की शिक्षा लेते थे।

5. साम्राज्यवादी शक्तियों ने जब रेल, सड़क आदि के माध्यम से इन दोनों देशों को एक प्रशासनिक नियंत्रण में लाने का प्रयास किया तो ये देश और निकट आ गए।

6. विदेशी साम्राज्यवाद का मुकाबला करने के लिए दोनों को एक जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिससे इनके संबंध और घनिष्ठ हो गए।
इस प्रकार धीरे-धीरे वियतनाम ने चीन की संस्कृति में अपने आपको रंग लिया।


प्रश्न 2. वियतनाम में उपनिवेशवाद विरोधी भावनाओं के विकास में धार्मिक संगठनों की भूमिका क्या थी?

उत्तर:- वियतनामियों में धार्मिक विश्वास बौद्ध धर्म, कन्फ्यूशियसवाद और स्थानीय रीति-रिवाजों पर आधारित थे। फ्रांसीसी मिशनरी वियतनाम में ईसाई धर्म के बीज बोने का प्रयास कर रहे थे। 18वीं सदी से ही बहुत सारे धार्मिक आंदोलन पश्चिमी शक्तियों के प्रभाव और उपस्थिति के खिलाफ़ जागृति फैलाने का प्रयास कर रहे थे। इसके दो उदाहरण ये हैं

• स्कॉलर्स रिवोल्ट – 1868 का स्कॉलर्स रिवोल्ट फ्रांसीसी कब्जे और ईसाई धर्म के प्रसार के खिलाफ़ शुरुआती आंदोलनों में से था। इस आंदोलन की बागडोर शाही दरबार के अफसरों के हाथों में थी। ये अफ़सर कैथोलिक धर्म और फ्रांसीसी सत्ता के प्रसार से नाराज थे। इन्होंने एक हजार से ज्यादा ईसाइयों का कत्ल कर डाला। कैथोलिक मिशनरी 17 वीं सदी के शुरू से ही स्थानीय लोगों को ईसाई धर्म से जोड़ने में लगे हुए थे। 18वीं सदी के अंत तक उन्होंने लगभग 3 लाख लोगों को ईसाई बना लिया था। फ्रांसीसियों ने 1868 के आंदोलन को तो कुचल दिया, किंतु इस बगावत ने देशभक्तों में उत्साह का संचार जरूर किया।

• होआ हाओ आंदोलन – यह आंदोलन 1939 में शुरू हुआ था। यह एक ऐसा धार्मिक आंदोलन था जो औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध चलने वाले आंदोलनों का पक्षधर था । हरे-भरे मेकोंग डेल्टा इलाके में इसे भारी लोकप्रियता मिली। इस आंदोलन के संस्थापक का नाम हुइन्ह फू सो था। वे जादू-टोना और गरीबों की मदद किया करते थे। फ्रांसीसियों ने इस आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया।
इस तरह के आंदोलनों का राष्ट्रवाद की मुख्यधारा के साथ अंतर्विरोध संबंध रहता था। राजनीतिक दल ऐसे आंदोलनों से जुड़े जन-समर्थन का फायदा उठाने की तो कोशिश करते थे, लेकिन उनकी गतिविधि से बेचैन भी रहते थे।

इसके बावजूद साम्राज्यवादी भावनाओं को झकझोरने में ऐसे आंदोलनों के योगदान को कम करके नहीं आँका जा सकता।

प्रश्न 3. वियतनाम युद्ध में अमेरिकी हिस्सेदारी के कारणों की व्याख्या करें । अमेरिका के इस कृत्य से अमेरिका में जीवन पर क्या-क्या असर पड़े?

उत्तर:- वियतनाम युद्ध में अमेरिका की हिस्सेदारी के प्रमुख कारण इस प्रकार थे –

1. अमेरिका के नीति निर्माता इस बात से परेशान थे कि अगर यहाँ पर हो ची मिन्ह की सरकार अपने प्रयासों में सफल हो गई तो यहाँ पर इस क्षेत्र के आस-पास के देशों में भी साम्यवादी सरकारें स्थापित हो जायेंगी।

2. इससे एशिया महाद्वीप में साम्यवादी विचारधारा को मजबूत आधार मिल जाएगा और पूँजीवादी देश अन्य नए | साम्राज्यवादी हितों को इस महाद्वीप में पूरा नहीं कर सकेंगे।

3. अमेरिका ने फ्रांस की इस युद्ध में मदद इसलिए भी की कि वह विश्व के अन्य देशों को यह बताना चाहता था कि वह | पूँजीवादी देशों का सबसे बड़ा शुभचिंतक है। अत: हर विपत्ति के समय में वह उनकी यथासंभव मदद करेगा।

4. अमेरिका वियतनाम के एकीकरण के पक्ष में भी नहीं था। अतः जब ‘हो ची मिन्ह’ के नेतृत्व वाली सरकार की सहायता से ‘एन.एल.एफ’ (नेशनल लिबरेशन फ्रंट) ने देश के एकीकरण की आवाज उठाई, तो अमेरिका इसकी बढ़ती ताकत व प्रस्तावों से भयभीत हो गया तथा सोचने लगा कि कहीं पूरे वियतनाम पर साम्यवादियों को प्रभाव न बढ़ जाए। इसलिए इसने उ० वियतनाम में अपनी फौजें और युद्ध सामग्री एकत्र करनी प्रारंभ कर दी।

जब अमेरिका युद्ध में फ्रांस की मदद के लिए सम्मिलित हो गया, तब इसका प्रभाव वियतनामियों के साथ-साथ अमेरिका पर भी पड़ा। उसे भयंकर क्षति उठानी पड़ी। इस युद्ध में उसके 47,244 सैनिक मारे गए और 3,03,704 घायल हुए। अमेरिकी सरकार को अपनी ही जनता के विरोध का सामना इस प्रकार से करना पड़ा

1. ज्यादातर अमेरिकी यह मानते थे कि उनका देश एक ऐसे युद्ध में अपनी सैन्य शक्ति नष्ट कर रहा है जिसे जीतना संभव नहीं है।

2. अमेरिकी जनता का यह भी मानना था कि यदि अमेरिका इस युद्ध में हारा तो विश्व में उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचेगी, अत: अमेरिका को युद्ध से हट जाना चाहिए।

3. युद्ध में सैनिकों की आवश्यकता पूर्ति के लिए अमेरिका में उन युवाओं को भर्ती किया जा रहा था जो अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग से संबंधित थे।
अमेरिका के अभिजात वर्ग के युवाओं को युद्ध से दूर रखा जा रहा था। इससे अमेरिका के अंदर अमेरिकी समाज में तनाव उत्पन्न हो गया जिससे सरकार को गृहयुद्ध का भय होने लगा।

4. अमेरिकी मीडिया और फिल्म निर्माण क्षेत्रों में भी वियतनामी युद्ध की पृष्ठभूमि पर कई फिल्में बनीं जिससे अमेरिकी जनमत भी वियतनाम की तरफ झुकने लगा।

अंतत: अमेरिका में ही इस युद्ध के कारण काफी तनाव उत्पन्न हो गया।


प्रश्न 4. अमेरिका के खिलाफ वियतनामी युद्ध का निम्नलिखित दृष्टिकोण से मूल्यांकन कीजिए

(क) हो-ची-मिन्ह भूल-भूलैया मार्ग पर माल ढोने वाला कुली
(ख) एक महिला सिपाही

उत्तर:- (क) हो-ची-मिन्ह भूल-भूलैया मार्ग पर माल ढोने वाले कुली की भूमिका – अमेरिका और वियतनाम के युद्ध में हो-ची-मिन्ह भूल-भूलैया मार्ग पर माल ढोने वाले कुलियों ने युद्ध में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मार्ग का प्रयोग देश के उत्तर से दक्षिण की ओर सैनिक व रसद पहुँचाने के लिए होता था जिससे वियतनामी सैनिक अमेरिका का मुकाबला कर पाये। इस मार्ग पर सामान पहुँचाने वाले कुली लगभग 25 किलो सामान पीठ पर या 70 किलो सामान साईकिलों पर लेकर निकल जाते थे। अमेरिकी सेना ने वियतनामी सैनिकों के लिए रसद की आपूर्ति को बंद करने के लिए कई बार इस मार्ग पर बम बरसाए। किंतु वे इसे ध्वस्त नहीं कर पाए क्योंकि वहाँ के लोग हर हमले के बाद उसकी फौरन मरम्मत कर लेते थे। इससे पता चलता है कि वियतनाम के लोग अपने सीमित संसाधनों को सूझबूझ से प्रयोग करना जानते थे।

(ख) एक महिला सैनिक – त्रियू अयू: विश्व के लगभग प्रत्येक देश में जहाँ पर राष्ट्रवादी आंदोलन हुए, महिलाओं की छवि को एक योद्धा के रूप में चित्रित करके जन प्रेरणा के लिए उसका प्रयोग हुआ। वियतनाम में भी एक ऐसी ही महिला ‘त्रियू अयू’ थी। इनको जन्म तीसरी सदी में हुआ था । वह बचपन में ही अनाथ हो गई थी। इस कारण वह अपने भाई के साथ रहने लगी। जब वे बड़ी हुईं तो इन्होंने अपना घर छोड़ दिया और जंगल में रहने लगीं। यहां इन्होंने एक विशाल सेना का गठन किया और चीनियों के वर्चस्व को चुनौती दी । जब उनकी सेना इस संघर्ष में हार गई, तो इन्होंने जल में डूबकर अपनी जान दे दी। इस प्रकार वियतनामी मानसम्मान की रक्षा करने वाली वे एक शहीद ही नहीं कहलाईं, बल्कि एक देवी की तरह पूजी भी गईं। राष्ट्रवादियों ने इनकी छवि का प्रयोग वियतनामी और अमेरिकी युद्ध में जनता में साहस की भावना उत्पन्न करने के लिए किया।

प्रश्न 5. वियतनाम में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में महिलाओं की क्या भूमिका थी? इसकी तुलना भारतीय राष्ट्रवादी संघर्ष में महिलाओं की भूमिका से कीजिए।

उत्तर:- वियतनाम में साम्राज्यवादी विरोधी संघर्ष में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बहुत बड़ी संख्या में महिलाएँ प्रतिरोध आंदोलन में शामिल हो गईं। वे घायलों की मरहम पट्टी करने, भूमिगत कमरे व सुरंगे बनाने और दुश्मनों से मोर्चा लेने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगीं। उन्होंने छह हवाई पटियाँ बनाई, दस हजार बमों को बेकार किया, हजारों किलो माल ढोया, हथियार व गोला बारुद की सप्लाई जारी रखी और और 15 जहाजों को मार गिराया। 1965-75 के दौरान इस मार्ग पर चलने वाले युवाओं में 70-80 प्रतिशत लड़कियाँ थीं। एक सैनिक इतिहासकार के अनुसार वियतनामी सेना में 15 लाख महिलाएँ थीं। इन सबने इस संघर्ष में अद्वितीय साहस का परिचय दिया था।

राष्ट्रवादी भारतीय महिलाओं की वियतनामी राष्ट्रवादी महिलाओं से तुलना – भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन में महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया था। परंतु इनके विरोध के तरीके वियतनामी महिलाओं से भिन्न थे। जैसे –

1. 1857 के विद्रोह में रानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध में सम्मिलित होकर और लखनऊ की बेगम ज़ीनत महल ने महल में ही रहकर अपनी सेना का नेतृत्व किया।

2. भारतीय महिलाओं ने युद्धों की बजाए जन आंदोलनों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाई, जैसे-होमरूल आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन आदि।

3. भारतीय महिलाओं के संघर्ष का तरीका शांतिपूर्ण विरोध करने का था। धरने पर बैठना और जलसों के आयोजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाना आदि उनका प्रमुख कार्य था।

4. यद्यपि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं ने शांतिपूर्ण मार्ग अपनाकर अपना विरोध ब्रिटिश शासन के प्रति प्रकट | किया, परंतु जब आज़ाद हिंद फौज का सुभाषचंद्र बोस जी ने गठन किया तो भारतीय महिलाएं इसमें भी भर्ती हुईं। इस प्रकार भारतीय महिलाओं ने शांतिपूर्ण विरोध के मार्ग को अधिक अपनाया था।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. दक्षिण अमेरिका के किसी एक देश में साम्राज्यवाद-विरोधी आंदोलन के बारे में पता लगाएँ । कल्पना कीजिए कि इस देश का एक स्वतंत्रता सेनानी वियेतमिन्ह के एक सिपाही से मिलता है; वे दोस्त बन जाते हैं और अपने-अपने देश में स्वतंत्रता संघर्षों के अनुभवों की चर्चा करने लगते हैं। उनके बीच क्या बातचीत हो सकती है, उसे लिखें।

उत्तर:- जब द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सभी उपनिवेशो में साम्राज्यवाद के विरूद्ध संघर्ष प्रारंभ हुआ तब संघर्ष द० अमेरिका (लैटिन अमेरिका) के देशों में भी हुआ। यहाँ पर इन देशों की स्वतंत्र सरकारें बनीं । यहाँ के देश हैं-अर्जेण्टाइना, चिली, उरूग्वे, परागुआ और क्यूबा। अर्जेण्टाइना का साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलन

1. द० अमेरिका के इतिहास में अर्जेण्टाइना में नए शासन की स्थापना एक नवयुग का श्री गणेश था।

2. 24 फरवरी, 1946 को जे.डी. पेरा के नेतृत्व में नई सरकार बनी। वे स्वयं राष्ट्रपति नियुक्त हुए।

3. सरकार को जन साधारण का समर्थन प्राप्त था।

4. पेरा ने अपने देश के आर्थिक विकास के लिए कई जनहित कार्य किए। जैसे उद्योगों की प्रगति, रेल, टेलिफोन का विकास आदि।

5. देश की सुरक्षा के लिए सैनिक सुदृढ़ता के कार्य भी किए गए।

6. 14 सितंबर 1953 को पेरा के विरुद्ध सैनिक विद्रोह हुआ और यहाँ पर सैनिक शासन की स्थापना हुई।

जब दोनों देशों के सैनिक आपस में एक दूसरे से मिलेंगे तो वे संभवत: यह बातचीत करेंगे

1. दोनों अपने-अपने देशों में अमेरिका के विरुद्ध संघर्ष के बारे में बात करेंगे कि कैसे उनके देश के लोगों ने अमेरिका के प्रभुत्व को चुनौती देकर उसे हराया।

2. वियतनामी सैनिक जब अर्जेण्टाइना के सैनिकों को अपने देश के छात्रों, महिलाओं के योगदान के विषय में बताएगा | तो अर्जेण्टाइना का सैनिक भी बताएगा कि उसके देश में भी इन वर्गों ने संघर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
3. वियतनामी सैनिक संघर्ष के बाद स्थापित हुई सरकार के विषय में भी बता सकता है। अर्जेण्टाइना का सैनिक भी | बताएगा कि उसके देश की नई सरकार ने भी कई जनहित कार्य किए हैं ताकि देश का विकास हो सके।

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