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Sam1999

class 10 sparsh chapter 4 notes

Class 10 sparsh chapter 4 मैथिलीशरण गुप्त मनुष्यता notes व्याख्याप्रस्तुत पाठ में कवि मैथलीशरण गुप्त ने सही अर्थों में मनुष्य किसे कहते हैं उसे बताया है। कविता परोपकार की भावना का बखान करती है तथा मनुष्य को भलाई और भाईचारे के पथ पर चलने का… Read More »class 10 sparsh chapter 4 notes

class 10 sparsh chapter 3 notes

Class 10 sparsh chapter 3 बिहारी दोहे notes सोहत ओ पीतु पटु स्याम, सलौनैं गात।मनौ नीलमनि-सैल पर आतपु परयौ प्रभात।।भावार्थ – इन पंक्तियों में बिहारी ने श्रीकृष्ण के सौंदर्य का वर्णन करते हुए कहते हैं पीले वस्त्र पहने श्रीकृष्ण ऐसे सुशोभित हो रहे हैं मानो… Read More »class 10 sparsh chapter 3 notes

class 10 sparsh chapter 2 notes

Class 10 sparsh chapter 2 मीरा पद notes भावार्थहरि आप हरो जन री भीर।द्रोपदी री लाज राखी, आप बढायो चीर।भगत कारण रूप नरहरि, धरयो आप सरीर।बूढतो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।भावार्थ – इस पद में मीराबाई अपने प्रिय भगवान… Read More »class 10 sparsh chapter 2 notes

class 10 sparsh chapter 1 notes

Class 10 sparsh chapter 1 कबीर साखी notes ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ।अपना तन सीतल करै, औरन को सुख होइ।।भावार्थ – कबीर कहते हैं की हमें ऐसी बातें करनी चाहिए जिसमें हमारा अहं ना झलकता हो। इससे हमारा मन शांत रहेगा तथा सुनने… Read More »class 10 sparsh chapter 1 notes