3) मानव विकास
प्र० 1. नीचे दिए गये चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
(i) मानव विकास सूचकांक (2011) के संदर्भ में विश्व के देशों में भारत की निम्नलिखित में से कौन-सी कोटि थी?
(क) 126
(ख) 134
(ग) 128
(घ) 129
(ii) मानव विकास सूचकांक में भारत के निम्नलिखित राज्यों से किस एक की कोटि उच्चतम है?
(क) तमिलनाडु
(ख) पंजाब
(ग) केरल
(घ) हरियाणा
(iii) भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में स्त्री साक्षरता निम्नतम है?
(क) जम्मू और कश्मीर
(ख) अरुणाचल प्रदेश
(ग) झारखंड
(घ) बिहार
(iv) भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में 0-6 आयु वर्ग के बच्चों में लिंग अनुपात निम्नतम है?
(क) गुजरात
(ख) हरियाणा
(ग) पंजाब
(घ) हिमाचल प्रदेश
(v) भारत के निम्नलिखित केंद्र-शासित प्रदेशों में से किस एक की साक्षरता दर उच्चतम है?
(क) लक्षद्वीप
(ख) चंडीगढ़
(ग) दमन और दीव
(घ) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
उत्तर:
(i) (ख) 134
(ii) (ग) केरल ।
(iii) (घ) बिहार।
(iv) (घ) हरियाणा
(v) (क) लक्षद्वीप।
प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए
(i) मानव विकास को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: “मानव विकास, स्वस्थ भौतिक पर्यावरण से लेकर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्वतंत्रता तक सभी प्रकार के मानव विकल्पों को सम्मिलित करते हुए लोगों के विकल्पों में विस्तार और उनके शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सशक्तीकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया है।”
(ii) उत्तरी भारत के अधिकांश राज्यों में मानव विकास के निम्न स्तर के दो कारण बताइए।
उत्तर: देश के प्रमुख 15 राज्यों में उत्तरी भारत के बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिमी बंगाल व राजस्थान ऐसे राज्य हैं जहाँ मानव विकास निम्न स्तर पर है। इसके प्रमुख कारणों में साक्षरता व आर्थिक विकास का निम्न स्तर है। इसके अलावा सामाजिक-राजनीतिक व ऐतिहासिक कारण भी इसके लिए उत्तरदायी हैं।
(iii) भारत के बच्चों में घटते लिंगानुपात के दो कारण बताइए।
उत्तर: भारत में स्त्री लिंगानुपात घट रहा है, विशेष रूप से 0-6 आयु वर्ग के बच्चों के लिंग अनुपात के संबंध में यह बहु ही अवांछनीय हैं। केरल, जहाँ साक्षरता दर भारत में सर्वोच्च है, के अलावा सभी राज्यों में बच्चों को लिंग अनुपात घटा है। पंजाब व हरियाणा जैसे विकसित राज्यों में यह सबसे अधिक चिंताजनक प्रति हजार बालकों पर 800 से भी कम बालिकायें हैं। लिंग-निर्धारण की वैज्ञानिक विधियों का उपयोग व सामाजिक दृष्टिकोण प्रमुख कारक हैं।
प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।
(i) भारत में 2001 के स्त्री साक्षरता के स्थानिक प्रारूपों की विवेचना कीजिए और इसके लिए उत्तरदायी कारणों को समझाइए।
उत्तर: • भारत में (जनगणना 2001 के अनुसार) कुल साक्षरता दर लगभग 65.4 प्रतिशत है जबकि स्त्री साक्षरता 54, 16 प्रतिशत है।
• दक्षिण भारत के अधिकांश राज्यों में कुल साक्षरता और महिला साक्षरता राष्ट्रीय औसत से ऊँची है। भारत के राज्यों में साक्षरता दर में व्यापक प्रादेशिक असमानता पाई जाती है।
• यहाँ बिहार जैसे राज्य भी हैं जहाँ साक्षरता दर बहुत कम 47.53% है तथा केरल और मिजोरम जैसे राज्य भी हैं जिनमें साक्षरता दर क्रमशः 90.92% और 88.49% है।
• स्थानिक भिन्नताओं के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में, स्त्रियों में, अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों में, कृषि मजदूरों में, तथा हमारे समाज के अन्य सीमांत वर्गों में साक्षरता का प्रतिशत बहुत ही कम है।
• यद्यपि सीमांत वर्गों में साक्षरों का प्रतिशत सुधरा है फिर भी धनी और सीमांत वर्गों की जनसंख्या के बीच यह अंतर समय के साथ बढ़ा है।
(ii) भारत के 15 प्रमुख राज्यों में मानव विकास के स्तरों में किन कारकों ने स्थानिक भिन्नता उत्पन्न की है?
उत्तर: भारत के 15 प्रमुख राज्यों में मानव विकास के स्तरों में स्थानिक भिन्नता देखने को मिलती है। इन परिस्थितियों के लिए अनेक सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारण उत्तरदायी हैं। केरल के मानव विकास सूचकांक का उच्चतम मूल्य, साक्षरता दर, शत-प्रतिशत के आसपास (90.92 प्रतिशत) प्राप्त करने के लिए किए गए प्रभावी कार्यशीलता के कारण है।
इसके विपरीत बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, असम और उत्तर प्रदेश जैसे निम्न साक्षरता वाले राज्य हैं। ध्यान रहे उच्चतर साक्षरता दर दर्शाने वाले राज्यों में पुरुष और स्त्री साक्षरता दर के बीच कम अंतर पाया गया है। शैक्षिक उपलब्धियों के अतिरिक्त आर्थिक विकास भी मानव विकास सूचकांक पर सार्थक प्रभाव डालता है। आर्थिक दृष्टि से विकसित राज्यों के मानव विकास सूचकांक का मूल्य अन्य राज्यों की तुलना में ऊँचा है। उपनिवेश काल में विकसित प्रादेशिक विकृतियाँ और सामाजिक विषमताएँ अब भी भारत की अर्थव्यवस्था, राजतंत्र व समाज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
(एक अंक वाले प्रश्न)
प्रश्न 1. मानव विकास सूचकांक (2005) के संदर्भ में विश्व के देशों में भारत का कौन-सा स्थान कोटि थी?
उत्तर : 127वीं ।
प्रश्न 2. मानव विकास सूचकांक में भारत के किस राज्य की कोटि उच्चतमहैं?
उत्तर : केरल राज्य (0.638)
प्रश्न 3. भारत क किस राज्ये में स्त्री साक्षरता निम्नतम तथा उच्चतम है?
उत्तर : निम्नतम-बिहार, उच्चतम-केरल
प्रश्न 4. मानव विकास सूचकांक में भारत के किस राज्य की कोटि निम्नतम है ।
उत्तर : बिहार राज्य (0.367)
प्रश्न 5. जनसंख्या की तुलना में संसाधनों के आभाव के विषय में चिंता व्यक्त करने वाले पहले विद्वान कौन थे?
उत्तर : सर राबर्ट माल्थस।
प्रश्न 6. भारत के ,केंद्र शासित प्रदेशों की उच्चतम तथा निम्नतम साक्षरता दर बताइए?
उत्तर : उच्चतम-लक्ष्यद्वीप (87,52) निम्नतम-दादरा और नगर हवेली (60.03)
प्रश्न 7. भारत के किन राज्यों में 0-6 आयु वर्ग के बच्चों में लिंग अनुपात निम्नतम हैं?
उत्तर : पंजाब, हरियाणा
प्रश्न 8. मानव विकास क्या है?
उतर: मानव विकास लोगों की रूचियों को विस्तृत करने तथा उनके हितों व कल्याण के स्तर को उठाने की प्रकिया है। इसके लिए स्वस्थ जीवन सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है।
प्रश्न 9. भारत के किस राज्य में स्त्री साक्षरता दर न्यूनतम है?
उत्तर : बिहार
प्रश्न 10. संयुक्त राष्ट्र ने कब सर्वप्रथम मानव विकास प्रतिवेदन प्रस्तुत किया?
उत्तर : 1990
प्रश्न 11 . भारत में औसत जीवन प्रत्याश कितनी है?
उत्तर : 65 वर्ग
प्रश्न 12 मारत के वे कौन-से दो राज्य है जहां गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले की आबादी अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है?
उत्तर : उड़ीसा (47.15 प्रतिशत, बिहार (42.60) ।
प्रश्न 13. मारत के किन दो राज्यों में पिछले दशकों में लिंगानुपात में कमी देखने को मिली?
उत्तर : हरियाणा, पंजाब।
प्रश्न 14. भारत के लिए मानव विकास रिपोर्ट कौन तैयार करता है?
उत्तर : भारत का नीति आयोग (पूर्व नाम योजना आयोग)
प्रश्न 15. मानव विकास सूचकांक में विकास के किन कारकों को आधार बनाया गया है?
उत्तर: दीर्घ आयु, शिक्षा तथा आय।
प्रश्न 16. पंजाब और हरियाणा में गरीबी घटने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि।
(तीन अंक वाले प्रश्न)
प्रश्न 17. सामाजिक सशक्तिकरण मानव विकास का महत्वपूर्ण सूचक है । भारत के संदर्भ में स्पष्ट करें।
उत्तर : मानव विकास तभी सार्थक है जब मनुष्य भूख गरीबी, दासता। बंधुआ मजदूरी निरक्षरता आदि से मुक्त हो और यह तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति को इतना समर्थ बनाया जाए कि वह इन बंधनों से मुक्त हो सके। इसलिए मानव विकास को पाने के लिए समाज के सभी वर्गों को साक्षर-स्वस्थ और आत्मनिर्भर होना आवश्यक है।
प्रश्न 18. उत्तरी भारत के अधिकांश राज्यों में मानव विकास के निम्न स्तरों के तीन कारण बताइए?
उत्तर : 1) गरीबी :- पंजाब एवं हरियाणा को छोड़कर अन्य राज्यों उत्तर प्रदेश बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश और असम में गरीबी के कारण मानव विकास नहीं हो पाया ह। इन राज्यों में प्रति व्यक्ति आय 2000 रुपये से भी कम है।
2) निम्न साक्षरता दर :- भारत में कुल साक्षरता दर की अपेक्षा इन राज्यों में साक्षरता दर काफी कम है। साक्षरता मानव विकास को दर्शाती है इसीलिए उत्तरी भारत में राज्यों में मानव विकास सूचकांक निम्न स्तर का है।
3) निम्न स्वास्थ्य सुविधाएँ :- जिन राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाएं अच्छी नहीं हैं या गरीबों की पहुंच से बाहर है। उन राज्यों में मानव विकास पर विपरीत असर पड़ता है।
प्रश्न 19. आर्थिक विकास किस तरह मानव विकास को प्रभावित करता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : विकास मनुष्यों की संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करता है। आर्थिक विकास को हम व्यक्ति की आय से मापते हैं आय से ही कोई भी व्यक्ति प्राकृतिक या मानवरचित संसाधनों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य को पा सकता है। भारत में इस क्षेत्र में काफी विभिन्नता देखने को मिलती है। महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरा, दिल्ली जैसे राज्यों में प्रति व्यक्ति आय अधिक है।
जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा में कम है। इस राज्यों में लोगों द्वारा संसाधनों के उपभोग की क्षमता में अंतर पाया जाता है। जैसे पंजाब में एक व्यक्ति एक महीने में 690 रुपये अपने ऊपर व्यय करता है। जबकि उत्तर प्रदेश एवं बिहार में यह सिर्फ 520 रूपए व्यक्ति है।
प्रश्न 20 मानव विकास सामाजिक एवं प्राकृतिक पर्यावरण से क्या संबंध है? उचित उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए?
उत्तर : ऐसा माना जाता है कि मानव विकास की चरम स्थिति प्राप्त कर लेने पर हमे सभी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। ऐसा कुछ हद तक होता भी है मनुष्यों के रहन-सहन के स्तर मे सुधार आता है लेकिन यह विकास कभी-कभी चरम सामाजिक विषमताओं को भी जन्म देता है ।
• मानव विकास के क्रम में पर्यावरण पर भी विपरीत असर पड़ता है। एक तरफ जहां हम
प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण शोषण करते हैं वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण भी फैलाते हैं।
• ये परिस्थितियां जैसे सामाजिक विषमता समाज में बेचैनी वर्ग संघर्ष को जन्म दे सकते हैं तथा प्रदूषण पृथ्वी के पर्यावरण को हानि पहुंचा रहा है।
• इन परिस्थितियों से बचकर ही हमें मानव विकास को सही अर्थों में उपलब्ध करने का प्रयास करना चाहिए।
प्रश्न 21. मानव विकास का एक पहल निम्नतर मानवीय दशाओं का होना भी रहा है। जो हमारे निर्धन लोगों के सामथ्र्य में लगातार कमी का कारण बन गए हैं। इस कथन को तीन तर्क देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : 1) लोगों के सामाजिक सामर्य में कमी विस्थापन और दुर्बल होते सामाजिक बंधनों के कारण हुई हैं।
2) पर्यावरण प्रदूषण के कारण लोगों के पर्यावरणीय सामर्य में कमी आई है |
3) बढ़ती बीमारियों और दुर्घटनाओं के कारण लोगों के व्यक्तिगत सामर्य में कमी आई है।
प्रश्न 22. आधुनिक के तीन दुष्परिणाम बताइए
उत्तर : 1) आधुनिक विकास के कारण समाज में बढ़ गया है । समाज का एक वर्ग अत्यधिक सुख-सुविधाओं का भोग कर रहा है। जबकि दूसरी ओर एक वर्ग अति आवश्यक सुविधाओं को भी प्राप्त करने में असमर्थता महसूस कर रही है
2) प्रादेशिक असन्तुलन देखने को मिलता है। कुछ राज्य विकास की दौड मे काफी आगे हैं जैसे केरल, पंजाब, तमिलनाडु आदि वहीं बिहार, उड़ीसा, झारखंड, उत्तरप्रदेश जैसे पिछड़े राज्य भी है।
3) आधुनिक विकास ने पर्यावरण का निम्नीकरण किया है अत्यन्त चिंताजनक है।
(पाँच अंक वाले प्रश्न)
प्रश्न 23. भारत के लिए विकास अवसरों के साथ-साथ वंचनाओं का मिला-जुला थैला है। इस कथन की पुष्टि उपयुक्त तर्क देकर कीजिए।
उत्तर : 1) भारत के विकसित महानगरीय क्षेत्रों के कुछ क्षेत्र ऐसे है जहाँ जनसंख्या के एक छोटे भाग की आने आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध है। दूसरी ओर भारत के इन्हीं शहरों में गंदी बस्तियाँ है जहाँ अति मूल भूत आवश्यकता का भी अभाव हैं।
2) भारत में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, भूमिहीन कृषि मजदूरो, गरीब किसान और गंदी बस्तियों में रहने वाले का एक बड़ा समूह है जो हाशिए पर है। दूसरी और चंद अमीर लोग विलासिता का जीवन जी रहे हैं।
3) स्त्रियों के साथ समाज में भेदभाव हो रहे हैं इनके रूप में जनसंख्या का एक बड़ा भाग कष्ट भोग रहा हैं।
4) हमने विकास के नाम पर अपनी पर्यावरणीय दशाओं का निम्नीकरण किया हैं और पारिस्थितिक संकट खड़ा कर दिया है।
5) हमारा तकनीकी ज्ञान अन्य देशों के मुकाबले में कम है। हमें अभी और विकास की आवश्यकता है जिससे हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग कर सके।
प्रश्न 24. विकास सामान्य रूप से और मानव विकास विशेष रूप से सामाजिक विज्ञानों में प्रयुक्त होने वाली एक जटिल संकल्पना है। उपयुक्त तकों द्वारा इस कथन को न्यायसंगत ठहराइए।
उत्तर : विकास सामान्य रूप से और मानव विकास विशेष रूप से सामाजिक विज्ञानों में प्रयुक्त होने वाली एक जटिल संकल्पना है क्योंकि युगों से यही सोचा जा रहा है कि यदि मानव विकास को एक बार प्राप्त कर लिया गया। तो यह समाज की सभी सामाजिक, सांस्कृति तथा पर्यावरणीय समस्याओं
का निदान कर पायेगी।
• मानव विकास एक ऐसी संकल्पना है जिसने एक ओर मानव जीवन की गुणवत्ता में अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए हैं वहीं दूसरी ओर प्रादेशिक विषमताओं, सामाजिक भेदभाव, लोगों विस्थापन मानवीय मूल्यों का विनाश तथा पर्यावरणीय निम्नीकरण को बढ़ाया है |
* 1993 की मानव विकास रिपोर्ट में लोगों के बढते सशक्तिकरण पर बल दिया गया था। रिपोर्ट ने शांति और मानव विकास लाने में
नागरिक व समाज की सकारात्मक भूमिका को भी स्वीकारा।
• मानव विकास ने विश्व के सीमित संसाधनों बहविध प्रयोगों को बढ़ाने में योगदान दिया है 18वीं सदी के बाद जनसंख्या और संसाधनों के बीच का अन्तर बढ़ा है। संसाधनों में थोड़ी वृद्धि हुई है जबकि
जनसंख्या में विपुल वृद्धि हुई हैं।
प्रश्न 25. भारत की संस्कति एवं सभ्यता लम्बे समय से ही जनसंख्या और संसाधनों के विकास के प्रति संवेदनशील रही है। हम सदैव मानव विकास और संसाधनों के बीच संतुलन की बात करते रहे हैं। इस कथन को उचित तर्क देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : 1) भारत में प्राचीन ग्रंथों में प्रकृति के तत्वों के बीच उचित संतुलन और
समरसता के विषय में चिंता व्यक्त की जाती है ।
2) गाँधी जी ने सदैव प्रकृति एवं मानव के बीच संतुलन एवं समरसता पर बल दिया है।
3) भारतीय समाज ने औद्योगिकरण द्वारा नैतिक आध्यात्मिक, स्वावलम्बन अहिंसा, पारस्परिक सहयोग और पर्यावरण के हृास को गलत ठहराया है।
4) गाँधी जी के विचार व्यक्तिगत मितव्यता, सामाजिक धन की न्यायधारिता अहिंसा को राष्ट्र व व्यक्ति के जीवन में उच्चतर लक्ष्य
प्राप्ति की कुंजी मानते रहे हैं।
5) हमारे इन विचारों की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुस्तकों व सम्मेलनों में सराहना की है।
प्रश्न 26. मानव विकास क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : लोगों के विकल्पों को बढ़ाना और जन कल्याण के स्तर को ऊंचा उठाना ही
मानव विकास है । जन कलयाण से तात्पर्य दीर्घ स्वस्थ जीवन, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा व रहन-सहन के उच्च स्तर से है। इसलिए मानव विकास आवश्यक है:-
1) यह भौतिक पर्यावरण व संसाधनों के हितैषी है।
2) यह साजमाजिक अशांति को कम करने तथा राजनैतिक स्थिरता को बढ़ाने में भी सहायक हो सकता ।
3) मानव विकास के सभी पक्षों का महत्वपूर्ण उद्देश्य मानवीय दशाओं को सुधारना है
4) मानव विकास उच्चतर उत्पादकता का साधन है क्योंकि कुशल व स्वस्थ श्रमिक अधिक उत्पादन करने में सहायक होते हैं।
प्रश्न 27. भारत के विभिन्न राज्यों में संयुक्त सूचकांक मूल्य के साथ केरल (0638) कोटिक्रम से सर्वोच्च है। इस कथन को ध्यान में रखते हुए कुछ कारकों का उल्लेख कीजिए जो इसके लिए उत्तरदाई हैं।
उत्तर : भारत को मध्यम मानव विकास दर्शाने वाले देशों में रखा गया है। देशों 172
में इसका 127 वां स्थान है। भारत के विभिन्न राज्यों में केरल 0.638 माने। विकास सूचकांक के मूल्य के साथ कोटिक्रम में सर्वोच्च है।
इसके लिए कई कारक उत्तरदायी हैं:-
1) शैक्षिक उपलब्धियाँ
2) आर्थिक विकास का स्तर
3) सामाजिक परिवेश
4) सरकारी प्रयास
5) योजनाबद्ध विकास प्रारूप
प्रश्न 28. भारत में 1951-1999 की अवधि में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (पुरूषों व स्त्रियों) विशेष रूप से बढ़ी है। उचित कारणों की व्याख्या कीजिए :-
उत्तर : कारण :- 1) निरन्तर बढ़ती खाद्य सुरक्षा
2) चिकित्सा व स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार।
3) अस्पतालों व स्वास्थ्य संस्थानों की बढ़ती संख्या।
4) बढ़ती साक्षरता दर व सामाजिक जागरूकता ।
प्रश्न 29. भारत में स्त्री लिंगानुपात घट रहा है। यदि केरल की अपवाद मान लिया जाए तो सभी राज्यों का लिंगानुपात घट रहा है। इस कथन की समीक्षा करते हुए कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : भारत में स्त्री लिंगानुपात घट रहा है। 2011 की जनगणना के अनसार भारत का
लिंगानुपात 940/1000 है। केरल राज्य (1084/1000) को छोड़कर अन्य सभी राज्यों का लिंगानुपात घट रहा है। दिल्ली (868/1000) , पंजाब (895/1000) व हरियाणा (879/1000 ) जैसे राज्यों में यह सबसे चिंताजनक है जहाँ पर यह अनुपात प्रति हजार बालकों की तुलना में 900 बालिकाओं से भी। नीचे हैं। इसके लिए कई कारक उत्तरदायी है:-
1) महिला निरक्षरता
2) सामाजिक दृष्टिकोण
3) पुत्र को वरीयता देना
4) कन्या भ्रूण हत्या अल्ट्रासाउंड
5) बालिका मृत्युदर का उच्च होना,/लड़कियों के पोषण पर कम ध्यान
देना।
मूल्य आधारित प्रश्न
प्रश्न 30. भारत में सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के सशक्तीकरण के लिए आवश्यक मानवीय मूल्यों को सपष्ट कीजिए?
उत्तरः 1) इनके लिए उत्तम शिक्षा तथा स्वास्थ्य की सुविधाएं निर्धारित की जानी चाहिए।
2) इनकी संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ये हाशिए पर ना रहे।
3) समाज में इनके सम्मान व सहभागिता को बढ़ाना चाहिए।
प्रश्न 31. ‘समृद्ध संसाधन आधार और इन संसाधनों तक सभी, विशेष रूप से निर्धनपद-दलित और हाशिए पर छोड़ दिए गए लोगों की पहुंच उत्पादकता, कल्याण और मानव विकास की कुंजी है।’ इस कथन के संदर्भ में पोषित मानवीय मूल्यों को तीन बिन्दुओं में बताइये।
उत्तर: 1) समानता :- मानव विकास तभी संभव है जब समाज के सभी वर्गों के साथ समानता का व्यवहार किया जाए। मानव विकास की अवधारणा में सभी को समान माना जाता है।
2) संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण :- समाज में विद्यमान आर्थिक असमानताओं को ध्यान में रखते हुए संसाधनों तक सबकी समान पहुंच व संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
3) जन कल्याण की भावना : – सरकार की अपनी नीतियाँ लोक कल्याणकारी बनानी होगी जिसका उद्देश्य सर्वजन सुखाय हो।