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class 10 history chapter 3 solution hindi

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अध्याय – 3
भारत में राष्ट्रवाद

महत्वपूर्ण घटनायें । तथ्य :-
1. 1885 ई० – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना।
2. 1915 में महात्मा गांधी भारत लौटे। इससे पहले वे दक्षिण अफ्रीका में थे। भारत आने के उपरांत 1916 में उन्होंने नील की खेती कर रहे
किसानों की मदद के लिए चंपारन सत्याग्रह, 1917 में गुजरात के किसानों की मदद के लिए खेड़ा सत्याग्रह व 1918 में सूती कपड़ा कारखाने के मज़दूरों के लिए अहमदाबाद मिल सत्याग्रह का आयोजन किया।
3. 18 मार्च, 1919 में रॉलेट एक्ट कानून के विरूद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया। इस कानून में राजनीतिक कैदियों को दो साल तक बिना
मुकदमा चलाए जेल में बंद रखने का प्रावधान था।
4. 13 अप्रैल, 1919 जलियाँवाला बाग हत्याकाँड। पंजाब के अमृतसर जिले में जनरल डायर के आदेश पर सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी गई।
5. 1920-22 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग द्वारा असहयोग एवं खिलाफत आंदोलन चलाया गया। यह निर्णय 1920 में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में हुआ।
6. 1922 में गोरखपुर स्थित चौरी-चौरा में बाज़ार से गुजर रहा एक शांतिपूर्ण जुलूस पुलिस के साथ हिंसक टकराव में बदल गया। इस हिंसक घटना के कारण गाँधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
7. 1928 में जब साइमन कमीशन भारत पहुँचा तो उसका विरोध साइमन वापस जाओ के नारों से हुआ।
8. 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की माँग की। 26 जनवरी, 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया।
9. 1930 में गाँधीजी ने वायसराय इर्विन को एक खत लिखा जिसमें उन्होने 11 माँगों का उल्लेख किया। माँगों के न माने जाने पर सविनय
अवज्ञा आंदोलन छेड़ने की बात की।
10. 11 मार्च, 1930 को गाँधीजी ने 78 वॉलंटियरों के साथ नमक कानून तोड़ते हुए डांडी यात्रा की शुरूआत की और सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ हो गया।
11. 1931 में गाँधीजी ने अस्थाई रूप से सविनय अवज्ञा आंदोलन को रोक दिया व द्वितीय गोल मेज सम्मेलन में भाग लेने लंदन गए। यह वार्ता
बीच में ही टूट गई व उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। वापस आकर आंदोलन फिर शुरू किया जो 1934 तक मंद पड़ते-पड़ते समाप्त हो गया।
12. पूना पैक्ट – दूसरे गोल मेज सम्मेलन में अलग निर्वाचन क्षेत्रों के सवाल को लेकर डॉ अंबेडकर एवं गाँधीजी के बीच काफी वाद-विवाद हुआ। अंत में पूना पैक्ट के तहत पूर्व घोषित पिछड़ा वर्ग चुनाव क्षेत्र को समाप्त कर दिया व उनके लिए कुल 148 स्थान आरक्षित रखे गए।

भारत में राष्ट्रवाद
1. 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम।
2. 1870 बंकिमचंद्र द्वारा वंदे मातरम की रचना।
3. 1885 में कांग्रेस की स्थापना व्योमेश चंद्र बनर्जी प्रथम अध्यक्ष।
4. 1892 में दादा माई नैरोजी ब्रिटिश संसद में चुने जाने वाले पहले भारतीय बने। उन्हें द ग्रैंड ओल्डमैन भी कहते है।
5. 1905 में बंगाल का विभाजन।
6. 1905 मे कांग्रेस नरम दल व गरम दल में विभाजित हुई।
7. 1905 अवीन्द्रनाथ टैगोर ने भारत माता का चित्र बनाया।
8. 1906 शौकत अली व मुहम्मद अली द्वारा मुस्लिम लीग की स्थापना।
9. 1911 दिल्ली दरबार का आयोजन व बंगाल विभाजन रद्द।
10. 1914 प्रथम विश्व युद्ध का आरम्भ।
11. 1915 महात्मा गाँधी का स्वदेश लौटना।
12. 1918 प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति। अंग्रेजी द्वारा स्वशासन की माँग को नकारना व बदले में रॉलेट एकट जैसा काला कानून देना।
13. 1919 जलियाँवाला बाग हत्साकाण्ड व असहयोग आंदोलन की शुरूआत।
14. 1919 में खिलाफत आंदोलन की शुरूआत।
15. 1922 चौरी-चोरा में हुई हिंसक घटना के बाद असहयोग आंदोलन की वापसी।
16. 9 अगस्त 1925 को काकोरी में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी खजाना ले जा रही ट्रेन लूट ली।
17. 1927 में साइमन कमीशन भारत आया जिसका विरोध करते हुए लाला लाजपत राय की मृत्यु हुई।
18. 8 अप्रैल 1929 में भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त ने असेम्बली पर बम फेंका।
19. 1930 गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन आरम्भ किया।
20. 23 मार्च 1931 का भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव को फांसी दी गई।
21. 1931 में गाँधी-इरविन समझौता व सविनय अवज्ञा आंदोलन की समाप्ति।
22. 1932 में गाँधी व अम्बेडकर के मध्य पूना पैक्ट।
23. 1933 में रहमत चौधरी ने सर्व प्रथम पाकिस्तान की मांग की।
24. 1935 में भारत शासन अधिनियम व प्रांतीय सरकारो का गठन।
25. 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध का प्रारंभ।
26. 1942 भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत गाँधी जी ने करो व मरो की माँग की।
27. 1945 अमेरिका का जापान पर परमाणु हमला। व द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति।
28. 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वंतत्रता मिली।

महत्वपूर्ण शब्दावली –
1. सत्याग्रह – सत्याग्रह का अर्थ है सत्य के लिए आग्रह करना। यदि उद्देश्य सच्चा है और अन्याय के खिलाफ है तो उत्पीड़न के खिलाफ मुकाबला करने के लिए शारीरिक बल की आवश्यकता नहीं है।
सत्याग्रही केवल अहिंसा के सहारे भी अपने संघर्ष में सफल हो सकता है।
2. बहिष्कार – किसी के साथ संपर्क रखने या जुड़ने से इन्कार करना
या गतिविधियों में हिस्सेदारी, चीजो की खरीद व इस्तेमाल से इन्कार
करना। यह विरोध का एक रूप है।
3. स्वदेशी – अपने देश में बनी वस्तुओं, देशी संस्थाओं, अदालतों का
प्रयोग करना जिससे स्वदेशी उद्योगों के हितों को प्रोत्साहन मिले।
4. सविनय अवज्ञा – विनम्रतापूर्वक सरकार की आज्ञा की अवहेलना करना जिससे ब्रिटिश सरकार शासन न चला पाए। इसे गाँधीजी ने प्रारंभ किया।
5. खलीफा – मुसलमानों के आध्यात्मिक गुरू।
6. बेगार – बिना किसी पारिश्रमिक के किसी से काम करवाना।
7. हरिजन – गाँधीजी द्वारा अछूतों को हरिजन या ईश्वर की संतान बताया गया।
8. मार्शल लॉ – कयूं के दौरान वह स्थिति जिसमें सेना को किसी के बाहर दिखने पर गोली मार देने के कड़े निर्देश होते हैं।
9. पिकेटिंग – प्रदर्शन या विरोध का एक ऐसा स्वरूप जिसमें लोग किसी
दुकान, फैक्ट्री, दफ्तर के भीतर जाने का रास्ता रोक लेते हैं।

1 अंक वाले प्रश्न :-

1. गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का आरंभ किन महम्वपूर्ण घटनाओं के साथ किया?

उत्तर :- 1) नमक कानून तोड़ कर
2) स्वदेशी वस्तुओं को अपनाकर व विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके।


2. किसके नेतृत्व में अवध किसान सभा का गठन किया गया?

उत्तर :- बाबा रामचंद्र

3. साइमन कमीशन कब भारत पहुँचा व इसका विरोध क्यों हुआ?

उत्तर :- यह 1927 में भारत पहुँचा। किसी भारतीय सदस्य को इसमें न शामिल किए जाने के कारण इसका विरोध हुआ।


4. दक्षिण अफ्रीका से आने के बाद गाँधीजी ने किन स्थानों पर सत्याग्रह आंदोलन चलाया?

उत्तर :- 1) चम्पारन 2) खेड़ा 3) अहमदाबाद


5. मद्रास के नटेसा शास्त्री ने तमिल के किस विशाल संकलन को चार खंडों में प्रकाशित किया?

उत्तर :- ‘द फोकलोर्स ऑफ सदर्न इंडिया’

6. सत्याग्रह के विचार में किन दो बातों पर जोर दिया जाता है?

उत्तर :- 1) सत्य की शक्ति पर आग्रह
2) सत्य की खोज


7. रॉलेट एक्ट को काला कानून क्यों कहा गया ?

उत्तर :- इस अन्यायपूर्ण एक्ट के द्वारा राजनैतिक कैदियों को बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद रखने का अधिकार मिल गया।


8. वंदे मातरम् गीत कब और किसने लिखा? इसमें किसका गुणगान किया गया है?

उत्तर :- 1870 में बंकिम चन्द्र चटर्जी ने लिखा। इसमें भारत माता का गुणगान किया गया है।


9. ब्रिटिश सरकार ने 1857 के पश्चात प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध क्यों लगा दिया?

उत्तर :- भारतीय समाचार पत्रों द्वारा राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के कारण।

10. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई और कहाँ ?

उत्तर :- 1885 में, मुम्बई


11. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर :- व्योमेश चन्द्र बनर्जी


12. 1922 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया?

उत्तर :- चौरी-चौरा में हिंसात्मक घटना के कारण


13. ‘हिंद स्वराज’ नामक पुस्तक की रचना किसके द्वारा की गई?

उत्तर :- महात्मा गाँधी


14. मुस्लिम लीग की स्थापना कब हुई ?

उत्तर :- 1906 में


15. आंध्र प्रदेश की गूडेम पहाड़ियों में आदिवासी किसानों के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?

उत्तर :- अल्लूरी सीताराम राजू


16. डिस्कवरी ऑफ इंडिया पुस्तक का लेखक कौन था?

उत्तर :- पंडित जवाहर लाल नेहरू


17. अवनीद्रनाथ टैगोर कौन थे?

उत्तर :- चित्रकार


18. खिलाफत आन्दोलन किसने शुरू किया था?

उत्तर :- अली भाइयों (मुहम्मद अली, शौकत अली)

लघु/ दीर्घ प्रश्न (3/5 अंक)

1. असहयोग आंदोलन आरंभ किए जाने के क्या कारण थे? इस आंदोलन में समाज के विभिन्न वर्गों की हिस्सेदारी पर प्रकाश डालिए। इसके कार्यक्रम/ कार्य पद्धति, प्रगति एवं अंततः समाप्ति को समझाइए।

उत्तर :- i) आंदोलन के कारण :-
* प्रथम महायुद्ध की समाप्ति पर अंग्रेजों द्वारा भारतीय जनता का शोषण।
* अंग्रेजों द्वारा स्वराज प्रदान करने से मुकर जाना।
* रॉलेट एक्ट का पारित होना
* जलियाँवाला बाग हत्याकांड
* कलकत्ता अधिवेशन में 1920 में कांग्रेस द्वारा
असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव बहुमत से पारित।

ii) विभिन्न वर्गों की हिस्सेदारी :-
1. शहरों में आन्दोलन
2. ग्रामीण इलाकों में विद्रोह
3.आदिवासी क्षेत्रों में विद्रोह
4. बागानों में स्वराज

कार्यपद्धति, प्रगति –
1. चरणबद्ध योजना प्रक्रिया।
2. प्रथम चरण – सरकारी पदवियों, नौकरियों, सेना, पुलिस, स्कूलों, विद्यार्थी परिषदों व विदेशी वस्तुओं का त्याग।
3. दूसरा चरण – व्यापक स्तर पर सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ होना शामिल था।

समाप्ति – गाँधी जी द्वारा चौरी-चौरा में हुई हिंसक घटना के फलस्वरूप आंदोलन वापस ले लिया गया।

2. खिलाफत आंदोलन को प्रारम्भ करने के मुख्य कारण कौन से थे? भारतीय राष्ट्र आंदोलन में उसका क्या योगदान था?

उत्तर :- * तुर्की साम्राज्य (खलीफा) का अंग्रेजों द्वारा अपमान।
* लखनऊ समझौते (1916) के बाद कांग्रेस के साथ मुस्लिम लीग का समझौता।
* असहयोग आंदोलन कांग्रेस द्वारा आरंभ होना तथा मुसलमानों को मिलाकार खिलाफत आंदोलन के साथ करना।

योगदान :-
1) हिंदुओं और मुसलमानों में एकता का बीजारोपण।
2) राष्ट्रीय आंदोलन को बल मिला।

3. सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति लोगों और औपनिवेशिक सरकार ने किस प्रकार प्रतिक्रिया व्यक्त की? किन परिस्थितियों में गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लिया।

उत्तर :- लोगों ने सरकारी कानूनों को भंग करना शुरू कर दिया। आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने कठोरता से काम लिया। हजारों जेल गए।
गाँधीजी को कैद कर लिया गया। अब जनता इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने लगी। गाँधी इरविन समझौते के कारण।

4. “प्रथम विश्वयुद्ध’ ने एक नई आर्थिक व राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी। समीक्षा कीजिए।

उत्तर :- * प्रथम विश्व युद्ध के उपरांत स्वराज देने का वचन नकार दिया गया।
* आर्थिक स्थिति दयनीय- बेरोजगारी व बेकारी से मज़दूर, शिल्पकार आदि सभी ग्रसित थे।
* युद्ध ने राष्ट्रीयता के भाव जागृत किए। लोग दमनकारी सरकार के विरूद्ध एकजुट हुए।

5. गाँधीजी की नमक यात्रा कई कारणों से उल्लेखनीय थी। समीक्षा कीजिए। सविनय अवज्ञा आंदोलन की सीमाएँ क्या थीं? इसके महत्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर :- * नमक कर ब्रिटिश सरकार का सबसे दमनात्मक पहलू बताया गया।
* गाँधीजी द्वारा विश्वस्त वालंटियरों के साथ नमक यात्रा शुरू।
* राष्ट्रीय आंदोलन से आम आदमी के मुद्दे को जोड़ना।
* कानून का उल्लंघन। प्रदर्शन व विदेशी चीजों का बहिष्कार
* शराब की दुकानों पर पिकेटिंग।
* सभी लोग स्वराज की अमूर्त अवधारणा से प्रभावित नहीं थे।
* समाज के सभी वर्गों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा नहीं लिया।
* समाज के वर्ग एक दूसरे की तरफ संशकित थे।

6. भारत में राष्ट्रवाद की भावना पनपने में किन कारकों का योगदान था? राष्ट्रवाद के विकास का विश्व पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर :- 1) साहित्य, लोक कथाओं, गीतों व चित्रों के माध्यम से राष्ट्रवाद का प्रसार।
2) भारत माता की छवि रूप लेने लगी।
3) लोक कथाओं द्वारा राष्ट्रीय पहचान।
4) चिह्नों और प्रतीकों के प्रति जागरूकता। उदाहरण झंडा।
5) इतिहास की पुनर्व्याख्या।

7. असम में बागान मज़दूरों के लिए स्वराज की अवधारणा क्या थी?

उत्तर :- 1) अनुबंध के नियमों का उल्लंघन।
2) चाय बगानों से बाहर निकलना।
3) असहयोग आंदोलन में सम्मिलित होना।
4) कृषि भूमि तथा सुख सुविधाओं को प्राप्त करना।


8. भारतीयों ने साइमन कमीशन का विरोध क्यों किया?

उत्तर :- 1) समय से पहले गठन।
2) शासन में सुधार जैसी कोई बात नहीं।
3) एक भी भारतीय शामिल नहीं किया गया।

9.भारत के लोग रॉलट एक्ट के विरोध में क्यों थे?

उत्तर :- 1) यह एक काला कानून था।
2) इस कानून के अंतर्गत किसी को लंबे समय तक जेल में डाला जा सकता था।
3) विश्व युद्ध के बाद इसे खत्म करना था पर सरकार ने इसे बनाए रखा। इसका विरोध आम जनता ने किया।

10.गाँधी-इर्विन समझौते की विशेषताएँ क्या थीं? ।

उत्तर :- 1) 5 मई 1931 ई. को गाँधी इरविन समझौता।
2) सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित कर दिया जाये।
3) पुलिस द्वारा किए अत्याचारों की निष्पक्ष जाँच की जाये।
4) नमक पर लगाए गए सभी कर हटाए जाएँ।

11. सविनय अवज्ञा आंदोलन असहयोग आंदोलन के मुकाबले किस तरह अलग था? सविनय अवज्ञा आंदोलन की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर :- 1) इस बार लोगों को न केवल अंग्रेजों का सहयोग न करने के लिए बल्कि औपनिवेशिक कानूनों का उल्लंघन करने के लिए आह्वान किया जाने लगा।
2) देश के विभिन्न भागों में हजारों लोगों ने नमक कानून तोड़ा तथा सरकारी नमक कारखानों के सामने प्रदर्शन किए।
3) विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया जाने लगा।
4) किसानों ने लगान और चौकीदारों ने कर चुकाने से इन्कार कर दिया।
5) वनों में रहने वाले लोगों ने वन कानूनों का उल्लंघन करना आरंभ कर दिया।

12. 1916 के लखनऊ समझौते का इतिहास में क्या महत्व था ?

उत्तर :- 12. हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए महत्वपूर्ण।
1) नरम दल व गरम दल के संबंधों में सुधार।
2) भारतीय समाज और अंग्रेजो के मध्य रिश्ते बेहतर हुए।

13. अल्लूरी सीताराम राजू कौन थे? असहयोग आंदोलन में उनका योगदान बताइए।

उत्तर :- अल्लूरी सीताराम राजू ने आंध्र प्रदेश की गुडेम पहाड़ियों के आदिवासी किसानों का नेतृत्व किया।
1) वह एक रोचक व्यक्ति थे। इन्हें खगोलीय ज्ञान प्राप्त था।
2) लोगों का मानना था कि उनके पास विशेष शक्तियाँ हैं जिससे वह लोगों को स्वस्थ कर सकते हैं।
3) वह गाँधी जी के प्रशंसक थे।

14. सविनिय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर :- 1) औरतों ने बहुत बड़ी संख्या में गाँधी के नमक सत्याग्रह में भाग लिया। हजारों औरतें उनकी बात सुनने के लिए यात्रा के दौरान घरों से बहार आ जाती थीं।
2) उन्होंने जलूसों में भाग लिया, नमक बनाया, विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों की पिकेटिंग की।
3) कई महिलाएँ जेल भी गईं।
4) ग्रामीण क्षेत्रों की औरतों ने राष्ट्र की सेवा को अपना पवित्र दायित्व माना।

प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से


प्रश्न 1. व्याख्या करें

(क) उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी?
(ख) पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?
(ग) भारत के लोग रॉलट एक्ट के विरोध में क्यों थे?
(घ) गांधी जी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया?

उत्तर:- (क) आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय की परिघटना उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के साथ गहरे तौर पर जुड़ी हुई थी। क्योंकि

1. औपनिवेशिक शासकों के खिलाफ़ संघर्ष के दौरान लोग आपसी एकता को पहचानने लगे थे।

2. उत्पीड़न और दमन के साझा भाव ने विभिन्न समूहों को एक-दूसरे से बाँध दिया था।

3. वियतनाम, चीन, बर्मा, भारत और लैटिन तथा अफ्रीकी देशों में राष्ट्रीय आंदोलन उनके सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक शोषण के कारण प्रारंभ हुए। इनमें राष्ट्रीय भावनाओं का विकास हुआ तथा उन्होंने उपनिवेशवाद को पूरे विश्व से हटा दिया।

इस कारण राष्ट्रवाद का उदय उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के कारण हुआ। उपनिवेशिक देश उपनिवेशवाद का विरोध करने के लिए एकजुट हुए, औपनिवेशिक शासन का विरोध किया तथा अपने देश के हित के लिए एकजुट होकर लड़े। इससे राष्ट्रवाद को पनपने में मदद मिली।

(ख) प्रथम विश्वयुद्ध 1 अगस्त 1914 ई० में मित्रराष्ट्रों (ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जापान, अमेरिका) तथा धुरी राष्ट्रों (आस्ट्रिया-हंगरी, जर्मनी, तुर्की, इटली) के मध्य प्रारंभ हुआ। इसका भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन पर व्यापक प्रभाव पड़ा, जो इस प्रकार है –

1. भारतीयों का विश्व से संपर्क – इस युद्ध में सैनिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए बड़ी संख्या में भारतीयों को सेना में भर्ती किया गया। जब वे युद्ध क्षेत्रों में गए तो वहां से मिले अनुभवों का उनपर प्रभाव पड़ा, और उनमें आत्मविश्वास जागा। उन्होंने यह भी जाना कि स्वतंत्र वातावरण और लोकतंत्रीय संगठन क्या होते हैं? अत: वे ऐसी ही स्थिति भारत में भी विकसित या स्थापित करने के लिए तत्पर हो गए।

2. आर्थिक प्रभाव – युद्ध के कारण ब्रिटेन की रक्षा व्यय बढ़ गया। इसे पूरा करने के लिए उसने अमेरिका जैसे देशों से कर्जे लिए। इन कर्जी को चुकाने के लिए भारतीयों पर सीमा शुल्क और अन्य टैक्स बढ़ा दिए। इस कारण भारतीयों पर आर्थिक दबाव बढ़ा । इसी समय कीमतें भी बढ़ जाने से भारतीयों की आम आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई। अत: आम भारतीय जनता अंग्रेजी शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय आंदोलन में सम्मिलित हो गई।

3. सांप्रदायिक एकता – ‘खलीफा’ के प्रश्न पर सभी मुसलमान अंग्रेजों के विरूद्ध हो गए। जब गांधी जी ने अली बंधुओं के सहयोग के लिए खिलाफत आंदोलन प्रारंभ किया तो हिंदु-मुस्लिम एकता को बल मिला। साथ ही 1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मध्य “लखनऊ समझौता” हो गया। इस कारण भारत में सांप्रदायिक एकता को मजबूत आधार प्राप्त हुआ और राष्ट्रवादी आंदोलन का जनाधार बढ़ा।

4. प्राकृतिक संकट – 1918-21 ई० के मध्य भारत में अकाल, सूखा, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ पड़ीं जिनमें सरकार का रवैया असहयोग पूर्ण था। आम जनता महामारियों का शिकार हो रही थी, और सरकार इनसे निपटने के लिए कोई खास प्रयास नहीं कर रही थी। इस कारण भारतीय अंग्रेजी सरकार के विरूद्ध एकजुट हो गए।

5. डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट – 1915 ई० में अंग्रेजी सरकार ने क्रांतिकारी गतिविधियों को रोकने के लिए ‘डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट’ पास किया। यह एक दमनकारी एक्ट था। इसने क्रांतिकारी आंदोलन को दबाने के बजाए और तीव्र कर दिया जिससे आम जनता में भी राष्ट्रवादी भावनाएं पनपी। इस प्रकार प्रथम विश्वयुद्ध ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(ग) भारत में रॉलट एक्ट का विरोध :

1. 1918 ई० में अंग्रेजी सरकार ने ‘रॉलट’ की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की जिसका उद्देश्य भारत में क्रांतिकारी आंदोलन को रोकने के लिए कानून बनाना था।
2. इस समिति ने दो कानून बनाए जिनके द्वारा सरकार को स्वतंत्रता आंदोलन का दमन करने के लिए असीमित अधिकार मिल गए। इनका प्रमुख कानून था-सरकार राजनैतिक कैदियों को बिना मुकदमा चलाए जेल में दो साल के लिए कैद कर सकती है। भारतीयों ने इसे ‘काला कानून’ कहा तथा इसके विरोध में हड़ताल व प्रदर्शन किए।
3. गांधी जी ने भी इसके विरुद्ध आंदोलन प्रारंभ करने का आह्वान किया। उनका यह विरोध अंततः असहयोग आंदोलन के रूप में प्रकट हुआ।

(घ) 5 फरवरी 1922 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित चौरी-चौरा नामक जगह पर बाजार से गुजर रहा एक शांतिपूर्ण जुलूस पुलिस के साथ हिंसक टकराव में बदल गया। आंदोलनकारियों ने कुछ पुलिसवालों को थाने में बंदकर आग लगा दी। इस घटना के बारे में सुनते ही महात्मा गांधी ने 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन रोकने का आह्वान किया। उनको लगा था कि आंदोलन हिंसक होता जा रहा था।

प्रश्न 2. सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है?

उत्तर:- सत्याग्रह के विचार का मूल आधार सत्य की शक्ति पर आग्रह तथा सत्य की खोज करना है। गांधी जी इसके प्रबल समर्थक थे तथा उन्होंने इसकी व्याख्या इस प्रकार की

1. अगर आपका उद्देश्य सच्चा है, यदि आपका संघर्ष अन्याय के खिलाफ है तो उत्पीड़क से मुकाबला करने के लिए आपको किसी शारीरिक बल की आवश्यकता नहीं।

2. प्रतिशोध की भावना या आक्रमकता का सहारा लिए बिना सत्याग्रही केवल अहिंसा के सहारे भी अपने संघर्ष में सफल हो सकता है।

3. इसके लिए दमनकारी शत्रु की चेतना को झिंझोड़ना चाहिए। उत्पीड़क शत्रु को ही नहीं बल्कि सभी लोगों को हिंसा के जरिए सत्य को स्वीकार करने पर विवश करने की बजाए सच्चाई को देखने और उसे सहज भाव से स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

4. इस संघर्ष में अंततः सत्य की ही जीत होती है। गांधी जी का अटूट विश्वास था कि अहिंसा का धर्म सभी भारतीयों को एकता के सूत्र में बाँध सकता है।


प्रश्न 3. निम्नलिखित पर अखबार के लिए रिपोर्ट लिखें

(क) जलियाँवाला बाग हत्याकांड
(ख) साइमन कमीशन

उत्तर:-
(क) जलियाँवाला बाग हत्याकांड
संपादक
टॉइम्स ऑफ इंडिया
दिल्ली।
महोदय
आज 13 अप्रैल, 1919 ई० की शाम को जलियाँवाला बाग में भयंकर हत्याकांड हुआ जिसने विश्व मानवता को शर्मिंदा कर दिया। इसमें एक ओर अपने : प को सभ्य कहने वाली अंग्रेजी सरकार थी और दूसरी तरफ असभ्य, अशिक्षित माने जाने वाले भारतीय थे। यह घटना इस प्रकार घटी-डॉ० सैफुद्दीन किचलू और डॉ० सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरुद्ध अमृतसर में सार्वजनिक हड़ताल हो गई है तथा हर जगह जनसभाओं का आयोजन हो रहा है।

इसी समय आज 13 अप्रैल को बैसाखी वाले दिन लोग बैसाखी के मेले में सम्मिलित होने के लिए इस बाग में बड़ी संख्या में एकत्र हुए। इसी बाग में एक शांतिपूर्ण जनसभा भी चल रही थी। अचानक जनरल डायर (जालंधर डिविजन का कमांडर) सेना की एक टुकड़ी के साथ यहाँ पहुँचा। उसने बाग के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया तथा बिना किसी चेतावनी के निहत्थे लोगों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। यह गोलीबारी 10 मिनट तक चलती रही। चूँकि लोगों को बचाव का कोई मार्ग नहीं मिला इस कारण वे इसमें फँस गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार एकत्र लोगों की संख्या 20 हजार के आस-पास थी। इसमें से 1000 लोग मारे गए हैं जबकि सरकारी आँकड़े यह संख्या 379 बता रहे हैं।

इस घटना की जानकारी जैसे ही लोगों को प्राप्त हुई उनमें सरकार के विरुद्ध आक्रोश और गुस्सा भड़क उठा है तथा अमृतसर तथा पंजाब के अन्य भागों में तनाव का माहौल बन गया है। अत: सरकार ने स्थिति पर काबू पाने के लिए सारे पंजाब में मार्शल लॉ लगा दिया है।

अतः मैं निवेदन करती हूँ कि इस समाचार को अपने अखबार के मुख्य पृष्ठ पर छापे, जिससे संपूर्ण विश्व और भारतवर्ष को इसकी जानकारी मिले । जो अंग्रेजी सरकार जनरल डायर को ब्रिटिश साम्राज्य का रक्षक कहकर सम्मानित कर रही है उसको उसके इस अमानवीय कृत्य के लिए दंडित किया जाए।
जय हिंद
भवदीया
क ख ग

(ख) साइमन कमीशन
संपादक
नवजागरण
कलकत्ता।
महोदय,

3 फरवरी, 1928 ई० को इंग्लैंड की सरकार ने सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में सात सदस्यों का एक कमीशन भारत भेजा। इसके मुख्य उद्देश्ये भारत में संवैधानिक व्यवस्था की कार्यशैली का अध्ययन करना तथा उसके बारे में सुझाव देने हैं। इस कमीशन में एक भी भारतीय सदस्य नहीं है। अतः इस कमीशन का घोर विरोध होने लगा है। इसको काले झंडे दिखाए जा रहे हैं और ‘साइमन वापस जाओ’ के नारे लगाए जा रहे हैं।

साइमन विरोधी प्रदर्शन का नेतृत्व लाला लाजपतराय कर रहे हैं। इस कमीशन में जहाँ कोई भी भारतीय सदस्य नहीं हैं वहीं इसकी रिपोर्ट अपूर्ण और अव्यावहारिक है। इसमें औपनिवेशिक साम्राज्य का उल्लेख नहीं किया गया है और न ही इसमें अधिराज्य की स्थिति को स्पष्ट किया गया है। इसमें केंद्र में उत्तरदायी सरकार की स्थापना का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

कमीशन ने व्यस्क मताधिकार की मांग को भी अव्यावहारिक बताकर ठुकरा दिया है। अत: यह रिपोर्ट भारतीयों को संतुष्ट नहीं कर पा रही है। इसी कारण चारों ओर इसका विरोध हो रहा है। इस रिपोर्ट द्वारा सांप्रदायिकता को जो बढ़ावा दिया गया है यह सरकार के भारत के प्रति गलत उद्देश्यों को उजागर करता है।

अतः मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि इस रिपोर्ट को आप अपने अखबार के मुख्य पृष्ठ पर छापकर भारतीयों की भावनाओं पर आघात करने वाली अंग्रेजी सरकार की आलोचना करें।
जय हिंद
भवदीया
क ख ग

प्रश्न 4. इस अध्याय में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय 1 में दी गई जर्मेनिया की छवि की तुलना कीजिए।

उत्तर:- भारत माता और जर्मेनिया की छवि की तुलना

* भारत माता की छवि
1. इस छवि को अवनींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में बनाया।
2. इसमें भारत माँ को अन्नपूर्णा के रूप में दर्शाया गया है जिसके एक हाथ में माला, एक में पुस्तक, एक में भोजन तथा एक में कपड़ा है जो वह भारतीयों को प्रदान कर रही है।
3. भारत माता की दूसरी छवि में उसे संन्यासिनी के रूप में दर्शाया गया है जिसके एक हाथ में त्रिशूल है, जिस पर झंडा लहरा रहा है। वह हाथी और शेर के बीच खड़ी है। ये दोनों पशु शक्ति और सत्ता के प्रतीक हैं।
4. भारत माता की दोनो छवियों में शांत, गंभीर तथा आध्यात्मिक जैसे दैवीय गुणों के भाव प्रकट हो रहे हैं।
5. भारत माता की छवि श्रद्धा तथा राष्ट्रवाद के प्रति आस्था का प्रतीक है।


* जर्मेनिया की छवि
1. इस छवि को चित्रकार फिलिप वेट ने 1848 में
बनाया।
2. इसमें जर्मेनिया को राइन नदी पर पहरा देते हुए
दर्शाया गया है।
3. जर्मेनिया के हाथ में तलवार है जिसपर खुदा है कि ‘जर्मन तलवार’ जर्मन राइन की रक्षा करती है।
4. जबकि जर्मेनिया की छवि रौद्र गुणों से युक्त राष्ट्रीयता व देशभक्ति का प्रतीक है।
5. जर्मेनिया की छवि रौद्र गुणों से युक्त राष्ट्रीयता व
देशभक्ति का प्रतीक है।

चर्चा करें

प्रश्न 1. 1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले सभी सामाजिक समूहों की सूची बनाइए। इसके बाद उनमें से किन्हीं तीन को चुन कर उनकी आशाओं और संघर्षों के बारे में लिखते हुए यह दर्शाइए कि वे आंदोलन में शामिल क्यों हुए?

उत्तर:- 1921 में असहयोग आंदोलन में भारत के विभिन्न सामाजिक समूहों ने हिस्सा लिया लेकिन हरेक की अपनी-अपनी आकांक्षाएँ थीं। आंदोलन में शामिल प्रमुख सामाजिक समूह निम्नलिखित थे-शिक्षित मध्यम वर्ग, भारतीय दस्तकार और मजदूर, भारतीय किसान, पूँजीपति वर्ग, जमींदार वर्ग तथा व्यापारिक वर्ग। सभी ने असहयोग आंदोलन में भाग लिया।

1. शिक्षित मध्यम वर्ग – शहरों में शिक्षित मध्यम वर्ग ने असहयोग आंदोलन की शुरूआत की। हजारों विद्यार्थियों ने स्कूल कॉलेज छोड़ दिए, शिक्षकों ने इस्तीफे दे दिए। वकीलों ने मुकदमें लड़ने बंद कर दिए। शिक्षित वर्ग आंदोलन में शामिल इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने देखा कि उनके बराबर पढ़े-लिखे अंग्रेज उनके अफसर बन जाते थे। भारतीय लोगों को वेतन भी अंग्रेजों के मुकाबले कम मिलता था। वे केवल क्लर्क ही पैदा होते थे और क्लर्क ही मर जाते थे। इस भेदभावपूर्ण नीति के कारण शिक्षित वर्ग अंग्रेज सरकार का विरोधी था।

2. व्यापारी वर्ग – बहुत से स्थानों पर व्यापारियों ने विदेशी चीजों का व्यापार करने या विदेशी व्यापार में पैसा लगाने से इनकार कर दिया। अंग्रेज सरकार की गलत नीतियों के कारण व्यापारी वर्ग पूरी तरह बरबाद हो चुका था। अंग्रेज सस्ते दामों पर कच्चा माल ब्रिटेन ले जाते थे और वहाँ से तैयार माल लाकर अधिक कीमत पर भारत में बेचते थे। भारतीय व्यापारियों को इससे बहुत नुकसान होता था।

3. सामान्य जनता – असहयोग आंदोलन एक जन आंदोलन बन गया था क्योंकि आम जनता ने विदेशी कपड़ों तथा चीजों का बहिष्कार किया, शराब की दुकानों की पिकेटिंग की और विदेशी कपड़ों की होली जलाई। आम जनता अंग्रेजों के अत्याचार से दुखी हो चुकी थी इसलिए उसने बढ़-चढ़कर असहयोग आंदोलन में भाग लिया।

4. बाग़ान मजदूर – गांधी जी के विचार और स्वराज की अवधारणा जब मजदूरों को समझ में आई तो वे भी बाग़ानों की चारदीवारियों से बाहर निकलकर राष्ट्रीय आंदोलन में सम्मिलित हो गए। वे अपने अधिकारियों की अवहेलना करने । लगे। वे बागानों को काम छोड़कर अपने घरों को लौट गए क्योंकि उनको लगने लगा कि गांधी राज आते ही सबको जमीन मिल जाएगी।

प्रश्न 2. नमक यात्रा की चर्चा करते हुए स्पष्ट करें कि यह उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक था।

उत्तर:- 31 जनवरी 1930 को गांधी जी ने इरविन को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने 11 माँगों का उल्लेख किया था। इसमें सबसे महत्वपूर्ण माँग नमक कर को खत्म करने के बारे में थी। नमक का अमीर-गरीब सभी प्रयोग करते थे। यह भोजन का अभिन्न हिस्सा था। इसलिए नमक पर कर को ब्रिटिश सरकार का सबसे दमनकारी पहलू बताया था। 11 मार्च तक उनकी माँगें नहीं मानी गई तो 12 मार्च 1930 को गांधी जी ने अपने 56 स्वयंसेवकों के साथ नमक यात्रा शुरू की। यह यात्रा साबरमती से दांडी नामक गुजराती तटीय कस्बे में जाकर खत्म होनी थी। 6 अप्रैल को वे दाँडी पहुँचे और उन्होंने समुद्र का पानी उबालदर नमक बनाना शुरू कर दिया। यह कानून का उल्लंघन था ।

यह उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक था

1. इस बार लोगों को न केवल अंग्रेजों को सहयोग न करने के लिए बल्कि औपनिवेशिक कानूनों का उल्लंघन करने के लिए आह्वान किया जाने लगा। हजारों लोगों ने नमक कानून तोड़ा और सरकारी नमक कारखानों के सामने प्रदर्शन किए।
2. यह यात्रा साबरमती से 240 किलोमीटर दूर दाँडी में जाकर समाप्त होनी थी। गांधी जी की टोली ने 23 दिनों तक हर रोज लगभग 10 मील का सफर तय किया। गांधी जी जहाँ भी रूकते हजारों लोग उन्हें सुनने आते। इन सभाओं में गांधी जी ने स्वराज का अर्थ स्पष्ट किया और कहा कि लोग अंग्रेजों की शांतिपूर्ण अवज्ञा करें यानि कि अंग्रेजों को कहा। न मानें।

इस प्रकार गांधी जी की नमक यात्रा उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक बन गई।

प्रश्न 3. कल्पना कीजिए कि आप सिविल नाफरमानी आंदोलन में हिस्सा लेने वाली महिला हैं। बताइए कि इस अनुभव का आपके जीवन में क्या अर्थ होता?

उत्तर:- सिविल नाफ़रमानी आंदोलन में अनेक औरतों ने बड़े पैमाने पर भाग लिया। गांधी जी की बातों को सुनने के लिए औरतें अपने घरों से बाहर आ जाती थीं।

मैंने भी इस समय अनेक जुलूसों में हिस्सा लिया, नमक बनाया, विदेशी कपड़ों व शराब की दुकानों की पिकेटिंग की, मैं भी अन्य महिलाओं के साथ जेल गई। इस आंदोलन के दौरान मैंने यह अनभव किया कि शहरी क्षेत्रों में सभी वर्गों की महिलाओं ने भाग लिया परंतु इसमें उच्च जातियों की महिलाएं अधिक थीं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पन्न किसान परिवार की महिलाओं ने अधिक भाग लिया।

इस दौरान मैंने पाया कि सभी राष्ट्रसेवा को अपना प्रथम कर्तव्य मानने लगे। हम महिलाओं में यह आत्मविश्वास जागा कि वे घर के अतिरिक्त राष्ट्रसेवा का दायित्व भी निभा सकती हैं।

परंतु कांग्रेस ने लंबे समय तक महिलाओं को उच्च पद नहीं दिए। उन्हें आंदोलनों में केवल प्रतीकात्मक उपस्थिति तक ही सीमित रखा।

प्रश्न 4. राजनीतिक नेता पृथक निर्वाचिका के सवाल पर क्यों बँटे हुए थे?

उत्तर:- पृथक चुनाव प्रणाली का अभिप्राय ऐसे चुनाव क्षेत्रों से है जिनका निर्माण धर्म के आधार पर किया जाए अर्थात् एक धर्म का व्यक्ति केवल अपने धर्म के व्यक्ति को ही वोट देगा। अंग्रेजों ने भारत में फूट डालने के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्रों का निर्माण किया। अपने इस कार्य में अंग्रेज सरकार काफी हद तक सफल रही क्योंकि पृथक निर्वाचन क्षेत्रों पर भारतीय आपस में बँट गए

1. कांग्रेस पृथक निर्वाचन पद्धति का विरोध कर रही थी। पहले अंग्रेजों ने केवल हिंदू और मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों की बात कही थी किंतु बाद में जब हरिजनों को भी हिंदुओं से अलग करके पृथक निर्वाचन क्षेत्रों में बाँटने की बात कही जाने लगी तो कांग्रेस ने इसका खुलकर विरोध किया।

2. दलितों के उद्धार में लगे बी.आर. अम्बेडकर दलितों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र चाहते थे। उनका मानना था कि उनकी सामाजिक अपंगता केवल राजनीतिक सशक्तिकरण से ही दूर हो सकती है।

3. भारत को मुस्लिम समुदाय भी पृथक निर्वाचन क्षेत्रों के पक्ष में था। मुहम्मद अली जिन्ना का कहना था कि यदि मुसलमानों को केंद्रीय सभा में आरक्षित सीटें दी जाएँ और मुस्लिम बहुल प्रातों में मुसलमानों को आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए तो वे मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचिका की माँग छोड़ने के लिए तैयार हैं।

इस प्रकार इन बातों से पता चलता है कि पृथक निर्वाचन क्षेत्रों को लेकर भारतीयों में फूट पड़ गई थी। कांग्रेस पृथक निर्वाचन क्षेत्रों के खिलाफ थी जबकि दलित वर्ग तथा मुस्लिम वर्ग इसके पक्ष में थे। जिन्ना और अम्बेडकर जैसे नेता चाहते थे कि पृथक निर्वाचन पद्धति को लागू किया जाए जिससे दलितों और मुसलमानों को राजनीति में विशिष्ट स्थान प्राप्त हो सके जबकि गांधी जी इसके विरुद्ध थे। उनका कहना था कि पृथक निर्वाचन पद्धति से भारत के विभिन्न धर्मों के लोगों में रोष उत्पन्न होगा, उनकी एकता समाप्त हो जाएगी। इसलिए वे इसे स्वीकारने के पक्ष में नहीं थे।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. कीनिया के उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन का अध्ययन करें। भारत के राष्ट्रीय आंदोलन की तुलना कीनिया के स्वतंत्रता संघर्ष से करें।

उत्तर:- कीनिया की खोज सर्वप्रथम पुर्तगालियों ने की। 1498 में वास्को-डी-गामा मोम्बासा पहुँचा। इसके बाद समुद्री रास्ते से पुर्तगालियों ने कीनिया के साथ मसालों का व्यापार शुरू किया। 17वीं शताब्दी में ब्रिटिश, डच तथा अरबों ने भी इस क्षेत्र में आना शुरू किया और 1730 तक इन यूरोपीय शक्तियों ने पुर्तगालियों को कीनिया से बाहर कर दिया। 1885 में जर्मनों ने इस पर कब्जा किया और 1890 में इसके तटीय प्रदेश ब्रिटेन को सौंप दिए । अंग्रेजों ने कीनिया-यूगांडा रेलवे का निर्माण किया। इसका कुछ स्थानीय जनजातियों ने विरोध किया। 20वीं सदी के आरंभ में ब्रिटिश और अन्य यूरोपीय किसानों ने कॉफी और चाय की खेती करनी प्रारंभ कर दी। 30,000 श्वेत लोग यहाँ आकर बस गए और लाखों किकियू (स्थानीय जनजाति के लोग) भूमिहीन हो गए।

1952 से 1959 तक कीनिया आपातकालीन स्थिति में रहा तथा यहाँ माऊ-माऊ विद्रोह अंग्रेजों के खिलाफ पूरे जोरशोर से चला। यूरोप की गोरी जातियाँ कीनिया के अश्वेत लोगों को निम्न कोटि का मानती थी। इस सिद्धांत की तीव्र प्रतिक्रिया हुई और कीनिया में राष्ट्रवाद का प्रसार होने लगा। राष्ट्रवाद को मुख्य प्रेरणा जातीय समानता के सिद्धांत से मिली। पाश्चात्य संपर्क और पाश्चात्य साहित्य ने भी कीनिया के प्रबुद्ध लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जगाई। किंतु 1956 तक माऊ-माऊ विद्रोह पूरी तरह कुचल दिया गया।

इस विद्रोह से यह सिद्ध हो चुका था कि कीनिया के लोग राष्ट्रवाद की भावना से भर चुके थे और उन्हें अधिक समय तक गुलाम नहीं बनाया जा सकता था।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई अफ्रीकी देशों में स्वतंत्रता की लहर आई । विश्व युद्ध के कारण उपनिवेशी शक्तियाँ कमजोर पड़ चुकी थीं। परिणामस्वरूप कीनिया में भी 1957 में पहले प्रत्यक्ष चुनाव कराए गए। अंग्रेजों ने सोचा था कि वहाँ उदारवादियों को सत्ता सौंप दी जाएगी। किंतु ‘जीमो केनियाटा’ की पार्टी कीनिया अफ्रीकन नेशनल यूनियन (KANU) ने अपनी सरकार बना ली और 12 दिसम्बर 1963 को कीनिया आजाद हो गया।


भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन तथा कीनिया के स्वतंत्रता संघर्ष की तुलना


* समानताएँ:
1. दोनों ही देशों का साम्रज्यवादी शक्तियों ने शताब्दियों तक शोषण किया। अतः दोनों ही आर्थिक पिछड़ेपन और सामाजिक रूढ़िवादिता से पीड़ित रहें। दोनों ही देशों की राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक दुर्बलता का लाभ उठाकर यूरोपीय शक्तियों ने यहाँ उपनिवेशवाद और ‘नव-उपनिवेशवाद’ का प्रसार किया।

2. दोनों ही देशों में राष्ट्रवाद की लहर फैली। दोनों ही देश उपनिवेशवाद व साम्राज्यवाद के विरोधी थे। दोनों देशों के । लोगों ने पूरी ताकत से उपनिवेशवादी शक्तियों का विरोध किया और अंत में इसमें सफलता पाई।

3. अपने आर्थिक-सामाजिक विकास के लिए दोनों ही महाद्वीप विदेशी सहायता लेने के लिए विवश हो गए। अतः सहायता देने वाली शक्तियों को सहायता प्राप्त देशों में अपना राजनीतिक प्रभाव स्थापित करने के पर्याप्त अवसर मिलते रहते हैं।


* असमानताएँ:
1. भारत का राष्ट्रवाद कीनिया के मुकाबले अधिक परिपक्व था। भारत में राष्ट्रीय आंदोलन में समाज के सभी वर्गों ने भाग लिया। जातीय, भाषायी तथा धार्मिक आधार पर विभाजित सभी वर्ग राष्ट्रीयता के प्रश्न पर एकजुट हो गए। जबकि कीनिया में राष्ट्रीय आंदोलन स्थानीय जनजातियों द्वारा ही चलाए गए। जब इन स्थानीय जनजातियों को अपनी रोजी-रोटी छिनती नजर आई तो इन्होंने विद्रोह कर दिया। इनके विद्रोहों में वो एकता दिखाई नहीं देती जो
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विद्रोहों में दिखती है।

2. भारत में राष्ट्रीय आंदोलन अधिकांशतः अहिंसक तथा शांतिपूर्ण रहा केवल कुछ अपवादों को छोड़कर क्योंकि यहाँ राष्ट्रवादी नेता सुनियोजित कार्यक्रम चलाते थे। उनके पीछे राष्ट्रवाद की एक लंबी परंपरा की तथा महात्मा गांधी जैसे चमत्कारिक व्यक्तित्व के नेता थे जो अहिंसा के पुजारी थे। कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो भारत का राष्ट्रीय आंदोलन उतना उग्र नहीं था जितना कीनिया का था। रंगभेद और कबीलेवाद की समस्याओं का सामना कीनिया को करना पड़ा। कीनिया के नेता भारतीय नेताओं की तुलना में अधिक उग्र रहे।

3. भारत में राष्ट्रीय आंदोलन का कारण यहाँ के शिक्षित वर्ग द्वारा राष्ट्रीय चेतना का प्रसार करना था। यहाँ के प्रबुद्ध वर्ग ने फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति आदि के समानता, स्वतंत्रता तथा न्याय जैसे विचारों को आम जनता तक पहुँचाया। भारत में शिक्षा का प्रसार कीनिया के मुकाबले अधिक था। इसलिए कीनिया में स्वतंत्रता, समानता और न्याय जैसे विचारों को फैलने में काफी समय लगा। वहाँ राष्ट्रवादी विचार देर से फैले।

इस प्रकार हमने देखा कि भारत और कीनिया के स्वतंत्रता संघर्ष में काफी समानताएँ थीं किंतु साथ ही काफी असमानताएँ भी थीं।

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