Sam1999
class 10 sparsh chapter 9 notes
Class 10 sparsh chapter 9 रवींद्रनाथ ठाकुर आत्मत्राण notes विपदाओं से मुझे बचाओ ,यह मेरी प्रार्थना नहींकेवल इतना हो (करुणामय)कभी न विपदा में पाऊँ भय।दुःख ताप से व्यथित चित को न दो सांत्वना नहीं सहींपर इतना होवे (करुणामय)दुःख को मैं कर सकूँ सदा जय।कोई कहीं… Read More »class 10 sparsh chapter 9 notes
class 10 sparsh chapter 8 notes
Class 10 sparsh chapter 8 कैफ़ी आज़मी कर चले हम फिदा notes कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियोअब तुम्हारे हवाले वतन साथियोसाँस थमती गई, नब्ज़ जमती गईफिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दियाकट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहींसर हिमालय का हमने न… Read More »class 10 sparsh chapter 8 notes
class 10 sparsh chapter 7 notes
Class 10 sparsh chapter 7 वीरेन डंगवाल तोप notes कम्पनी बाग़ के मुहाने परधर रखी गई है यह 1857 की तोपइसकी होती है बड़ी सम्हालविरासत में मिलेकम्पनी बाग की तरहसाल में चमकायी जाती है दो बारभावार्थ- प्रस्तुत कविता में कवि वीरेन डंगवाल ने 1857 के… Read More »class 10 sparsh chapter 7 notes
class 10 sparsh chapter 6 notes
Class 10 sparsh chapter 6 मधुर मधुर मेरे दीपक जल notes व्याख्यामधुर-मधुर मेरे दीपक जल!युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपलप्रियतम का पथ आलोकित कर!भावार्थ- कवियित्री महादेवी वर्मा को अपने ईश्वर पर अपार विश्वास और श्रद्धा है। इसी विश्वास के सहारे वह अपने प्रियतम के भक्ति में लीन… Read More »class 10 sparsh chapter 6 notes
class 10 sparsh chapter 5 notes
Class 10 sparsh chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस notes व्याख्यापावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश,पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेशाभावार्थ- इस कविता में कवि सुमित्रानंदन पंत जी ने पर्वतीय इलाके में वर्षा ऋतु का सजीव चित्रण किया है। पर्वतीय प्रदेश में वर्षा ऋतु होने से वहाँ प्रकृति में… Read More »class 10 sparsh chapter 5 notes