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class 12 geography bharat log aur arthvyavastha chapter 4 solution hindi

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4) मानव बस्तियाँ


प्र० 1. नीचे दिए गये चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

(i) निम्नलिखित में से कौन-सा नगर नदी तट पर अवस्थित नहीं है?
(क) आगरा
(ख) भोपाल
(ग) पटना
(घ) कोलकाता

(ii) भारत की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशेषता नगर की परिभाषा का अंग नहीं है।
(क) जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(ख) नगरपालिका, निगम का होना
(ग) 75% से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक खंड में संलग्ने होना
(घ) जनसंख्या आकार 5000 व्यक्तियों से अधिक

(iii) निम्नलिखित में से किस पर्यावरण में परिक्षिप्त ग्रामीण बस्तियों की अपेक्षा नहीं की जा सकती?
(क) गंगा का जलोढ़ मैदान ।
(ख) राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क प्रदेश
(ग) हिमालय की निचली घाटिया
(घ) उत्तर-पूर्व के वन और पहाड़ियाँ

(iv) निम्नलिखित में से नगरों का कौन-सा वर्ग अपने पदानुक्रम के अनुसार क्रमबद्ध है?
(क) बृहत मुंबई, बंगलौर, कोलकाता, चेन्नई
(ख) दिल्ली, बृहन मुंबई, चेन्नई, कोलकाता
(ग) कोलकाता, बृहन मुंबई, चेन्नई, कोलकाता
(घ) बृहन मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई।

उत्तर:
(i) (ख) भोपाल
(ii) (ग) 75% से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक खंड में संलग्न होना।
(iii) (क) गंगा का जलोढ़ मैदान
(iv) (घ) बृहन मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई।

प्र० 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) गैरिसन नगर क्या होते हैं? उनका क्या प्रकार्य होता है?

उत्तर: ब्रिटिश शासनकाल में इन नगरों का उदय गैरिसन नगरों के रूप में हुआ है। ये छावनी नगर भी कहलाते हैं। अंबाला, जालंधर, महू, बबीना, उधमपुर आदि गैरिसन अथवा छावनी नगर हैं।

(ii) किसी नगरीय संकुल की पहचान किस प्रकार की जा सकती है?

उत्तर: 5,000 लाख से अधिक जनसंख्या, उच्चतम जनघनत्व तथा उसका बड़ा भाग द्वितीयक व तृतीयक उच्च स्तरीय व्यावसायिक, प्रशासकीय, प्रबंधकीय सेवाओं, आर्थिक गतिविधियों में संलग्न होने से किसी नगरीय संकुल की पहचान आसानी से की जा सकती है।

(iii) मरुस्थली प्रदेशों में गाँवों के अवस्थिति के कौन-से मुख्य कारक होते हैं?

उत्तर: मरुस्थली प्रदेशों में जल के अभाव में उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके, इसके लिए यहाँ संहत बस्तियों की अवस्थिति को अनिवार्य बना दिया है।


(iv) महानगर क्या होते हैं? ये नगरीय संकुलों से किस प्रकार भिन्न होते हैं?

उत्तर: 10 लाख से 50 लाख की जनसंख्या वाले नगरों को महानगर कहा जाता है जबकि नगरीय संकुल कई विशेषीकृत नगरों व महानगरों के विकास तथा विस्तार के परिणामस्वरूप उनके आपस में प्रकार्यात्मक अंतर्संबंध बन जाने के कारण विकसित होते हैं। इनकी जनसंख्या 50 लाख से अधिक होती है तथा जनघनत्व भी उच्च होता है।

प्र० 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।

(i) विभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियों के लक्षणों की विवेचना कीजिए। विभिन्न भौतिक पर्यावरणों में बस्तियों के प्रारूपों के लिए उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?

उत्तर: भारत में मानव बसाव के आकार व प्रकार के आधार पर ग्रामीण बस्तियों को चार वर्गों में रखा जाता है –
(i) गुच्छित, संकलित अथवा आकेंद्रित – गुच्छित ग्रामीण बस्ती घरों का एक संहत अथवा संकुलित प्रारूप होता है जो कि इसके चारों ओर फैले खेतों, खलिहानों और चरागाहों से पृथक होता है। संकुलित प्रारूप में ज्यामितीय आकृतियाँ प्रस्तुत करती गलियाँ व मुख्य मार्ग होते हैं। जैसे-आयताकार, अरीय, रैखिक इत्यादि। भारत के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों, उत्तर-पूर्वी राज्यों, मध्य भारत तथा राजस्थान के जल अभाव वाले क्षेत्रों में
गुच्छित अथवा संकुलित बस्तियाँ पायी जाती हैं। सुरक्षा या प्रतिरक्षा कारणों से भी लोग संहत गाँवों में रहते हैं।

(ii) अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ – अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ प्रायः किसी बड़े गाँव के विखंडन का परिणाम होता है। इसमें ग्रामीण समाज का कोई वर्ग स्वेच्छा से अथवा बलपूर्वक मुख्य गुच्छ अथवा गाँव से अलग थोड़ी दूरी पर रहने लगता है। गाँव के केंद्रीय भाग पर प्रभावशाली लोग काबिज रहते हैं। ऐसी बस्तियाँ गुजरात के मैदान तथा राजस्थान के कुछ भागों में पायी जाती हैं।

(iii) पल्ली बस्तियाँ – जब कोई बस्ती भौतिक रूप से अनेक इकाइयों में बँट जाती हैं किंतु उन सबका नाम एक ही रहता है, ऐसी इकाइयों को देश के अलग-अलग भागों में स्थानीय स्तर पर पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी इत्यादि कहा जाता है। यह विखंडन प्रायः सामाजिक एवं मानव जातीय कारकों द्वारा अभिप्रेरित होता है। ऐसे गाँव मध्य और निम्न गंगा के मैदान, छत्तीसगढ़ तथा हिमालय की निचली घाटियों में अधिक पाये जाते

(iv) परिक्षिप्त बस्तियाँ – परिक्षिप्त अथवा एकाकी बस्ती प्रारूप भारत के मेघालय, उत्तरांचल, हिमालय प्रदेश तथा केरल के अनेक भागों में छोटी पहाड़ियों की छालों पर, जंगलों में तथा भूभाग की अत्यधिक विखंडित प्रकृति वाले स्थानों पर देखने को मिलता है।

ग्रामीण बस्तियों के विभिन्न प्रकारों के लिए अनेक कारक और दशाएँ उत्तरदायी होती हैं; जैसे
(i) भौतिक कारक-भू-भाग की प्रकृति, ऊँचाई, जलवायु तथा जल की उपलब्धता,
(ii) सांस्कृतिक और मानव जातीय कारक-सामाजिक संरचना, जाति और धर्म,
(iii) सुरक्षा संबंधी कारक-चोरियों और डकैतियों से सुरक्षा।


(ii) क्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? नगर बहुप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं?

उत्तर: नगर अपने प्रकार्यों में स्थिर नहीं हैं। उनके गतिशील स्वभाव के कारण विशेषीकृत नगरों के प्रकार्यों में परिवर्तन हो जाता है तथा वे लोगों को अनेक सेवाएँ प्रदान करने वाले आर्थिक नोड़ (node) के रूप में कार्य करते हैं। अतः वर्तमान समय में एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना नहीं की जा सकती। तेजी से बढ़ती जनसंख्या तथा लोगों की इच्छाओं व आकांक्षाओं को संतुष्ट करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगरों को महानगर तथा उसके बाद मेगानगर बनने में अधिक समय नहीं लगता है। 20वीं शताब्दी के दौरान भारत में नगरीय जनसंख्या 11 गुना बढ़ी है। भारत की 60 प्रतिशत नगरीय जनसंख्या प्रथम श्रेणी के नगरों में रहती है तथा कुल नगरीय जनसंख्या का 21 प्रतिशत भारत के छः मेगानगरों में निवास करती है। लोगों की आवश्यकताएँ बढ़ने पर विशेषीकृत नगर भी महानगर तथा उसके बाद मेगानगर (नगरीय संकुल) बनने पर बहुप्रकार्यात्मक बन जाते हैं जहाँ उद्योग, वाणिज्य, व्यवसाय, प्रशासन, परिवहन तथा अन्य प्रकार की उच्चस्तरीय सेवाएँ महत्त्वपूर्ण हो जाती हैं। प्रकार्य इतने अंतर्ग्रथित हो जाते हैं कि नगर को किसी विशेष प्रकार्य वर्ग में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। बल्कि नगर के क्षेत्र विशेष किसी विशेष प्रकार्य के लिए जाने जाने लगते हैं, जैसे दिल्ली में नेहरू प्लेस-कम्प्यूटर के लिए, भागीरथ प्लेस-इलैक्ट्रीकल सामान के लिए, लाजपतराय मार्केट-इलैक्ट्रोनिक्स सामान के लिए तथा गाँधीनगर-रेडीमेड गारमेंट्स के लिए इत्यादि।

एक अंक वाले प्रश्न

प्रश्न 1. ” बस्तियाँ विभिन्न आकार प्रकार की होती हैं”। बस्तियाँ के प्रकारों को निर्धारित करने वाले कारक कौन से हैं ?

उत्तर : निर्मित क्षेत्र के विस्तार व अंतर्वास दूरी।


प्रश्न 2. नगरीय संकुल की परिभाषा दीजिए।

उत्तर : एक नगरीय क्षेत्र के चारों ओर नगरों की एक श्रृंखंला विकसित हो जाती है।
या कभी-कभी दो या दो से अधिक नगर एक साथ जुडकर एक बडा नगरीय परिदृष्य बनाते , ऐसे क्षेत्र को नगरीय संकुल कहते है


प्रश्न 3. कई बार बस्ती भौतिक रुप से एक दूसरे से पृथक इकाईयों में बंट जाती है किन्तु उन सबका नाम एक ही रहता है। ऐसी बस्ती का नाम बताइए व उदाहरण भी दीजिए ।

उत्तर : पल्ली बस्ती-पान्ना, पाड़ा, पाली, नंगला व ढाँणी ।


प्रश्न 4. मानव भूगोल में “मानव बस्ती” के अध्ययन का क्या महत्व है ?

उत्तर : मानव भूगोल में मानव बस्ती का अध्ययन वहाँ की जलवायु व वातावरण
का मानव से सम्बन्ध दर्शाता है । बस्तियों के प्रतिरूप का संबंध मानव के वातावरण, आस-पास की परिस्थिति व जलवायु से ही प्रभावित होता है ।


प्रश्न 5. भारत के चार नगरीय संकुलो के नाम बताइये।

उत्तर : मुंबई, दिल्ली, कोलकत्ता, चेन्नई ।


प्रश्न 6. गैरिसन नगर किसे कहते है इसके दो उदाहरण दीजिए।

उतरः जिन नगरों में सेना की छावनियाँ होती उन्हें गैरिसन नगर कहते है अंबाला, जालंधर, बबीना, उधमपुर इस प्रकार के नगर है।


प्रश्न 7. ग्रामीण बस्तियों में मुख्य रूप किस तरह के आर्थिक क्रियाकलाप होते हैं ?

उतरः ग्रामीण बस्तियों में मुख्य रूप से प्राथमिक क्रिया कलाप होते हैं।

प्रश्न10. महानगर एवं मेगानगर में क्या अंतर है ?

उत्तर : दस लाख से पचास लाख की जनसंख्या वाले नगरों को महानगर तथा
पचास लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों को मेगानगर कहते है।


प्रश्न 11. भारत में प्रथम श्रेणी के नगरों की संख्या कितनी हैं ?

उत्तर : 423


प्रश्न 12. मारत के दो प्रमुख खनन नगरों के नाम बताओ ?

उत्तर : रानीगंज, झरिया ।


प्रश्न 13. भारत में नगरीकरण के स्तर को किस प्रकार मापा जाता है,

उत्तर : भारत में नगरीकरण के स्तर का माप कुल जनंसख्या में नगरीय के प्रतिशत के रूप में किया जाता है।


प्रश्न 14. भारत का सबसे बड़े नगरीय संकुल कौन सा है ?

उत्तर : बृहत मुम्बई ।


प्रश्न 15. भारत के उस महानगर का नाम बताइए जिसमें मलिन बस्तियों मे रहने वाली जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक है ?

उत्तर : बृहत मुम्बई।


प्रश्न 16. भारत के उपजाऊ जलोटू मैदानों तथा राजस्थान में किस प्रकार की बस्तियाँ पाई जाती हैं ?

उत्तर : उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में – गुच्छित बस्तियाँ
राजस्थान में – अर्धशुच्छित बस्तियाँ


प्रश्न 17.भौतिक रूप से एक-दूसरे से पृथक अनेक इकाइयों में बंटी बस्ती जिसका नाम, नाम ही होता है । क्या कहते हैं ? –

उत्तर : पुरवा बस्तियाँ ।


प्रश्न 18, सडक रेल लाइन, नदी, नहर आदि के किनारों पर ग्रामीण बस्तियों का कौन-सा प्रतिरूप विकसित होता है ?

उत्तर : रेखिक प्रतिरूप ।


प्रश्न 19. भारत में नगरों कि किस वर्ग में नगरीय जनसंख्या का उच्वता प्रतिशत है ?

उत्तर : प्रथम वर्ग

प्रश्न 20.मानव बस्ती का अर्थ बताइये ।

उत्तर : किसी भी प्रकार और आकार के घरों का संकल जिनमें मनुष्य रहते है। मानव बस्ती कहते है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 21.भारत की ग्रामीण बस्ती एवं नगरीय बस्ती में आधारभूत अंतर हैं। करें। (कोई तीन अंतर)

उत्तर : भारत की ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती में तीन आधारभूत अंतर निम्नलिखित है ।

* ग्रामीण बस्ती
1) यहाँ के लोग अपने जीवन यापन के लिए अधिकतर प्राथमिक क्रियाकलापों पर निर्भर करते है जैसे – कृषि, पशुपालन आदि ।
2) ग्रामीण बस्तियों में उत्पादित सब्जी, फल, फूल, अनाज आदि जैसे उत्पाद, नगरीय बस्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
3) ग्रामीण लोग एक स्थान छोड़कर दूसरे स्थान जाकर बसने के बारे में कम सोचते हैं अतः उनमें सामाजिक संबंध प्रगाढ़ होते है। ग्रामीण बस्तियों के निवासियों में क्षैतिज गतिशीलता कम होता है ।

* नगरीय बस्ती
1) नगरीय बस्तियों में द्वितीयक एवं तृतीयक तथा विभिन्न प्रकार की सेवाओं की प्रधानता होती है ।
2) नगरीय बस्तियों के विनिर्माण उद्योग के उत्पाद ग्रामीण बस्तियों में जाते हैं। परिवहन एवं संचार माध्यम के जरिए यह कार्य संपन्न होता है
3) शहरों में क्षैतिज गतिशीलता अधिक पाई जाती है अर्थात् लोग एक जगह जाकर बस जाते हैं।
4) उनमें सामाजिक संबंधों में औपचारिकता अधिक होती है ।

प्रश्न 23. कोई नगर नगरीय संकुल कब बन जाता है ?

उत्तर: कोई नगर नगरीय संकुल बन जाता है जब इसमें से किसी एक का समावेश होता हैं।

1) नगर एवं उससे संलग्न विस्तार।
2) विस्तार सहित या बिना विस्तार के जब दो या अधिक नगर मिल जाते हैं।
3) एक नगर या उससे सटे हुए या एक से अधिक नगर और उन नगरे के क्रमिक विस्तार से रेलवे कॉलोनी, विश्वविद्यालय परिसरपतन पतन क्षेत्र या सैनिक छावनी को मिलाकर नगरीय संकुल बन जाता है ।

प्रश्न 24. पल्ली बस्तिया क्या है ? भारत के किन्हीं दो क्षेत्रों के नाम बताए जहां की बस्तियां पाई जाती है ?

उत्तर : वे बस्तियाँ जो किसी बडे गाँव से अलग छोटे-छोटे समूहों में बस जाती है।
लेकिन वे उसी बड़े गाँव का ही हिस्सा होती है इन्हें अलग-अलग जगहों में अलग-अलग नामों में पुकारा जाता है जैसे पल्ली, नंगला, ढाणी, पूर्व आदि। ये बस्तियाँ छत्तीसगढ़ एवं हिमालय की निचली घाटियों में पाई जाती हैं।

प्रश्न 25.भारत में ग्रामीण बस्तियों के विभिन्न प्रकारों के लिए उत्तरदायी किन्हीं तीन भौतिक कारकों को स्पष्ट कीजिए
या
“बस्तियों के प्रकार या निर्मित क्षेत्र के विस्तार द्वारा निर्धारित होते हैं। फिर भी अनेक क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ अन्य प्रकार की ग्रामीण बस्तियाँ पाई जाती हैं इन बस्तियों के प्रकारों के लिए उत्तरदायी भौतिक कारकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर : भारत में ग्रामीण बस्तियों के विभिन्न प्रकारों के लिए उत्तरदायी भौतिक
कारक निम्नलिखित हैं :-
1) उच्चावच की प्रकृति मानव अपने निवास हेतु ऊंचे क्षेत्रों को बाढ़ व जंगली जानवरों से सुरक्षित रहने के लिए चुना।
2) जल की उपलब्धता कृषि व अपने ग्रामीण बस्तियां जल स्रोतों के निकट बसती हैं। है
3) उर्वरक मृदा-मनुष्य बसने के लिए उस जगह का चुनाव करता
जहाँ की मृदा कृषि लिए उपयुक्त एवं उपजाऊ हो।
4) जलवायु मानव अपने निवास हेतु अनुकूल जलवायु में रहना पसंद करते हैं।

प्रश्न 26 भारत.में आधुनिक नगरों में से कई नगर अंग्रेजी शासन में विकसित हुए थे।’ इस कथन को प्रमाणित कीजिए ।

उत्तर : यह सच है कि भारत में आधुनिक नगरों में से कई नगर अंग्रेजी शासन में
विकसित हुए थे।
• व्यापार के उद्देश्य से तटीय क्षेत्रों में नगरों का विकास किया गया । केन्टोंमेन्ट कैम्प नगरों का विकास हुआ जैसे जी.टी.बी. नगर।
• विश्राम स्थलों को विकसित किया गया तथा पर्वतीय नगरो का विकास किया गया ।

• मुम्बई, चेन्नई व कोलकत्ता जैसे प्रमुख नोड़ों पर अंग्रेजों ने अपनी पकड़ मजबूत की तथा उन्हें विकसित किया ।


प्रश्न 27. “ग्रामीण बस्तियों के विपरीत नगरीय बस्तियाँ सामान्यतः संहत और विशाल आकार की होती हैं।’ कथन का द्वारा कीजिए ।

उत्तर : ग्रामीण बस्तियों के विपरीत नगरीय बस्तियाँ सामान्यतः सहंत और विशाल
आकार की होती है क्योंकि :-

• नगरीय बस्तियाँ अनेक प्रकार के अकृषि, आर्थिक व प्रशासकीय प्रकार्यों में संलग्न होती है।

• नगर अपने चारों ओर के क्षेत्रों से प्रकार्यात्मक रूप से जुड़ा हुआ होता है।

• वस्तुओं व सेवाओं के विनिमय के कारण नगर मण्डी शहरों व नगरों की श्रृंखला से जुडे रहते हैं इसलिए नगर संहत व विशाल आकार के
होते हैं।

प्रश्न 30.मारत में परिक्षिप्त ग्रामीण बस्तियों की विशेषताएँ बताइएँ :

उत्तर : भारत में परिक्षिप्त या एकाकी बस्तियों की प्रमुख विशेषताएँ हैं।:-

1. ये बस्ती प्रारूप सुदूर जंगलो या छोटो पहाड़ियों की ढालों पर खोतो या चारागाहों के आस पास दिखाई पड़ते हैं।

2 इनमें मकान एक दूसरे से दूर बने होते हैं और लोग अलग-अलग या कि एकाकी रहते हैं।

3. मेघालय, उत्तरांचल व हिमाचल प्रदेश के अनेक भागों में यही पाई जोती हैं ।
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(पाँच अंक वाले)


प्रश्न 31.भारत की ग्रामीण बस्तियों को कितने प्रकारों में रखा जा है सभी के नाम लिखें एवं किन्हीं तीन का वर्णन करें ?
अथवा
गुलित बस्तियों तथा पल्ली बस्तियों में अंतर स्पष्ट कर I उपयुक्त उदाहरण से इसको विवरण दे।

उत्तर : वृहत तौर पर भारत की ग्रामीण बस्तियों को चार प्रकारों में रखा सकते हैं। गुच्छित बस्तियाँ, अगुच्छित बस्तियाँ, पल्ली व एकाकी। इनमें से प्रथम तीन का वर्णन नीचे दिया गया है।

1) गुच्छित बस्तियों :- इस बस्तियों में घरों का समूह बहुत पासपास होता है। इन गाँवों में आवास स्थान एवं खेत खलिहान और चारागाह क्षेत्र स्पष्ट रूप से अलग होते हैं। ये बस्तियाँ आयताकार, अरीय रेखिक आदि प्रतिरूपों में मिलती है और उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में पाई जाती है सुरक्षा कारणों से बुंदेलखंड, नागालैंड में तथा जल के रेल
अभाव के कारण राजस्थान में ये बस्तियां मिलती हैं।

2) अढंगुच्छित बस्तियाँ :- किसी बड़े गाँव में समाज का कोई वर्ग किन्हीं कारणों से मुख्य गाँव से दूर रहने लगता है । इस तरह
अढंगुच्छित बस्तियों का जन्म होता है । इस तरह की बस्तियाँ गुजरात एवं राजस्थान के कुछ भागों में पाई जाती है।

3) पल्ली बस्तियाँ:- इस प्रकार की बस्ती अनेक भागों बंटी होती हैं। किन्तु बस्ती का नाम एक ही होती है इस बस्ती की इकाइयों को स्थानीय स्तर पर पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाणी इत्यादि नाम से जानते हैं व ऐसे गाँव मध्य एवं निम्न गंगा के मैदान, छत्तीसगढ़ हिमालय की निचली घटियों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 32 प्रकार्य के आधार पर भारतीय नगरों को छह प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत करें। उदाहरण भी दीजिए ?

उत्तर : भारतीय नगरों को उनमें होने वाले कार्यों की प्रमुखता के आधार पर कई भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है उनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं :-

i) प्रशासन शहर :- वे शहर या नगर जहां उच्चतर क्रम के प्रशासनिक मुख्यालय होते हैं जैसे दिल्ली, चंडीगढ़ आदि ।

2) औद्योगिक नगर :- जिन नगरों में उद्योगों की प्रधानता हो जैसे मुंबई, सेलम, जमशेदपुर ।।

3) परिवहन नगर :- कुछ नगर पत्तन के रूप में आयात-निर्यात में संलग्न रहते हैं जैसे कांडला, कोच्चि, विशाखापट्नम् ।

4) खनन नगर :- वे नगर जो मुख्यत; खनन के लिए जाने जाते हैं।
जैसे रानीगंज, झारिया, डिगबोई आदि ।

5) गैरिसन (छावनी) नगर :- जिन नगरों में सेन की छावनियां होती हैं। जैसे अंबाला, मेरठ।

6) धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगर :- ऐसे नगर जो धार्मिक व सांस्कृतिक केन्द्र के रूप विख्यात है। जैसे वाराणसीमथुराअजमेर आदि|


प्रश्न 31 भारतीय नगरों को उनके विकास के विशिष्ट गुणों के आधार पर कितने वर्षों में रखा जाता है?
अथवा
“भारत में नगरों का अभ्युदय प्रागैतिहासिक काल से हुआ है उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर :- भारत में नगरों का विकास इतिहास
के विभिन्न चरणों से प्रभावित रहा है। इस आधार पर नगरों को विभिन्न वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

(1) प्राचीन नगर:- इस काल में अधिकांश नगरों का विकास धार्मिक अथवा सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में हुआ है। उदाहरण के लिए प्रयाग (इलाहाबाद)पाटलिपुत्र (पटना) मदुरई।

(2) मध्यकालीन नगर-इस काल में अधिकांशतः नगरों का विकास रजवाड़ों व राज्यों के मुख्यालयों के रूप में हुआ । हैदराबा, जयपु! लखनऊआगरा इसके उदाहरण हैं

(3) आधुनिक नगर:- अंग्रेजों व अन्य यूरोपीय देशों ने अपनी प्रभाविता
को प्रत्यक्ष रूप से अथवा रजवाड़ों पर नियंत्रण के माध्यम से प्रशासनिक केंद्रो, ग्रीष्मकालीन विश्राम स्थलों, पत्तनों प्रशासनिक व सैन्य क्षेत्रों को नगरों के रूप में विकसित किया।

(4) स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के नगर:-इस समय अनेक नगर प्रशासनिक केंद्रो जैसे-चंडीगढ़, भुवनेश्वर आदि व औद्योगिक केंद्र
जैसे दुर्गापुर, भिलाई, बरौनी आदि के रूप में विकसित हुए।

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